काशीपुर। सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियानों की कड़ी में काशीपुर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गोविंद बल्लभ पंत इंटर कॉलेज काशीपुर में विद्यार्थियों को यातायात नियमों और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक जानकारियाँ प्रदान कीं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों में कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करना था, ताकि वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहें बल्कि अपने परिवार और समाज को भी यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित कर सकें। पुलिस अधिकारियों ने सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को बताया कि सड़क पर छोटी-छोटी सावधानियाँ कैसे बड़े हादसों को रोक सकती हैं। हेलमेट, सीट बेल्ट, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, ट्रैफिक सिग्नल और पैदल चलने के सही तरीकों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे छात्र इन नियमों को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में युवा और बच्चे प्रभावित होते हैं, जिसका मुख्य कारण नियमों की अनदेखी और जागरूकता की कमी है। विद्यार्थियों को बताया गया कि तेज़ गति, मोबाइल फोन का उपयोग, गलत दिशा में वाहन चलाना और यातायात संकेतों की अवहेलना जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को यह भी समझाया कि वे अपने माता-पिता और परिचितों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि परिवार से शुरू हुई जागरूकता पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। छात्रों ने भी इस दौरान उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और सड़क सुरक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक प्रभावी बन गया।

इसके साथ ही महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान “पुलिस आपके द्वार” के अंतर्गत विद्यार्थियों को कई अहम विषयों पर जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने गुड टच और बैड टच की अवधारणा को बेहद संवेदनशील और सहज तरीके से समझाया, ताकि बच्चे किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार को पहचान सकें और समय रहते मदद मांग सकें। उन्हें यह भी बताया गया कि किसी भी असहज स्थिति में चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति या पुलिस से संपर्क करना कितना जरूरी है। इस सत्र का उद्देश्य बच्चों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करना था, ताकि वे अपनी सुरक्षा को लेकर सजग और निर्भीक बन सकें।
कार्यक्रम में साइबर अपराध से संबंधित विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल जितना जरूरी है, उतना ही सतर्क रहना भी आवश्यक है। फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया पर अजनबियों से बातचीत, ओटीपी साझा करने के खतरे और निजी जानकारी की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बच्चों को जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों या पुलिस को दें। इस सत्र ने विद्यार्थियों को यह अहसास कराया कि साइबर सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शारीरिक सुरक्षा।
नशा मुक्ति को लेकर भी पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से खुलकर संवाद किया। अधिकारियों ने बताया कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसके भविष्य, परिवार और समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है। छात्रों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया और यह संदेश दिया गया कि नशे से दूर रहकर ही वे अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। पुलिस ने बच्चों को यह भी प्रेरित किया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में हो, तो वे उसे सही राह दिखाने में मदद करें या इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

कार्यक्रम के दौरान डायल 112 की उपयोगिता पर भी विशेष जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में 112 नंबर पर कॉल करके तुरंत पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है। पुलिस ने यह भी समझाया कि इस सेवा का दुरुपयोग न करें और केवल वास्तविक जरूरत के समय ही इसका उपयोग करें। इसके साथ ही उत्तराखंड पुलिस एप और गौरा शक्ति एप के बारे में भी विस्तार से बताया गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि ये एप्स कैसे महिलाओं, बालिकाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा में सहायक हैं और संकट की घड़ी में किस तरह त्वरित मदद उपलब्ध कराते हैं।
इस जागरूकता कार्यक्रम में थाना पुलिस की एक सशक्त टीम मौजूद रही, जिसने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न कराया। टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक नवीन बुधानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें पुलिस की जिम्मेदारियों और समाज में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। चौकी इंचार्ज कटोराताल कौशल भाकुनी ने यातायात नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला और बच्चों को व्यवहारिक सुझाव दिए। महिला उपनिरीक्षक बीना पपोला ने बालिकाओं से विशेष रूप से संवाद कर उन्हें आत्मरक्षा और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूक किया।
कार्यक्रम में महिला कांस्टेबल इंदु और वंदना ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। उन्होंने बच्चों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किसी भी परेशानी में घबराने के बजाय सही जानकारी और सही कदम कैसे मददगार साबित हो सकते हैं। कांस्टेबल प्रेम कनवाल ने नशा मुक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए, जिससे विद्यार्थियों को सकारात्मक संदेश मिला। पूरी टीम ने मिलकर बच्चों के साथ संवाद स्थापित किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि पुलिस हमेशा उनकी मदद के लिए तत्पर है।

इस आयोजन का असर विद्यार्थियों पर साफ दिखाई दिया। बच्चों ने न केवल ध्यानपूर्वक सभी जानकारियाँ सुनीं, बल्कि कई ने यह भी कहा कि वे अब अपने दैनिक जीवन में इन बातों का पालन करेंगे और दूसरों को भी जागरूक करेंगे। स्कूल प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। पुलिस और विद्यालय के बीच इस तरह के समन्वय से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, गोविंद बल्लभ पंत इंटर कॉलेज काशीपुर में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम सड़क सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराध, नशा मुक्ति और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी देने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ। काशीपुर पुलिस की इस पहल ने यह संदेश दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज को जागरूक करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे प्रयास न केवल बच्चों को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि एक जिम्मेदार और सजग नागरिक तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।





