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विदेश नीति गैस संकट और महंगाई को लेकर करण महारा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

सोशल मीडिया हैंडल पर करण महारा ने रूस, ईरान संबंध, गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतेंए संसद में राहुल गांधी को बोलने न देने और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी से जवाबदेही मांगते हुए सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण महारा ने देश की विदेश नीति, महंगाई, गैस संकट और संसद में विपक्ष की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि किसी भी राष्ट्र की विदेश नीति उसकी वैश्विक पहचान, ताकत और सम्मान का प्रतीक होती है। भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की विदेश नीति हमेशा संतुलन, स्वतंत्रता और पारंपरिक मित्र देशों के साथ मजबूत संबंधों पर आधारित रही है। लेकिन वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को कमजोर कर दिया है। करण महारा ने कहा कि दशकों से भारत के साथ मजबूत मित्रता निभाने वाले देशों जैसे रूस और ईरान के साथ भारत के संबंध हमेशा सहयोग और सम्मान पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में इन देशों के साथ भारत ने लंबे समय तक मजबूत संबंध बनाए रखे थे। लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता है कि भारत की विदेश नीति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और सरकार ने अमेरिका की ओर झुकाव की नीति अपना ली है, जिससे भारत के पारंपरिक मित्र देशों के साथ दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है।

वर्तमान वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए करण महारा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस दौर में भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने की आवश्यकता थी, लेकिन मौजूदा सरकार के फैसले इस दिशा में कमजोर दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने विदेश नीति के मामले में भारत की स्वतंत्र पहचान को कमजोर कर दिया है। उनका कहना था कि आज ऐसा प्रतीत होता है कि भारत की विदेश नीति का रिमोट कंट्रोल अमेरिका के हाथों में चला गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ सरकार की नजदीकियां इस तरह दिखाई देती हैं मानो भारत की विदेश नीति स्वतंत्र न रहकर किसी और के प्रभाव में संचालित हो रही हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा से संतुलित कूटनीति का पक्षधर रहा है, जहां एक ओर पश्चिमी देशों के साथ सहयोग रहा है तो दूसरी ओर रूस, ईरान और अन्य देशों के साथ भी मजबूत संबंध कायम रखे गए हैं। लेकिन मौजूदा समय में यह संतुलन कमजोर पड़ता नजर आ रहा है, जो भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

देश के भीतर की स्थिति पर चर्चा करते हुए करण महारा ने कहा कि जहां एक ओर विदेश नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि आज आम नागरिक के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है। रसोई गैस जैसे बुनियादी संसाधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं को कम करने के बजाय लगातार गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ाकर लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है। आज हालात ऐसे हो गए हैं कि कई स्थानों पर लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। करण महारा ने कहा कि जिस सरकार ने “अच्छे दिन” का वादा करके सत्ता हासिल की थी, वही सरकार आज आम आदमी की रसोई को महंगा बना चुकी है। महंगाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए घरेलू खर्च संभालना कठिन हो गया है और लोगों को अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।

राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए करण महारा ने यह भी कहा कि देश में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संसद होती है, जहां जनता के मुद्दों पर चर्चा होती है और सरकार से जवाबदेही तय की जाती है। लेकिन उनका आरोप है कि मौजूदा समय में संसद में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद में महंगाई, बेरोजगारी और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों को उठाने की कोशिश करते हैं, तब उन्हें बोलने का पूरा अवसर नहीं दिया जाता। करण महारा ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां विपक्ष की आवाज को दबाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उनका कहना था कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जनता की समस्याओं को सामने लाना होता है, लेकिन यदि संसद में ही विपक्ष को बोलने का अवसर न मिले तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो जाती है।

इसी संदर्भ में करण महारा ने यह भी कहा कि आज देश की जनता यह सवाल पूछ रही है कि आखिर सरकार किसके लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर विदेश नीति में असंतुलन दिखाई दे रहा है, दूसरी ओर देश के भीतर महंगाई लगातार बढ़ रही है और तीसरी ओर संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने की प्रवृत्ति भी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल प्रचार की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को मजबूत नेतृत्व, पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। लेकिन यदि सरकार जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ ले और लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश करे तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए करण महारा ने अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के दिनों में सामने आई कई घटनाओं ने भारत की विदेश नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि जैसे ही तथाकथित एप स्टीम फाइल से जुड़े खुलासे सामने आए, उसी समय वैश्विक स्तर पर एक नया घटनाक्रम देखने को मिला और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किए जाने की खबर सामने आई। उनके अनुसार यह घटनाक्रम कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से भारत का एक भरोसेमंद मित्र देश रहा है और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में भारत की मदद करता रहा है। तेल की आपूर्ति से लेकर व्यापारिक सहयोग तक, ईरान के साथ भारत के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। करण महारा ने कहा कि जब भी भारत को ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत पड़ी, तब ईरान ने हमेशा सहयोग किया। यही कारण है कि भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत सरकार की चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है और देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर सरकार की स्पष्ट नीति क्या है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में करण महारा ने कहा कि भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी ताकत उसका संतुलन और स्वतंत्रता रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। रूस के साथ भारत के दशकों पुराने संबंध इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। जब-जब भारत पर अंतरराष्ट्रीय संकट आया, तब रूस ने भारत का साथ दिया और रक्षा, ऊर्जा तथा तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारत और रूस के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला हुआ है। इसी तरह इस्लामिक देशों में ईरान ऐसा देश रहा है जिसने कई अवसरों पर भारत के साथ मजबूती से खड़े होकर समर्थन दिया। करण महारा का कहना था कि ऐसे देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाए रखना भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा होना चाहिए था। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा लगता है कि सरकार इन पारंपरिक मित्र देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने में सफल नहीं हो पा रही है।

संसद में विपक्ष की भूमिका का जिक्र करते हुए करण महारा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार सदन में इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बार-बार यह चेतावनी दी कि यदि वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। उनके अनुसार युद्ध की स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि होना स्वाभाविक है, जिसका असर सीधे आम जनता पर पड़ता है। करण महारा ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में यह भी मांग की थी कि ईरान के शीर्ष नेता की मृत्यु के बाद भारत सरकार को स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और देश की विदेश नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए था। उनका कहना था कि यदि ऐसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर सरकार चुप रहती है तो इससे देश की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होती है।

ऊर्जा संकट की आशंकाओं पर बोलते हुए करण महारा ने कहा कि जब राहुल गांधी ने संसद में तेल और गैस की संभावित कमी की बात उठाई थी, तब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया था। उस समय सरकार की ओर से यह कहा गया था कि भारत में न तो गैस की कमी होगी और न ही तेल की आपूर्ति में कोई बाधा आएगी। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही हालात बदलते नजर आए। करण महारा ने आरोप लगाया कि सरकार के दावों के विपरीत देश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आम नागरिकों के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि रसोई गैस हर घर की बुनियादी जरूरत है। यदि यही संसाधन समय पर उपलब्ध न हो सके तो लोगों की दैनिक जीवनचर्या प्रभावित हो जाती है।

आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए करण महारा ने कहा कि जब सरकार ने यह दावा किया कि देश में सब कुछ सामान्य है, उसके अगले ही दिन घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपए का इजाफा किया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम आम जनता के लिए एक और झटका साबित हुआ। पहले से ही महंगाई का बोझ झेल रहे परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमतों में यह वृद्धि चिंता का कारण बन गई। उनका कहना था कि आज स्थिति यह है कि कई गैस एजेंसियों में सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं और लोग अपने घरों में चूल्हा जलाने के लिए परेशान दिखाई दे रहे हैं। करण महारा ने कहा कि आम नागरिक लगातार प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह उन्हें गैस सिलेंडर मिल सके, लेकिन व्यवस्था में अव्यवस्था के कारण लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए करण महारा ने कहा कि संसद में इन मुद्दों पर चर्चा होना बेहद जरूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने तेल और गैस की कीमतों तथा संभावित कमी को लेकर सदन में चर्चा की मांग की थी, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संसद वह मंच है जहां देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बहस होनी चाहिए। यदि विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रस्तावों को ही खारिज कर दिया जाए तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल जनता की आवाज को संसद तक पहुंचाने का काम कर रहा है, लेकिन यदि उस आवाज को ही दबा दिया जाए तो जनता के सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।

राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करते हुए करण महारा ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार वास्तव में जनता की समस्याओं को सुनने और उन पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष के नेता लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हैं तो सरकार उन्हें नजरअंदाज करने का प्रयास करती है। उनके अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार संसद में आम लोगों से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, ऊर्जा संकट और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें जैसे मुद्दे देश के करोड़ों लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। करण महारा का कहना था कि इन विषयों पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए थी ताकि सरकार अपनी नीतियों को स्पष्ट कर सके और जनता को भरोसा दिला सके कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। लेकिन उनका आरोप है कि मौजूदा हालात में सरकार इन सवालों से बचने का प्रयास कर रही है और संसद में बहस से भी दूरी बना रही है।

सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए करण महारा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल राजनीतिक प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीति की जरूरत है। लेकिन जब महंगाई बढ़ती है, गैस और तेल की कीमतें लगातार ऊपर जाती हैं और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा होती है, तब आम नागरिकों के मन में चिंता और असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। करण महारा ने कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट रणनीति बनाकर जनता के सामने आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पारदर्शिता और योजना की कमी रहेगी तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जीवनशैली पर पड़ेगा।

विदेश नीति के मुद्दे पर एक बार फिर अपनी बात दोहराते हुए करण महारा ने कहा कि भारत की ताकत उसकी संतुलित और स्वतंत्र कूटनीति रही है। उन्होंने कहा कि आज ऐसा प्रतीत होता है कि भारत की विदेश नीति का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथों में चला गया है। उन्होंने कहा कि कई घटनाएं ऐसी हुई हैं जिनसे यह सवाल उठता है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखने में सफल हो पा रहा है। करण महारा ने आरोप लगाया कि वर्तमान हालात देखकर ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अमेरिका के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इनकी नीतियों का नियंत्रण अमेरिका के हाथों में है और विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रम्प का प्रभाव दिखाई देता है। उनके अनुसार भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की विदेश नीति को किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त और स्वतंत्र होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का जिक्र करते हुए करण महारा ने कहा कि जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, तब भारत सरकार की प्रतिक्रिया बेहद कमजोर दिखाई दी। उनका कहना था कि यह हमला वैश्विक राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम था और भारत को इस पर स्पष्ट और संतुलित प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से भारत का मित्र देश रहा है और ऊर्जा क्षेत्र में उसने भारत की मदद की है। ऐसे में जब उस देश पर हमला हुआ तो भारत की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत अपने मित्र देशों के साथ खड़ा नहीं होगा तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। करण महारा ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए था, ताकि सभी देशों के साथ सम्मानजनक संबंध कायम रह सकें।

ऊर्जा संकट और आर्थिक असर के मुद्दे पर बोलते हुए करण महारा ने कहा कि आज देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने पहले यह कहा कि सब कुछ सामान्य है, उसके बाद गैस सिलेंडर की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी कर दी गई। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और व्यावसायिक गैस सिलेंडर में 115 रुपए की बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन हो गई है। कई जगहों पर लोगों को गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और सिलेंडर मिलने में देरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। करण महारा ने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया तो इसका असर आम लोगों के दैनिक जीवन पर और अधिक पड़ेगा।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए करण महारा ने कहा कि संसद में इन सभी मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने तेल और गैस की कीमतों को लेकर सदन में चर्चा की मांग रखी थी, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संसद का महत्व इसलिए होता है क्योंकि यहां सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। यदि विपक्ष की आवाज को ही दबा दिया जाए तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ जाती है। करण महारा ने कहा कि देश की जनता चाहती है कि उनके प्रतिनिधि संसद में उनकी समस्याओं को उठाएं और सरकार उनसे जवाब दे। लेकिन यदि चर्चा ही नहीं होगी तो समस्याओं का समाधान कैसे निकलेगा।

अंत में करण महारा ने कहा कि देश की जनता आज यह जानना चाहती है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में असंतुलन, देश के भीतर बढ़ती महंगाई, गैस और तेल की कीमतों में वृद्धि और संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सरकार को जनता के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा। करण महारा ने यह भी कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को इन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीएल फाइल में सामने आए कथित लेन-देन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। उनके अनुसार देश की जनता पारदर्शिता, ईमानदारी और जिम्मेदार शासन चाहती है, इसलिए सरकार को इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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