spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडशिक्षक दिवस पर अनिल डाबर ने दस बच्चों की शिक्षा का संपूर्ण...

शिक्षक दिवस पर अनिल डाबर ने दस बच्चों की शिक्षा का संपूर्ण खर्च उठाकर रचा इतिहास

स्वर्गीय ज्ञानचंद डाबर की स्मृति में अनिल डाबर ने शिक्षक दिवस पर शिक्षा को बनाया मिशन, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के भविष्य संवारने का लिया संकल्प

काशीपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर जब पूरा देश गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहा था, उसी दिन हमारे शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी अनिल डाबर ने ऐसा कार्य कर दिखाया जिसने शिक्षा के महत्व को और प्रखर बना दिया। इस खास दिन उन्होंने अपनी नेक नियत और उदार सोच का परिचय देते हुए दस ऐसे बच्चों की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया जो पढ़ाई में तो सक्षम हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। स्कूल की फीस से लेकर उनके आने-जाने तक का पूरा खर्च स्वयं वहन करने की घोषणा करते हुए अनिल डाबर ने यह साफ कर दिया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सिर्फ इच्छाशक्ति और दृढ़ निश्चय ही सबसे बड़ी पूंजी होती है। शिक्षक दिवस को उन्होंने अपने जीवन का एक अहम मोड़ बना दिया और शिक्षा को ही सच्ची सेवा का माध्यम मानकर समाज में मिसाल कायम की।

इस पहल के पीछे की प्रेरणा को लेकर जब उनसे चर्चा हुई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सब उनके स्वर्गीय पिताजी ज्ञानचंद डाबर की स्मृति और उनके आदर्शों का परिणाम है। अनिल डाबर ने कहा कि उनके पिताजी हमेशा शिक्षा को समाज के उत्थान का सबसे बड़ा साधन मानते थे और गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए हर संभव मदद करने को तत्पर रहते थे। उन्हीं की सोच को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘‘ज्ञानचंद डाबर वेलफेयर सोसाइटी’’ की स्थापना की है जिसके तहत अब हर वर्ष ऐसे बच्चों को चयनित कर पढ़ाई का संपूर्ण खर्च वहन किया जाएगा। इस वर्ष अभी तक छह बच्चों का चयन हो चुका है और कुल दस बच्चों का लक्ष्य रखा गया है। अनिल डाबर का मानना है कि शिक्षा का प्रसार किसी भी समाज को नई दिशा देने का सबसे सशक्त मार्ग है और उनके पिता के सपनों को पूरा करना ही उनके लिए सबसे बड़ा धर्म है।

रामकृष्ण मैट्रिक क्लब से जुड़े होने के कारण भी उनके परिवार को हमेशा से ही सेवा और शिक्षा की प्रेरणा मिलती रही है। अनिल डाबर ने बताया कि शिक्षक दिवस की सुबह जब रामकृष्ण डोमेटिक क्लब के पदाधिकारी उनके घर रामलीला आयोजन के लिए सहयोग मांगने पहुंचे, तभी अचानक उन्हें लगा कि वर्षों से मन में पल रही योजना को और विलंबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने उसी क्षण यह संकल्प लिया कि अब से जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का भार वह स्वयं उठाएंगे। उन्होंने कहा कि परिवार के हर सदस्य की यही सोच रही है कि गरीब और वंचित बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं रहने देना चाहिए। इसी सोच को हकीकत में बदलते हुए उन्होंने शिक्षक दिवस से इस अभियान का शुभारंभ कर दिया। यह पहल न केवल उनके पिताजी के आदर्शों का विस्तार है बल्कि समाज को भी शिक्षा की ओर जागरूक करने वाला कदम है।

शहर में कई प्रमुख लोग इस निर्णय की सराहना कर रहे हैं और इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। महापौर दीपक बाली, ब्लॉक प्रमुख पति विजय कुमार ‘‘बॉबी’’, मनीष श्रीवास्तव समेत अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि अनिल डाबर ने जो मिशन शुरू किया है, वह शिक्षा के क्षेत्र में गरीब परिवारों के लिए संजीवनी साबित होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा दिलाना केवल परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है और अगर ऐसे प्रयास लगातार होते रहे तो निश्चित ही आने वाले वर्षों में देश का भविष्य और भी उज्ज्वल होगा। अनिल डाबर के इस कदम ने यह भी स्पष्ट किया है कि समाज में बदलाव की शुरुआत अकेले एक व्यक्ति भी कर सकता है और जब तक दूसरों को साथ जोड़ने का जज्बा है तब तक इस मिशन को और भी व्यापक बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर अनिल डाबर ने यह भी आश्वासन दिया कि वह किसी और से आर्थिक सहायता नहीं लेंगे बल्कि भगवान की कृपा से स्वयं ही इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते रहेंगे। उनका विश्वास है कि सच्चे इरादों से शुरू की गई पहल में सफलता जरूर मिलती है और गरीब बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में वह इस मिशन को और भी बड़ा रूप देंगे ताकि अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिल सके। समाज के कई बुद्धिजीवियों ने उनकी इस सोच को शिक्षा का महायज्ञ बताया है और कहा है कि अगर हर व्यक्ति इसी तरह अपने स्तर पर योगदान दे तो कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा।

शिक्षक दिवस पर अनिल डाबर द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल उनके परिवार के संस्कारों और स्वर्गीय पिता ज्ञानचंद डाबर की स्मृति को अमर कर रहा है बल्कि समाज को यह सिखा रहा है कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो आने वाली पीढ़ियों को उज्जवल भविष्य की ओर ले जा सकती है। यह समाचार पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर वर्ग से लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। एक तरफ जहां उन्होंने दस बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाकर मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया कि शिक्षक दिवस जैसे अवसर पर अगर शिक्षा का महत्व बढ़ाया जाए तो यह गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अनिल डाबर की इस पहल ने पूरे समाज में एक नई चेतना भर दी है और आने वाले समय में निश्चित ही इससे प्रेरणा लेकर और भी लोग शिक्षा की अलख जगाने के लिए आगे आएंगे।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!