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संदीप सहगल की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खुली चुनौती, रामनगर रोड की बदहाली देख क्या पिघलेगा सीएम का दिल?

सत्ता के सिंहासन और जनता के दर्द का सीधा टकराव: संदीप सहगल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दी 'रामनगर रोड' की अग्निपरीक्षा, क्या अपनी आँखों से बदहाली देख पिघलेगा 'धुरंधर धामी' का दिल?

काशीपुर। नगर कि ऐतिहासिक और सियासती फिजाओं में उस वक्त एक जबरदस्त भूचाल आ गया, जब नगर के कद्दावर नेता, कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष और पूर्व मेयर प्रत्याशी संदीप सहगल ने प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के आगमन से ठीक पहले एक ऐसा दांव खेला, जिसने न केवल सत्ता पक्ष के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है। संदीप सहगल ने किसी बंद कमरे की कूटनीति के बजाय सीधे सोशल मीडिया के खुले और सार्वजनिक मंच का सहारा लेते हुए मुख्यमंत्री के सामने एक ऐसी चुनौती और अपील पेश कर दी है, जिसे नजरअंदाज करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने अपनी पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बेहद आत्मीय लेकिन तार्किक अनुरोध किया है कि जब वे अपनी पूरी लाव-लश्कर के साथ आस्था के प्रतीक मां बाल सुंदरी देवी चैती मेले के भव्य आयोजन में शिरकत करने के लिए काशीपुर की पावन धरा पर कदम रखें, तो वे अपने पूर्वनिर्धारित और चकाचक प्रोटोकॉल वाले सुगम रास्तों को त्यागकर एक बार ‘रामनगर रोड’ के जरिए मेले तक पहुँचने का साहस दिखाएं। संदीप सहगल का यह आह्वान केवल एक साधारण मार्ग परिवर्तन का सुझाव मात्र नहीं है, बल्कि यह उन हजारों-लाखों स्थानीय नागरिकों की उस बेपनाह पीड़ा और रोजमर्रा के संघर्ष को सीधे सूबे के मुख्यमंत्री की नजरों में लाने की एक गहरी और सोची-समझी राजनीतिक एवं सामाजिक कोशिश है, जो लंबे समय से इस मार्ग की जर्जर हालत, जानलेवा गड्ढों और धूल के गुबार का दंश झेल रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों और आम चौराहों पर संदीप सहगल की इस अपील को एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर उन कड़वी जमीनी हकीकतों से रूबरू होने का निमंत्रण दिया है, जिन्हें अक्सर किसी भी बड़े वीआईपी मूवमेंट के दौरान प्रशासन द्वारा रातों-रात पैचवर्क करके या वैकल्पिक रास्तों से मोड़कर मुख्यमंत्री की नजरों से छिपा लिया जाता है। संदीप सहगल ने बहुत ही बेबाकी और निडरता से यह संदेश देने की कोशिश की है कि अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचमुच खुद को एक जनसेवक मानते हैं और ‘विकल्प रहित संकल्प’ वाली सरकार चलाने का दावा करते हैं, तो उन्हें रामनगर रोड की उस नारकीय स्थिति, बेतरतीब ट्रैफिक और उड़ती धूल के बीच से होकर गुजरना चाहिए, ताकि उन्हें पल-प्रतिपल अहसास हो सके कि एक आम काशीपुर निवासी अपने परिवार के साथ घर से निकलते वक्त किस तरह की मानसिक यंत्रणा और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करता है। इस अपील ने देखते ही देखते डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी जबरदस्त सुर्खियां बटोरी हैं और काशीपुर की पीड़ित जनता अब इसे अपनी सामूहिक आवाज मानकर संदीप सहगल के इस साहसी कदम के साथ मजबूती से खड़ी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री का काशीपुर आगमन जहाँ एक ओर मां बाल सुंदरी देवी के चरणों में शीश नवाने से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर यह विकास कार्यों की घोषणाओं का भी मंच होता है, ऐसे में एक प्रमुख विपक्षी चेहरे द्वारा मार्ग चयन को लेकर दी गई यह ‘सॉफ्ट चुनौती’ अब जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी गले की फांस बन चुकी है।

काशीपुर के गौरव, सांस्कृतिक विरासत और अटूट आस्था के सबसे बड़े केंद्र चैती मेले की महत्ता को रेखांकित करते हुए संदीप सहगल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि मां बाल सुंदरी देवी का यह पावन दरबार केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों भक्तों की उम्मीदों का केंद्र है, जहाँ पहुँचने वाला हर श्रद्धालु एक सुगम, सुरक्षित और सम्मानजनक मार्ग की आकांक्षा रखता है। संदीप सहगल का मानना है कि रामनगर रोड की वर्तमान और दयनीय स्थिति किसी भी जिम्मेदार नागरिक से छिपी नहीं है, लेकिन शासन के शीर्ष पायदान पर बैठे अधिकारियों और चापलूस तंत्र द्वारा शायद मुख्यमंत्री के डेस्क तक इस मार्ग की वह डरावनी और वास्तविक तस्वीरें नहीं पहुँचने दी जातीं जो सचमुच जनता का गला घोंट रही हैं। इसीलिए, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से व्यक्तिगत और भावनात्मक स्तर पर यह गुहार लगाई है कि वे स्वयं इस पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्ते का चुनाव करें ताकि किसी कागजी फाइल, झूठी रिपोर्ट या प्रेजेंटेशन के बजाय वे अपनी साक्षात आँखों से जनता के उस असली कष्ट को महसूस कर सकें जो बीते कई वर्षों से काशीपुर की नियति बन चुका है। संदीप सहगल के अनुसार, जब प्रदेश का सबसे ताकतवर और प्रभावशाली व्यक्तित्व उन गड्ढों भरे रास्तों से गुजरेगा और उनके काफिले की गाड़ियां हिचकोले खाएंगी, तभी शायद विकास की उन धूल फांकती फाइलों में बंद सड़कों की मरम्मत और निर्माण का काम धरातल पर बिजली की तेजी से दौड़ पाएगा। उनका यह तर्क अब सोशल मीडिया पर ‘ट्रेंड’ कर रहा है कि ‘एक सच्चे जननायक को वही रास्ता चुनना चाहिए जिस पर उसकी जनता लहूलुहान होकर चलने को मजबूर है’, ताकि नौकरशाही की लापरवाही और भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा पूरी तरह से बेनकाब हो सके।

इस पूरे प्रकरण ने काशीपुर की स्थानीय राजनीति में एक ऐसा नया और रोमांचक मोड़ ला दिया है, जहाँ अब सत्ता पक्ष के नेताओं से लेकर आम आदमी तक की नजरें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस गोपनीय रूट चार्ट पर टिक गई हैं जिसे प्रशासन अंतिम रूप दे रहा है। संदीप सहगल ने जिस परिपक्वता और जिम्मेदारी के साथ एक सजग नागरिक और प्रखर राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए इस जनहित के मुद्दे को सोशल मीडिया के जरिए हवा दी है, उससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि वे मुख्यमंत्री के इस दौरे को केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि काशीपुर की वर्षों पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान का एक सुनहरा अवसर बनाना चाहते हैं। पूर्व मेयर प्रत्याशी संदीप सहगल का यह चुनौतीपूर्ण कदम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस ‘युवा और संवेदनशील’ मुख्यमंत्री वाले चेहरे के लिए भी एक बड़ी अग्निपरीक्षा की तरह पेश किया जा रहा है, जिसकी चर्चा वे अपनी हर जनसभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़े गर्व के साथ करते हैं। संदीप सहगल ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि मां बाल सुंदरी देवी चैती मेला क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, पर्यटन और करोड़ों लोगों की भावनाओं से गहराई तक जुड़ा हुआ है, और अगर प्रदेश का मुखिया स्वयं इस सड़क के दर्द को अपनी हड्डियों में महसूस करता है, तो निश्चित तौर पर काशीपुर की उपेक्षित जनता को आने वाले भविष्य में एक बेहतर, आधुनिक और गड्ढा मुक्त बुनियादी ढांचा मिलने की अंतिम उम्मीद जाग सकती है।

अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि क्या मुख्यमंत्री का हाई-प्रोफाइल काफिला संदीप सहगल की इस भावनात्मक, तार्किक और जनता के दर्द से सराबोर अपील को स्वीकार कर रामनगर रोड की धूल फांकने का जोखिम उठाएगा, या फिर हमेशा की तरह वीआईपी प्रोटोकॉल की ऊँची दीवारें और चाटुकार अधिकारियों का घेरा एक बार फिर आम जनता की इन चीखों और समस्याओं को मुख्यमंत्री की नजरों तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देने पर मजबूर कर देगा? काशीपुर की जनता अब टकटकी लगाए बैठी है कि क्या पुष्कर सिंह धामी सचमुच जनता के मुख्यमंत्री साबित होंगे या यह दौरा भी महज फोटो खिंचवाने और खोखले आश्वासनों की भेंट चढ़ जाएगा।

संदीप सहगल ने इस एक पोस्ट से पूरे शहर में बहस छेड़ दी है कि आखिर कब तक जनता को इन खस्ताहाल सड़कों पर मरने के लिए छोड़ा जाएगा और कब सत्ता के गलियारों में बैठे लोग अपनी वातानुकूलित कारों से उतरकर धूल भरे रास्तों की हकीकत जानेंगे। इस समय काशीपुर का हर नुक्कड़ और हर चाय की दुकान बस इसी चर्चा से गर्म है कि संदीप सहगल की इस ‘गूगली’ पर मुख्यमंत्री धामी क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या चैती मेले के इस पावन पर्व पर मां बाल सुंदरी देवी के आशीर्वाद के साथ-साथ काशीपुर को इस सड़क के नर्क से मुक्ति मिलेगी या नहीं।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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