नई दिल्ली। एक अहम प्रशासनिक पहल ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई बहस और चर्चा को जन्म दे दिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को गृह विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय गीत के प्रस्तुतीकरण के लिए व्यापक और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए इसे सरकारी कार्यक्रमों में अधिक औपचारिक रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब देशभर में होने वाले सभी सरकारी आयोजनों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरे गाना अथवा बजाना आवश्यक कर दिया गया है। लंबे समय से इस गीत के गायन को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं थी, जबकि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए पहले से निर्धारित प्रोटोकॉल लागू थे। सरकार का मानना है कि इस नए निर्णय से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को संस्थागत स्वरूप मिलेगा और सरकारी आयोजनों में एकरूपता सुनिश्चित होगी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी दस पृष्ठों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि छह छंदों वाला पूर्ण संस्करण, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, अब कई महत्वपूर्ण आधिकारिक अवसरों पर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इस पहल को राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करने और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक प्रतीक को नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार द्वारा जारी यह निर्देश केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं रखा गया है बल्कि इसे सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों तथा संवैधानिक संस्थाओं तक लागू करने के लिए भेजा गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्यपालों अथवा उपराज्यपालों के आगमन और उनके भाषणों से पहले और बाद में ‘वंदे मातरम्’ के प्रस्तुतीकरण का पालन निर्धारित समयानुसार किया जाएगा। इस फैसले के पीछे केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक अवसर भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब किसी भी सरकारी समारोह में इस गीत के छह छंदों का गायन अथवा वादन आवश्यक रहेगा। मंत्रालय का तर्क है कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह राष्ट्रीय गीत को भी व्यवस्थित सम्मान मिलना चाहिए और इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण निर्णय बताया जा रहा है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि इस पहल से सरकारी आयोजनों के दौरान राष्ट्रीय मूल्यों की प्रस्तुति अधिक व्यवस्थित और गरिमामयी होगी।
गृह मंत्रालय ने यह भी निर्धारित किया है कि जब किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो सबसे पहले राष्ट्रीय गीत का वादन या गायन किया जाएगा। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों के लिए सावधान मुद्रा में खड़े रहना अनिवार्य होगा, जिससे राष्ट्रीय सम्मान की परंपरा का पालन सुनिश्चित हो सके। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी समाचार फिल्म या वृत्तचित्र में राष्ट्रीय गीत कथानक का हिस्सा बनकर प्रस्तुत होता है, तो दर्शकों के लिए खड़े होना आवश्यक नहीं माना जाएगा क्योंकि इससे प्रस्तुति की निरंतरता बाधित हो सकती है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का संतुलित दृष्टिकोण दर्शाता है कि सरकार सम्मान और व्यवहारिकता दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। आदेश में कार्यक्रमों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है ताकि विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुति के स्वरूप को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जा सके। इस वर्गीकरण से आयोजकों और सरकारी संस्थानों को नियमों का पालन करने में सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहली श्रेणी उन अवसरों की है जहां राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति पूरी तरह अनिवार्य रहेगी। इसमें नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान से जुड़े औपचारिक राज्य समारोह, राष्ट्रपति के आकाशवाणी और दूरदर्शन संबोधन से ठीक पहले और बाद के कार्यक्रम, राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन और प्रस्थान पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह, राष्ट्रीय ध्वज परेड तथा भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से निर्देशित अन्य अवसर शामिल किए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि बैंड द्वारा वादन के दौरान पहले ढोल की विशेष थाप दी जाएगी, जो मार्चिंग ड्रिल के अनुसार सात कदमों की होगी। इस प्रक्रिया में ढोल की आवाज धीरे-धीरे शुरू होकर उच्चतम स्तर तक पहुंचेगी और फिर क्रमशः कम होती जाएगी। मंत्रालय का कहना है कि इस प्रकार की प्रस्तुति राष्ट्रीय गीत की गरिमा और औपचारिकता को और प्रभावशाली बनाएगी। सुरक्षा एजेंसियों और प्रोटोकॉल अधिकारियों को भी इन निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है ताकि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी न हो सके।
दूसरी श्रेणी उन आयोजनों की है जहां सामूहिक गायन को अनिवार्य बनाया गया है। राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों तथा औपचारिक समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक रूप से गायन आवश्यक रहेगा। मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि इसके लिए प्रशिक्षित गायक दल या क्वायर की व्यवस्था की जा सकती है ताकि गीत का प्रस्तुतीकरण सुर, लय और शुद्ध उच्चारण के साथ हो सके। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर बेहतर ध्वनि विस्तार प्रणाली उपलब्ध कराने की भी अनिवार्यता बताई गई है ताकि उपस्थित सभी लोग स्पष्ट रूप से गीत सुन सकें। आवश्यकता पड़ने पर गीत के बोल मुद्रित रूप में वितरित करने की अनुमति भी दी गई है, जिससे प्रतिभागियों को सामूहिक गायन में सुविधा मिल सके। सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक प्रस्तुति से राष्ट्रीय भावना का विस्तार अधिक प्रभावी ढंग से होता है और इससे लोगों के बीच भावनात्मक एकता का वातावरण मजबूत बनता है। मंत्रालय ने आयोजकों को निर्देश दिया है कि प्रस्तुति के दौरान अनुशासन और सम्मान के सभी मानकों का पालन किया जाए।
तीसरी श्रेणी में ऐसे अवसर शामिल किए गए हैं जहां राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति को वैकल्पिक रखा गया है, लेकिन इसे प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालयों में दिन की शुरुआत सामूहिक गायन से करने की सलाह दी गई है ताकि छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता विकसित की जा सके। स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें और विद्यार्थियों को गीत के ऐतिहासिक महत्व से भी परिचित कराएं। इसके अलावा ऐसे गैर-औपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण कार्यक्रम, जिनमें मंत्रियों अथवा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति होती है, वहां भी सामूहिक गायन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक पहचान की भावना मजबूत होगी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तुति का उद्देश्य किसी प्रकार की बाध्यता नहीं बल्कि सम्मानजनक सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।
गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में यह विशेष रूप से रेखांकित किया है कि ‘वंदे मातरम्’ का गायन मातृभूमि के प्रति सम्मान, गरिमा और शिष्टाचार के साथ किया जाना चाहिए। मंत्रालय का कहना है कि जहां गीत का सम्मानपूर्वक प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, वहां किसी प्रकार की आपत्ति नहीं मानी जाएगी। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों के लिए प्रेरणा और उत्साह का प्रमुख स्रोत रहा है। इतिहासकारों का कहना है कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में अदम्य साहस और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया था। वर्तमान समय में इसे राष्ट्रगान के समान गरिमा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि इन दिशा-निर्देशों के लागू होने से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना अधिक व्यापक रूप से विकसित होगी और समाज में एकरूप जागरूकता का वातावरण बनेगा।
राष्ट्रीय गीत के छह छंदों को इस निर्णय में विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिनमें भारत माता की प्रकृति, शक्ति, समृद्धि और सांस्कृतिक वैभव का वर्णन किया गया है। पहले छंद में मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और समृद्धि का भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत किया गया है। दूसरे छंद में राष्ट्र की सामूहिक शक्ति और जनता की एकता को दर्शाया गया है, जबकि तीसरे छंद में मातृभूमि को ज्ञान, धर्म और जीवन शक्ति के प्रतीक के रूप में वर्णित किया गया है। चौथे छंद में राष्ट्र को देवी स्वरूप शक्ति और विद्या की अधिष्ठात्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है, वहीं पांचवें छंद में मातृभूमि की सरलता, सौंदर्य और संरक्षक स्वरूप का उल्लेख मिलता है। छठे और अंतिम छंद में राष्ट्र को सर्वोच्च शक्ति का रूप बताते हुए मातृभूमि के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त की गई है। सांस्कृतिक विद्वानों का मानना है कि इन सभी छंदों का समावेश राष्ट्रीय चेतना की समग्र अभिव्यक्ति को दर्शाता है।
सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों से सरकारी आयोजनों में राष्ट्रीय प्रतीकों की प्रस्तुति अधिक व्यवस्थित और प्रभावशाली बनेगी। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है। गृह मंत्रालय ने सभी संबंधित संस्थानों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और उम्मीद जताई है कि यह निर्णय देशभर में राष्ट्रीय सम्मान की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।





