काशीपुर। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी काशीपुर की धरा पर आज समाज सेवा का एक नया अध्याय स्वर्णाक्षरों में अंकित किया गया, जब स्थानीय श्री कायस्थ सभा ने मानवता की सेवा के संकल्प को दोहराते हुए ‘श्री चित्रगुप्त कन्यादान एवं सामूहिक विवाह प्रोत्साहन योजना’ का अत्यंत भव्य और गरिमापूर्ण शिलान्यास किया। इस क्रांतिकारी कदम के माध्यम से संस्था ने न केवल अपनी गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखा है, बल्कि आधुनिक दौर में समाज के आर्थिक रूप से विपन्न वर्गों के लिए उम्मीद की एक नई किरण भी जगा दी है। अध्यक्ष अभिताभ सक्सेना एडवोकेट ने बताया कि इस योजना का मूल मंत्र उन निर्धन परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करना है, जो धन के अभाव में अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे थे। सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि उनका यह प्रयास महज एक चौरिटी नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता और सामूहिक उत्तरदायित्व का जीवंत प्रमाण है, जो आने वाले समय में अन्य संगठनों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करेगा।
योजना की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्ष अभिताभ सक्सेना एडवोकेट ने बताया कि यह पहल विशेष रूप से उन कन्याओं के लिए है जिनके परिवार आर्थिक विषमताओं से जूझ रहे हैं और विवाह के भारी खर्चों को वहन करने में असमर्थ हैं। इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत दो प्रमुख श्रेणियां बनाई गई हैं, जिसमें प्रथम श्रेणी में श्री कायस्थ सभा से सीधे जुड़े हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रखा गया है। इन परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सभा भवन पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा और साथ ही संस्था की ओर से उपहार स्वरूप ₹5100 की नकद आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी, ताकि विवाह की रस्में बिना किसी मानसिक दबाव के संपन्न हो सकें। इसके अलावा, द्वितीय श्रेणी में अन्य वर्गों की उन अनाथ, असहाय या निर्धन सनातनी कन्याओं को शामिल किया गया है, जिनके लिए सभा भवन के शुल्क में 50 प्रतिशत की भारी कटौती सुनिश्चित की गई है। शर्त केवल इतनी है कि विवाह कार्यक्रम सभा भवन के भीतर ही आयोजित होना चाहिए, जिससे संस्था उस पवित्र बंधन की साक्षी बन सके और ₹5100 की तय सहायता राशि का लाभ उस परिवार को सीधे तौर पर मिल सके।

इस पुनीत कार्य में पारदर्शिता की शुचिता बनाए रखने के लिए संस्था के सचिव राजेश कुमार सक्सेना ने बहुत ही व्यावहारिक और कड़े नियमों की जानकारी साझा की, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद तक ही पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि योजना के कार्यान्वयन हेतु एक विशेष ‘7 सदस्यीय जांच समिति’ का गठन किया गया है, जो प्रत्येक प्राप्त आवेदन की गहनता से समीक्षा करेगी। यह समिति स्वयं आवेदक के घर जाकर धरातलीय स्थिति का अवलोकन करेगी और अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट कार्यकारिणी समिति को सौंपेगी, जिसके बाद ही पात्रता पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। वर्तमान में, योजना के शुरुआती चरण में प्रति वर्ष अधिकतम 10 सुपात्र कन्याओं को ही इस लाभ से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन संस्था का विजन अत्यंत विस्तृत है और भविष्य में इस संख्या को बढ़ाने की पूरी योजना है। आवेदन की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि इच्छुक परिवार विवाह की निर्धारित तिथि से कम से कम दो माह पहले अपना पंजीकरण करा लें, हालांकि अत्यंत आपातकालीन स्थितियों में कार्यकारिणी को यह अधिकार होगा कि वह समय सीमा में विशेष छूट प्रदान कर सके।
संस्था के संरक्षक अशोक सक्सेना ने इस अवसर पर अपील करते हुए समाज के हर उस व्यक्ति का आह्वान किया जो सक्षम है और दूसरों के जीवन में बदलाव लाने की सामर्थ्य रखता है। उन्होंने क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, व्यापारियों और जन प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इस ‘कन्यादान महायज्ञ’ में अपनी आहुति दें, क्योंकि यह केवल एक संस्था का कार्यक्रम नहीं बल्कि पूरे समाज का सामूहिक ऋण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस योजना में विशेष प्राथमिकता हमारे देश के वीर शहीदों की पुत्रियों, विधवा माताओं की लाडली बेटियों, शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) कन्याओं और उन अत्यंत गरीब परिवारों को दी जाएगी जिनका सहारा केवल ईश्वर है। सहायता राशि का वितरण पूर्णतः पारदर्शी तरीके से सीधे चेक के माध्यम से कन्या के विवाह के समय ही किया जाएगा, जिससे परिवार को वित्तीय सुरक्षा का अहसास हो। इसके साथ ही, सभा ने सामूहिक विवाह की संस्कृति को बढ़ावा देने का भी संकल्प लिया है, जिसमें सामूहिक विवाह करने वाले जोड़ों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और आयोजन से जुड़े अन्य सहयोग प्रदान करने पर भी कार्यकारिणी स्तर पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।
इस ऐतिहासिक घोषणा के साक्षी बनते समय सभा भवन में कई वरिष्ठ और समर्पित सदस्य उपस्थित रहे। इस दौरान संस्था संरक्षक मुकेश सक्सेना एडवोकेट, सुशील कुमार सक्सेना, और गीता सक्सेना ने योजना के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की, वहीं उपाध्यक्ष प्रदीप सक्सेना, उपसचिव कुलदीप श्रीवास्तव, और आय-व्यय निरीक्षक ज्ञानेंद्र सक्सेना ने योजना के वित्तीय प्रबंधन और सुचारू संचालन का आश्वासन दिया। सभा की गरिमा को बढ़ाते हुए विधि अधिकारी अपूर्व चित्रांश, कार्यकारिणी सदस्य राजेश चंद्र सक्सेना, अनूप सक्सेना, और अनिल कुमार ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त क्षेत्र संयोजक रजनीश कुमार सक्सेना, कामिनी श्रीवास्तव, सुनीता सक्सेना, देवम सक्सेना, और राम अवतार सक्सेना जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं ने इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। यह योजना केवल काशीपुर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र में सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण का नया विहान लेकर आई है, जिसे आने वाली पीढ़ियां एक वरदान के रूप में याद रखेंगी।

योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु सभा ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए किसी भी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं है; इच्छुक पात्र व्यक्ति सीधे सभा भवन में संपर्क कर निर्धारित प्रारूप में अपना विवरण प्रस्तुत कर सकते हैं। संस्था का मानना है कि जब एक बेटी का विवाह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न होता है, तो वह पूरे समाज के सम्मान की जीत होती है और श्री कायस्थ सभा इसी सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कन्यादान को शास्त्रों में सर्वाेत्तम दान माना गया है और अभिताभ सक्सेना एडवोकेट की अध्यक्षता में शुरू हुई यह मुहिम उसी प्राचीन आध्यात्मिक मूल्यों को आधुनिक सामाजिक ढांचे में पिरोने का काम कर रही है। प्रेस वार्ता के समापन पर सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में जय चित्रगुप्त के नारों के साथ इस सेवा यात्रा को अविरल जारी रखने की शपथ ली। समाज के विभिन्न वर्गों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र की सबसे जन-हितैषी योजनाओं में से एक बताया है, जिससे निर्धन कन्याओं के विवाह का स्वप्न अब बिना किसी आर्थिक बाधा के साकार हो सकेगा।





