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संस्कृत विश्वविद्यालय में विकास को रफ्तार सचिव दीपक कुमार के सख्त निर्देशों से कार्य तेज

महिला छात्रावास से लेकर परीक्षा भवन और आवासीय परियोजनाओं तक समयबद्ध निर्माण पर जोर निरीक्षण में सचिव ने छात्रहित गुणवत्ता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए

हरिद्वार। गुरुवार का दिन उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा के भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सक्रियता का साक्षी बना, जब संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार स्वयं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। उनके आगमन को विश्वविद्यालय के लिए एक गंभीर समीक्षा और जवाबदेही के संकेत के रूप में देखा गया। सचिव ने परिसर में चल रहे विकास कार्यों, आधारभूत संरचनाओं और निर्माणाधीन परियोजनाओं का गहन निरीक्षण करते हुए यह स्पष्ट किया कि संस्कृत शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे आधुनिक सुविधाओं और सुव्यवस्थित संसाधनों के साथ आगे बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों से निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, व्यय और निर्धारित समयसीमा के बारे में विस्तार से जानकारी ली और हर पहलू को बारीकी से परखा।

निरीक्षण के क्रम में सचिव दीपक कुमार ने विशेष रूप से निर्माणाधीन महिला छात्रावास पर अपना ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने छात्राओं की आवासीय सुविधा को विश्वविद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए संबंधित अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि यह छात्रावास हर हाल में मार्च माह तक पूर्ण होना चाहिए। सचिव ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से छात्राओं को परिसर के भीतर ही सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक आवास मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी असुविधा के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि विद्यार्थियों की मूलभूत आवश्यकताएं किसी भी शैक्षणिक संस्थान की आत्मा होती हैं।

इसके बाद सचिव ने विश्वविद्यालय परिसर में बन रहे परीक्षा भवन का भी निरीक्षण किया और उसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली किसी भी विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता और अकादमिक अनुशासन का आधार होती है। यदि परीक्षा भवन आधुनिक, सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से तैयार होता है, तो इससे न केवल परीक्षाओं का संचालन सुचारु होगा, बल्कि छात्रों में भी संस्थान के प्रति विश्वास बढ़ेगा। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और तय मानकों के अनुसार ही सभी कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत जैसे प्राचीन विषय की पढ़ाई आधुनिक व्यवस्था के साथ होनी चाहिए, तभी यह नई पीढ़ी को आकर्षित कर सकेगी।

विश्वविद्यालय के आवासीय ढांचे की समीक्षा करते हुए सचिव दीपक कुमार ने शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे निर्माणाधीन आवासों की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षक और कर्मचारी उसकी रीढ़ होते हैं, और यदि उन्हें उचित आवासीय सुविधाएं मिलती हैं, तो उनका कार्य निष्पादन भी बेहतर होता है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि आवासीय परियोजनाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित की जाएं। सचिव का मानना था कि बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध होने से विश्वविद्यालय का समग्र शैक्षणिक स्तर स्वतः ऊंचा उठता है।

निरीक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति रमाकांत पांडेय ने सचिव को विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों और भावी विकास योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय संस्कृत शिक्षा को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालकर आधुनिक संदर्भों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आधारभूत संरचना के सुदृढ़ होने से विश्वविद्यालय न केवल छात्रों के लिए बल्कि शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए भी एक आकर्षक केंद्र के रूप में उभरेगा। सचिव ने कुलपति की बातों को गंभीरता से सुना और विश्वविद्यालय के विजन की सराहना की।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव मनोज किशोर पंत, प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों और शिक्षकों ने सचिव के समक्ष अपनी-अपनी इकाइयों से जुड़े कार्यों की स्थिति साझा की और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी चर्चा की। यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संवाद का अवसर भी बना, जिसमें प्रशासन और शिक्षण समुदाय के बीच समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

समग्र रूप से देखा जाए तो संस्कृत शिक्षा सचिव का यह दौरा विश्वविद्यालय के लिए दिशा तय करने वाला साबित हुआ। एक ओर जहां समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा करने का सख्त संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर गुणवत्ता, छात्रहित और शैक्षणिक उत्कृष्टता पर विशेष जोर रखा गया। यह स्पष्ट संकेत मिला कि राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा को केवल विरासत के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता के रूप में देख रही है। यदि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया, तो उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और सुविधाओं के क्षेत्र में एक सशक्त और आधुनिक पहचान स्थापित कर सकता है।

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