रामनगर। प्रदेश से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहां पूरे प्रदेश में आयोजित परिषदीय परीक्षा 2026 का सफल और शांतिपूर्ण समापन हो गया है। लंबे समय से चल रही इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया के खत्म होते ही अब शिक्षा विभाग की नजर अगले चरण यानी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर टिक गई है, जिसे लेकर भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार परीक्षा को लेकर जिस प्रकार की सतर्कता, अनुशासन और पारदर्शिता देखने को मिली, उसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली को एक नई दिशा दी है। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि पूरे आयोजन के दौरान कहीं से भी किसी बड़े व्यवधान या अव्यवस्था की खबर सामने नहीं आई। अब सभी की नजर आगामी मूल्यांकन प्रक्रिया पर है, जिसे भी पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ पूरा कराने की योजना बनाई गई है।
प्रदेशभर में आयोजित इस परीक्षा का संचालन निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं सभापति उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के मार्गदर्शन में किया गया, जिनके निर्देशन में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से अंजाम दिया गया। इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों स्तरों की परीक्षाओं में एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर अपनी शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। परीक्षा का आयोजन जिस प्रकार से किया गया, उसने यह साबित कर दिया कि यदि सही योजना और समन्वय के साथ कार्य किया जाए, तो इतने बड़े स्तर की परीक्षा को भी बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने भी इस बात पर संतोष जताया है कि इस बार परीक्षा के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का स्तर पहले से बेहतर रहा, जिससे छात्रों को एक निष्पक्ष और शांत माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिला।
इस वर्ष परीक्षा का आयोजन राज्य के कुल 1261 परीक्षा केंद्रों पर किया गया, जहां सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया था। 21 फरवरी 2026 से शुरू हुई यह परीक्षा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित हुई और हर केंद्र पर प्रशासनिक सतर्कता साफ नजर आई। आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 1 लाख 12 हजार 266 और इंटरमीडिएट में 1 लाख 2 हजार 986 परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जो इस परीक्षा के व्यापक दायरे को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी के बावजूद परीक्षा का शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर न केवल कड़ी निगरानी रखी गई, बल्कि वहां उपलब्ध सुविधाओं को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया गया, ताकि किसी भी छात्र को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
परीक्षा के सफल आयोजन के पीछे विभिन्न विभागों और अधिकारियों का समन्वित प्रयास रहा, जिसकी सराहना स्वयं परिषद द्वारा भी की गई है। शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाई। इसके साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा। उनकी सतर्कता के कारण ही परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि सामने नहीं आई और पूरा माहौल शांतिपूर्ण बना रहा। यह सहयोग और समर्पण ही इस बड़े आयोजन की सफलता का मुख्य आधार बना है।
अब जब परीक्षा प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, तो अगला महत्वपूर्ण चरण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का है, जिसकी शुरुआत 27 मार्च 2026 से की जाएगी। यह प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 तक चलेगी और इस दौरान राज्यभर में बनाए गए 29 मूल्यांकन केंद्रों पर कॉपियों की जांच की जाएगी। इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को भी पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस बार मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी निगरानी में कराया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना को खत्म किया जा सके। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है।
मूल्यांकन कार्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार हाईस्कूल की 6 लाख 70 हजार 28 और इंटरमीडिएट की 5 लाख 14 हजार 787 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जाएगी, जो अपने आप में एक बड़ा कार्य है। इसके लिए हाईस्कूल स्तर पर 1937 और इंटर स्तर पर 1725 शिक्षकों की तैनाती की गई है, जो पूरी जिम्मेदारी के साथ इस कार्य को अंजाम देंगे। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निष्पक्षता और पारदर्शिता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें, ताकि हर छात्र को उसके प्रदर्शन के अनुसार सही अंक मिल सकें। इसके अलावा, मूल्यांकन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए 50 प्रतिशत कॉपियों का पुनः परीक्षण भी किया जाएगा, जिससे किसी भी संभावित त्रुटि को सुधारा जा सके।
परीक्षा को नकल विहीन और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए इस बार विशेष रणनीति अपनाई गई थी, जिसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। शिक्षा विभाग और बोर्ड प्रशासन ने मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं तैयार की थीं, जिससे नकल की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। परीक्षा केंद्रों के आसपास बीएनएसएस की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू की गई थी, ताकि बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके और परीक्षा का माहौल पूरी तरह अनुशासित बना रहे। इसके अलावा, परीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण भी किया जाता रहा, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत रोका जा सके।
परीक्षा समाप्त होने तक प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से परीक्षा केंद्रों की निगरानी में जुटे रहे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर चरण सही तरीके से पूरा हो। उनकी सतर्कता और सक्रियता के कारण ही परीक्षा बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी। यह समन्वित प्रयास इस बात का प्रमाण है कि यदि सभी विभाग मिलकर काम करें, तो किसी भी बड़े आयोजन को सफल बनाया जा सकता है। अब जब मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, तो उम्मीद की जा रही है कि यह चरण भी उसी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरा किया जाएगा, जिससे छात्रों को उनके परिश्रम का उचित परिणाम मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और मजबूत हो।





