रायपुर। डिजिटल युग के विस्तार ने मनोरंजन की दुनिया को जिस तरह बदला है, उसने समाज की सोच को भी नई दिशा दी है। तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच ऑनलाइन गेमिंग एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभरा है जिसे अब केवल बच्चों की मौज-मस्ती का साधन मानना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा हो सकता है। डॉ शानू मसीह कहती हे कि इंटरनेट और स्मार्टफोन की आसान उपलब्धता ने गेमिंग को घर-घर तक पहुंचा दिया है, जिससे यह गतिविधि हर आयु वर्ग के लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। पहले वीडियो गेम्स को सीमित मनोरंजन माना जाता था, लेकिन वर्तमान समय में यह बहुआयामी डिजिटल उद्योग में बदल चुका है। इस क्षेत्र ने युवाओं की जीवनशैली, सोच और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। डॉ0 शानू मसीह कहती है कि समाज में अभी भी कई लोग इसे हल्की-फुल्की गतिविधि समझते हैं, जबकि गेमिंग का प्रभाव गहराई तक पहुंच चुका है। यह क्षेत्र केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापार, करियर, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा जैसे अनेक विषयों से जुड़ चुका है, जो इसे गंभीरता से समझने की आवश्यकता को और अधिक मजबूत बनाता है।
डॉ. शानू मसीह का मानना है कि आधुनिक डिजिटल युग में ऑनलाइन गेमिंग को केवल बच्चों का मनोरंजन समझना समाज की एक बड़ी गलतफहमी बनती जा रही है। तकनीक के तीव्र विस्तार और इंटरनेट की आसान उपलब्धता ने गेमिंग को जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। पहले जहां वीडियो गेम्स को सीमित मनोरंजन का साधन माना जाता था, वहीं आज यह एक विशाल डिजिटल व्यवस्था का रूप ले चुका है। डॉ. शानू मसीह के अनुसार गेमिंग का प्रभाव केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह युवाओं की मानसिकता, सामाजिक व्यवहार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित करने लगा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती सक्रियता ने गेमिंग को हर आयु वर्ग के लोगों तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि समाज को इस विषय को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है क्योंकि गेमिंग अब केवल समय बिताने का माध्यम नहीं बल्कि डिजिटल संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है। यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के सोचने और सीखने के तरीके को भी प्रभावित कर रहा है।
डॉ. शानू मसीह का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग उद्योग की आर्थिक ताकत को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। वैश्विक स्तर पर यह क्षेत्र अरबों डॉलर के कारोबार में बदल चुका है और बड़ी तकनीकी कंपनियां इसमें लगातार निवेश कर रही हैं। उनके अनुसार गेमिंग उद्योग मनोरंजन और व्यापार का संयुक्त रूप बन चुका है, जिसने रोजगार और करियर के नए अवसर तैयार किए हैं। डॉ. शानू मसीह बताती हैं कि ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई खिलाड़ी इसे पेशेवर करियर के रूप में अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह पारंपरिक खेल युवाओं को पहचान दिलाते हैं, उसी तरह डिजिटल गेमिंग भी नई पीढ़ी के लिए अवसरों का द्वार खोल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि करियर के रूप में गेमिंग को अपनाने के लिए अनुशासन और संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
प्रतिस्पर्धात्मक गेमिंग के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि आधुनिक गेमिंग प्लेटफॉर्म ने दुनिया भर के खिलाड़ियों को एक साथ जोड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित डिजिटल टूर्नामेंट्स में लाखों दर्शक भाग लेते हैं, जिससे गेमिंग मनोरंजन के साथ-साथ डिजिटल प्रसारण का भी बड़ा माध्यम बन चुकी है। उनके अनुसार इस क्षेत्र ने युवाओं को प्रसिद्धि और आर्थिक लाभ दोनों प्रदान किए हैं। डॉ. शानू मसीह का कहना है कि गेमिंग स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट निर्माण जैसे नए व्यवसाय भी तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए खिलाड़ियों को लंबे समय तक अभ्यास और मानसिक संतुलन बनाए रखना पड़ता है, जो कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव पर डॉ. शानू मसीह ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि आधुनिक गेम्स में इन-ऐप खरीदारी और वर्चुअल करेंसी जैसी सुविधाएं बच्चों और किशोरों को आकर्षित करती हैं। कई मामलों में बच्चे बिना समझ के वास्तविक धन खर्च करने लगते हैं, जिससे परिवारों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। डॉ. शानू मसीह के अनुसार डिजिटल भुगतान की सरलता इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उन्होंने कहा कि गेम डेवलपर्स द्वारा तैयार किए गए रिवॉर्ड सिस्टम खिलाड़ियों को बार-बार खरीदारी करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि बच्चों को वित्तीय अनुशासन और डिजिटल जागरूकता सिखाना अत्यंत आवश्यक हो गया है ताकि वे अनावश्यक खर्च से बच सकें।
मानसिक स्वास्थ्य पर ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव को लेकर डॉ. शानू मसीह ने विशेष चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार अत्यधिक गेम खेलने की आदत कई बार लत का रूप ले लेती है, जिससे बच्चों के व्यवहार में बदलाव दिखाई देता है। लगातार गेम खेलने से चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ. शानू मसीह बताते हैं कि कई शोधों में यह सामने आया है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि गेमिंग में मिलने वाले त्वरित पुरस्कार बच्चों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से दूर कर सकते हैं। उनका मानना है कि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
शैक्षिक प्रभावों पर विचार व्यक्त करते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि अत्यधिक गेमिंग बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर डाल सकती है। देर रात तक गेम खेलने से बच्चों की दिनचर्या प्रभावित होती है और उनकी एकाग्रता कमजोर हो जाती है। उन्होंने बताया कि कई विद्यार्थी पढ़ाई से अधिक समय गेमिंग में बिताने लगते हैं, जिससे उनका शैक्षिक प्रदर्शन प्रभावित होता है। डॉ. शानू मसीह का मानना है कि बच्चों को समय प्रबंधन सिखाना बेहद आवश्यक है ताकि वे पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रख सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सीमित और नियंत्रित गेमिंग बच्चों की समस्या समाधान क्षमता को विकसित करने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसके लिए उचित मार्गदर्शन जरूरी है।
सामाजिक व्यवहार पर ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव को लेकर डॉ. शानू मसीह ने बताया कि कई बच्चे वर्चुअल दुनिया में अधिक समय बिताने लगते हैं, जिससे वास्तविक जीवन के संबंध कमजोर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार और मित्रों से दूरी बनाना बच्चों के भावनात्मक विकास को प्रभावित कर सकता है। डॉ. शानू मसीह का मानना है कि संवाद क्षमता और सामाजिक कौशल को मजबूत बनाए रखने के लिए बच्चों को सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बच्चे वास्तविक समस्याओं से बचने के लिए गेमिंग का सहारा लेने लगते हैं तो यह स्थिति उनके मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
साइबर सुरक्षा के विषय पर डॉ. शानू मसीह ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर चैटिंग और मल्टीप्लेयर सुविधाओं के कारण बच्चों का संपर्क अजनबियों से हो सकता है। इससे डेटा चोरी और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में ऑनलाइन शोषण की घटनाएं भी सामने आई हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। डॉ. शानू मसीह ने सुझाव दिया कि बच्चों को डिजिटल सुरक्षा के नियमों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की।
सांस्कृतिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि कई गेम्स में हिंसात्मक विषयवस्तु शामिल होती है, जिसका बच्चों के व्यवहार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि लगातार आक्रामक दृश्य देखने से बच्चों की संवेदनशीलता कम हो सकती है। डॉ. शानू मसीह का कहना है कि परिवारों को बच्चों द्वारा खेले जाने वाले गेम्स की प्रकृति पर ध्यान देना चाहिए ताकि उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि संतुलित और सकारात्मक सामग्री वाले गेम्स का चयन बच्चों के विकास में सहायक हो सकता है।
तकनीकी प्रगति के संदर्भ में डॉ. शानू मसीह ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों ने गेमिंग को और अधिक आकर्षक बना दिया है। उनके अनुसार भविष्य में गेमिंग शिक्षा और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां वर्चुअल सिमुलेशन तकनीक का उपयोग कर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर रही हैं। डॉ. शानू मसीह का मानना है कि यह तकनीक विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है और सीखने के नए तरीके विकसित कर सकती है। सकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि सीमित समय तक गेम खेलने से बच्चों की रणनीतिक सोच और टीमवर्क क्षमता विकसित हो सकती है। उन्होंने बताया कि कई गेम्स निर्णय लेने और समस्या समाधान क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं। उनका मानना है कि यदि गेमिंग को सही दिशा और समय सीमा के साथ अपनाया जाए तो यह बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में योगदान दे सकती है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
सरकारी और सामाजिक प्रयासों पर टिप्पणी करते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि कई देशों में गेमिंग समय सीमा और आयु नियंत्रण जैसे नियम लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान और डिजिटल शिक्षा के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को गेमिंग के प्रभावों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। उनका मानना है कि समाज को गेमिंग को पूरी तरह नकारने की बजाय जिम्मेदारी के साथ अपनाना चाहिए ताकि इसके सकारात्मक लाभ प्राप्त किए जा सकें। समग्र रूप से ऑनलाइन गेमिंग के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए डॉ. शानू मसीह ने कहा कि यह आधुनिक डिजिटल युग का अत्यंत प्रभावशाली क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि इसे केवल बच्चों का खेल समझना गलत होगा क्योंकि यह आर्थिक, सामाजिक और मानसिक स्तर पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। डॉ. शानू मसीह का मानना है कि संतुलन, जागरूकता और निगरानी के साथ गेमिंग को अपनाया जाए तो यह मनोरंजन और विकास दोनों का माध्यम बन सकती है। उन्होंने समाज से अपील की कि डिजिटल जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है।





