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स्वच्छता की महाक्रांति लेकर आया देश का पहला जादुई गली यान और ई ट्रॉली कार्ट

महापौर दीपक बाली के जुनून से संकरी गलियों में बिना मुड़े दौड़ने वाले आधुनिक वाहनों ने रचा इतिहास, नैनी पेपर्स के सहयोग से अब चमकेगा काशीपुर का हर घर और कोना।

उत्तराखंड की पावन धरती पर स्थित काशीपुर नगर आज एक ऐसे ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय का साक्षी बना है, जिसने समूचे देश के सामने स्वच्छता और आधुनिकता का एक बेमिसाल उदाहरण पेश कर दिया है। युवा सोच के साथ-साथ काशीपुर के कर्मठ महापौर दीपक बाली की अटूट जिजीविषा ने मिलकर शहर की सूरत बदलने का जो बीड़ा उठाया था, वह आज धरातल पर एक महाक्रांति के रूप में नजर आ रहा है। काशीपुर नगर निगम ने देश का पहला ऐसा नगर निकाय होने का गौरव प्राप्त कर लिया है, जहाँ अब शहर की सबसे संकरी और दुर्गम गलियों से भी कचरा उठाना मुमकिन होगा। यह उपलब्धि केवल गाड़ियों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संकल्प की विजय है जो काशीपुर को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए लिया गया था। नगर निगम और नैनी पेपर्स लिमिटेड के बीच का यह अनूठा सामंजस्य आज हर जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इस परियोजना के जरिए विकास की एक ऐसी नई इबारत लिख दी गई है, जिसकी गूँज आने वाले समय में पूरे प्रदेश और देश में एक नजीर के तौर पर सुनी जाएगी।

नगर की इस स्वच्छता क्रांति का सबसे बड़ा नायक ‘गली यान’ नाम का वह जादुई वाहन है, जिसने इंजीनियरिंग और प्रशासनिक दूरदर्शिता की नई परिभाषा गढ़ी है। इस वाहन की सबसे रोमांचक और गजब की बात यह है कि इसे संकरी गलियों में ले जाने के बाद वापस लाने के लिए मोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी। महापौर दीपक बाली ने खुद तीन महीने तक दिन-रात विशेषज्ञों के साथ माथापच्ची की और अपनी देखरेख में इस वाहन का निर्माण करवाया है। इस गाड़ी की ड्राइविंग सीट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह खुद ही घूम जाती है, जिससे चालक बिना रिवर्स किए या गाड़ी मोड़े ही विपरीत दिशा में प्रस्थान कर सकता है। ऐसी आधुनिक और विस्मयकारी सोच भारत के किसी भी अन्य नगर निकाय में आज तक नहीं देखी गई। ई-ट्रॉली कार्ट नाम के इस वाहन ने काशीपुर नगर निगम को एक ऐसी अजेय शक्ति प्रदान कर दी है, जिससे अब शहर का कोना-कोना चमक उठेगा और स्वच्छता के मामले में काशीपुर एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर हो चुका है।

काशीपुर के इस कायाकल्प में औद्योगिक जगत का सहयोग भी किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है। नैनी पेपर्स लिमिटेड ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) को समझते हुए करीब 50 लाख रुपये की भारी-भरकम सहायता राशि नगर निगम को उपलब्ध कराई है। इस उदारता और शहर के प्रति प्रेम के चलते ही आज नगर निगम को 10 अत्याधुनिक ई-रिक्शा टिपर और 19 विशिष्ट ई-ट्रॉली कार्ट्स की शानदार सौगात मिल पाई है। इन ई-रिक्शा टिपर्स की खूबी यह है कि इनमें गीला, सूखा, सेनेटरी और प्लास्टिक कचरा डालने के लिए चार अलग-अलग खंड बनाए गए हैं, जो कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीके को दर्शाते हैं। इस महान कार्य के लिए महापौर दीपक बाली, नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट और सभी पार्षदों ने नैनी पेपर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पवन अग्रवाल और उनके पूरे परिवार का शहर की जनता की ओर से हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह जुगलबंदी इस बात का प्रमाण है कि जब उद्योग और प्रशासन एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो विकास की गति को कोई नहीं रोक सकता।

तथ्यों और जमीनी हालातों का यदि बारीकी से मुआयना किया जाए, तो यह स्पष्ट झलकता है कि दीपक बाली का राजनीति में आना किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने पिछड़ते शहर की तस्वीर बदलने के एक जुनूनी सपने के साथ हुआ है। महज एक साल और दो महीने के अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने विकास के जो बड़े मील के पत्थर स्थापित किए हैं, वे उनकी कार्यक्षमता और शहर के प्रति उनकी निष्ठा को सिद्ध करते हैं। काशीपुर को एक हाई-टेक और आधुनिक शहर बनाने की उनकी ललक का ही परिणाम है कि आज जनता के चेहरे पर मुस्कान है। महापौर इस पूरी सफलता का श्रेय प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को देते हैं, जिनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुविधा पहुँचाना है। आज काशीपुर की बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के विस्तार के बीच जो कूड़ा प्रबंधन की चुनौती खड़ी थी, उसे इन ई-वाहनों के जरिए जड़ से खत्म करने का पुख्ता इंतजाम कर दिया गया है।

नगर निगम में आयोजित लोकार्पण समारोह का दृश्य किसी बड़े उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था, जहाँ खुशी और उत्साह की लहर हर चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी। इस मौके पर महापौर ने एक बेहद भावुक और प्रेरक बात कही कि “पूरा काशीपुर मेरा बेडरूम है” और वह इसे साफ-सुथरा रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि जिस दिन कूड़ा फैलाने वालों को रोकने वाले जागरूक नागरिकों की संख्या बढ़ जाएगी, उसी दिन स्वच्छता का सपना शत-प्रतिशत साकार हो जाएगा। महापौर ने इस अवसर पर नैनी पेपर्स को नगर निगम का ‘स्वच्छता एम्बेसडर’ बनाने की इच्छा भी जताई और भविष्य में भी इसी प्रकार के सहयोग की अपील की। कार्यक्रम के दौरान एक क्रांतिकारी क्षण तब आया जब महापौर ने जनता से पूछा कि क्या ऐतिहासिक द्रोणा सागर और चैती मेला परिसर का प्रबंधन नगर निगम को अपने हाथ में ले लेना चाहिए? इस पर वहां मौजूद हर व्यक्ति ने हाथ उठाकर अपनी जोरदार सहमति दी, जो महापौर के नेतृत्व में जनता के अटूट भरोसे को दर्शाता है।

इस भव्य कार्यक्रम में मौजूद नैनी पेपर्स लिमिटेड के एमडी पवन अग्रवाल ने भी महापौर के व्यक्तित्व की जमकर तारीफ की और उन्हें एक ऐसा ‘कर्मयोगी’ करार दिया जिसके भीतर कुछ बड़ा कर गुजरने का अद्भुत जज्बा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नैनी पेपर्स हमेशा नगर निगम के साथ खड़ा रहेगा, क्योंकि उनका मानना है कि नेक सोच और काम करने की नीयत हो तो धन की कभी कमी नहीं होती। श्री अग्रवाल ने बड़ी बेबाकी से कहा कि दीपक बाली जैसे व्यक्ति के आह्वान पर केवल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बाहर से भी सहायता की कतार लग जाएगी क्योंकि वे काम करना और कराना बखूबी जानते हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अमरजीत सिंह साहनी, नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट, सहायक नगर आयुक्त विनोद कुमार और सुश्री शालिनी नेगी सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस नई शुरुआत को काशीपुर के भविष्य के लिए एक वरदान बताया। आज का दिन काशीपुर के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छता और समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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