काशीपुर। प्रबंधन शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रचनात्मक और नवाचार आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत श्रीराम इंस्टीट्यूट काशीपुर के एमबीए छात्र–छात्राओं के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर के डिज़ाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन सेंटर के सहयोग से आयोजित हुई, जिसमें विद्यार्थियों को आधुनिक प्रबंधन की नई अवधारणाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का विषय “मैनेजमेंट थ्रू डिज़ाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन” रखा गया था, जिसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि बदलते वैश्विक परिवेश में केवल पारंपरिक प्रबंधन ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक सोच और नवाचार की भी उतनी ही आवश्यकता है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को यह बताया गया कि किस प्रकार डिज़ाइन थिंकिंग की अवधारणा के माध्यम से जटिल चुनौतियों को सरल और प्रभावी तरीके से हल किया जा सकता है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नई जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ प्रबंधन के क्षेत्र में उभरती संभावनाओं को समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर के प्रो0 समरजीत और प्रो0 गार्गी रावत ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। अपने विचार साझा करते हुए दोनों विशेषज्ञों ने प्रबंधन के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के दौर में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है और ऐसे वातावरण में संगठनों को सफलता दिलाने के लिए पारंपरिक सोच से आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिज़ाइन थिंकिंग केवल एक तकनीकी अवधारणा नहीं बल्कि एक ऐसी सोच है जो समस्याओं को समझने, उनका विश्लेषण करने और फिर उनके लिए नवीन समाधान तैयार करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाती है। अपने व्याख्यान के दौरान प्रो0 समरजीत और प्रो0 गार्गी रावत ने कई प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया कि नवाचार किसी भी संगठन की प्रगति का आधार होता है और इसके लिए रचनात्मक सोच का होना बेहद जरूरी है।

अपने संबोधन के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कई रोचक केस स्टडी और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरण भी प्रस्तुत किए, जिनके माध्यम से उन्होंने प्रबंधन के क्षेत्र में डिज़ाइन थिंकिंग की उपयोगिता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि किसी भी समस्या का समाधान खोजने से पहले उसके मूल कारण को समझना आवश्यक होता है, और यही प्रक्रिया डिज़ाइन थिंकिंग में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार किसी संगठन में ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर बेहतर रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने इंटरएक्टिव गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को यह अनुभव कराया कि समूह में मिलकर काम करने से नए विचार और बेहतर समाधान सामने आते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और विभिन्न गतिविधियों में अपनी रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। इस प्रकार कार्यशाला का वातावरण पूरी तरह संवादात्मक और प्रेरणादायक बना रहा।
कार्यशाला को विशेष रूप से श्रीराम इंस्टीट्यूट काशीपुर के एमबीए विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था। कार्यक्रम में लगभग 50 छात्र–छात्राओं ने पूरे उत्साह और जिज्ञासा के साथ भाग लिया। छात्रों ने न केवल वक्ताओं के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अवसर पर विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि आज के व्यावसायिक जगत में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए नवीन दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है। कार्यशाला के दौरान उन्हें यह भी बताया गया कि डिज़ाइन थिंकिंग की प्रक्रिया में समस्या की पहचान, उपयोगकर्ता की जरूरतों को समझना, नए विचारों का विकास करना और फिर उन विचारों को व्यवहार में लागू करना शामिल होता है। इस प्रकार विद्यार्थियों को प्रबंधन की एक ऐसी आधुनिक पद्धति के बारे में जानकारी मिली, जो भविष्य में उनके पेशेवर जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
शैक्षणिक संवाद के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को ग्राहक केंद्रित सोच और नवाचार आधारित प्रबंधन रणनीतियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि किसी भी सफल संगठन की रणनीति का मूल आधार ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझना होता है। यदि किसी संस्था को दीर्घकालिक सफलता प्राप्त करनी है तो उसे अपने ग्राहकों की अपेक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करनी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए, जिन्होंने डिज़ाइन थिंकिंग को अपनाकर अपने उत्पादों और सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार किया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचार केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक सोचने का तरीका है, जो संगठन को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। इस चर्चा ने छात्रों को प्रबंधन की नई अवधारणाओं के प्रति अधिक जागरूक और उत्साहित किया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीराम संस्थान की ओर से भी कई शिक्षकों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस पहल को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। इस अवसर पर असिस्टेंट प्रो0 डॉ. अकिल अहमद, कुलदीप, अंशुल नाथ और अंजलि नायर विशेष रूप से मौजूद रहे। इन सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों के ज्ञान को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रबंधन शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योग जगत और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों से भी लगातार परिचित कराया जाना चाहिए। शिक्षकों ने यह भी कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिलना छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव है, जिससे उन्हें नई प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थान प्रबंधन की ओर से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट काशीपुर के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग से विद्यार्थियों को प्रबंधन और उद्योग जगत की आधुनिक अवधारणाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के संयुक्त कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करने का अवसर मिलता रहे। संस्थान प्रबंधन का मानना है कि जब छात्र केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर व्यावहारिक अनुभव और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी उनका समग्र व्यक्तित्व विकास संभव हो पाता है। इस कार्यशाला ने न केवल विद्यार्थियों को नई जानकारी प्रदान की बल्कि उन्हें यह भी प्रेरित किया कि वे प्रबंधन के क्षेत्र में रचनात्मक सोच और नवाचार को अपनाकर भविष्य में नई संभावनाएं तलाशें। इस प्रकार यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उनके करियर के लिए उपयोगी साबित हुआ।





