काशीपुर। संत शिरोमणि संत रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक एकता का वातावरण देखने को मिला। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, पूर्व से पश्चिम तक संत रविदास के विचारों, उनके संदेश और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग को याद करते हुए विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर नगर में भी इस पावन अवसर को विशेष गरिमा के साथ मनाया गया। बाजपुर रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित गोष्ठी ने न केवल संत रविदास के जीवन दर्शन को उजागर किया, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और भारतीय संस्कृति की मूल भावना को भी मजबूती से सामने रखा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे, जिससे आयोजन का स्वरूप एक विचारशील और प्रेरणादायक मंच में तब्दील हो गया।
आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में संत शिरोमणि संत रविदास की जयंती का आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर भी बन गया। काशीपुर स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर की गई। उपस्थित अतिथियों और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए संत रविदास के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। वातावरण में भक्ति और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। यह आयोजन इस बात का प्रतीक रहा कि संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने वे अपने समय में थे। सामाजिक समरसता और मानवता का संदेश देने वाले इस महान संत को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके योगदान को समाज के लिए अमूल्य बताया।
इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके आगमन पर भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। मंच से लेकर सभागार तक उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुकेश कुमार ने संत रविदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि संत रविदास का जीवन संघर्ष, भक्ति और सामाजिक चेतना का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि संत रविदास ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से समाज को समानता और मानव गरिमा का संदेश दिया, जो आज भी हर नागरिक के लिए मार्गदर्शक है।

मीडिया से बातचीत के दौरान मुकेश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा संत रविदास जयंती के उपलक्ष्य में किए जा रहे व्यापक आयोजनों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी से 07 फरवरी तक भाजपा द्वारा विभिन्न स्थानों पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनका उद्देश्य संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकारें संतों और महापुरुषों के सम्मान में निरंतर कार्य कर रही हैं। मुकेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास मंदिर का निर्माण कराया था, जो संत के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। इसके अलावा बनारस में भी संत रविदास मंदिर के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
प्रदेश स्तर पर हो रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुकेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सामी द्वारा हरिद्वार में एक भव्य और दिव्य स्मारक का निर्माण कराया जा रहा है। इस स्मारक में संत रविदास के साथ-साथ बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, महर्षि वाल्मीकि सहित अनेक संत-महात्माओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह स्मारक सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। मुकेश कुमार के अनुसार, इस प्रकार के प्रयास यह दर्शाते हैं कि सरकारें केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा काशीपुर जिले के अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष यशपाल राजहंस ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन और लेखन के माध्यम से देश को सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दिया। यशपाल राजहंस ने बताया कि संत रविदास का चिंतन केवल आध्यात्मिक नहीं था, बल्कि उसमें समाज सुधार की गहरी भावना निहित थी। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने जाति, भेदभाव और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और मानवता को सर्वोपरि माना। उनके अनुसार, संत रविदास के विचारों से समाज को एक नई दिशा मिली और अनेक लोगों को आत्मसम्मान और आत्मबल प्राप्त हुआ। इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा का अनुसूचित जाति मोर्चा गोष्ठियों और कार्यक्रमों के माध्यम से संत रविदास को याद कर रहा है।
इस आयोजन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि संत रविदास की शिक्षाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने संत रविदास के भजन और उनके विचारों पर आधारित चर्चा के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि समाज में आपसी भाईचारा और समानता बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आयोजन में यह भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी कि संत रविदास का संदेश किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए है। इसी कारण उनकी जयंती को उत्सव के रूप में मनाते हुए सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाया गया।

काशीपुर में आयोजित यह गोष्ठी केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक सम्मान का मंच बन गई। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने संत रविदास के जीवन से जुड़े प्रसंगों को साझा करते हुए उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने अपने सरल जीवन और गहन विचारों के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची भक्ति और सच्चा मानव धर्म वही है, जिसमें सभी के लिए समान सम्मान और अवसर हों। उन्होंने यह भी कहा कि संत रविदास का दर्शन आज के समय में सामाजिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समापन की ओर बढ़ते इस कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि संत शिरोमणि संत रविदास की 649वीं जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त अवसर है। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित इस गोष्ठी के माध्यम से संत रविदास के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। आयोजन ने यह साबित किया कि जब श्रद्धा, विचार और सामाजिक उद्देश्य एक साथ आते हैं, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं। काशीपुर में हुआ यह आयोजन संत रविदास के प्रति सम्मान का प्रतीक बनकर उभरा और आने वाले समय में सामाजिक समरसता की दिशा में प्रेरणास्रोत बनेगा।





