रामनगर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदलते हालातों और बढ़ते युद्ध जैसे माहौल का असर अब देश के छोटे शहरों तक भी साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है। अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने जहां वैश्विक स्तर पर चिंता की स्थिति पैदा कर दी है, वहीं उत्तराखंड के रामनगर में भी इस मुद्दे को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न सामाजिक और जनसंगठनों ने एकजुट होकर तहसील परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बैनर और तख्तियां लेकर पहुंचे और “युद्ध नहीं, शांति चाहिए” जैसे नारों से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी युद्ध का सबसे ज्यादा असर निर्दोष और आम नागरिकों पर पड़ता है, और वर्तमान परिस्थितियों में भी यही देखने को मिल रहा है, जहां मासूम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका-इसराइल गठजोड़ पर इस संघर्ष को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह युद्ध केवल दो-तीन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया, विशेषकर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि समुद्री मार्गों में बाधा आने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा है, जहां महंगाई बढ़ने के साथ-साथ जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। रामनगर सहित आसपास के क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की भारी कमी ने लोगों को परेशान कर दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों में समय पर बुकिंग कराने के बावजूद कई दिनों तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एजेंसियों पर बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है और स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस बढ़ते आक्रोश के बीच प्रदर्शनकारी तहसील परिसर से उपजिलाधिकारी आवास तक पहुंचे और वहां अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान को एक ज्ञापन सौंपा, जो प्रधानमंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री और विदेश मंत्री के नाम संबोधित था। ज्ञापन में कहा गया कि संसद में दिए गए आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं और गैस वितरण प्रणाली में किए गए नए बदलावों ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नीतिगत फैसलों का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जो आम लोगों को राहत पहुंचा सकें।
ज्ञापन में व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहे असर को भी गंभीरता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की बिक्री पर लगे प्रतिबंध के कारण कई छोटे और मध्यम व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कैंटीन, हॉस्टल, पीजी, ढाबे, होटल और छोटे उद्योग गैस की कमी के कारण अपना काम ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। इससे जुड़े लाखों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो सकते हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक संकट गहरा सकता है। उन्होंने मांग की कि व्यावसायिक गैस पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाए, बढ़ी हुई कीमतों को वापस लिया जाए और प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
प्रदर्शन के दौरान खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा हालातों में वहां रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार को इस दिशा में तेजी से कदम उठाने चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले ही भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
धरना-प्रदर्शन में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, चिंताराम, तहसीन खान टीके, समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, गिरीश चंद्र, जमनराम, बी.डी. नैनवाल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, भुवन चंद्र, महिला एकता मंच की कौशल्या चुन्याल, सरस्वती जोशी, ममता देवी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की गीता देवी, प्रगतिशील जन एकता मंच के लालमणी, आइसा के सुमित, पछास के रवि, नई बस्ती पूछड़ी की ग्राम प्रधान अंजलि रावत और देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी मांगों को उठाया और कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे लगातार जारी रखा जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब सीधे तौर पर आम जनता के जीवन पर पड़ने लगा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह ऐसी विदेश नीति अपनाए, जो देश के हितों की रक्षा करे और वैश्विक शांति को बढ़ावा दे। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके। प्रदर्शन के अंत में सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे शांति, न्याय और आम जनता के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे और किसी भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।





