काशीपुर। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख नगरों में शुमार काशीपुर में आयोजित ‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वारा’ अभियान के अंतर्गत नगर निगम परिसर में लगाए गए बहुउद्देशीय शिविर के दौरान प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जनता की शिकायतों के समाधान और सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में जब नगर के महापौर दीपक बाली ने विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को बुलाने का निर्देश दिया, तब संबंधित अधिकारी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए। इस स्थिति ने कार्यक्रम के माहौल को अचानक तनावपूर्ण बना दिया। नगर निगम परिसर में बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद के साथ शिविर में भाग लिया था, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने लोगों में असंतोष पैदा कर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने महापौर ने इस लापरवाही को जनता के प्रति उदासीनता करार दिया और इसे शासन की जनहितकारी नीतियों की अवहेलना बताया।
कार्यक्रम के दौरान महापौर ने जब विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की अनुपस्थिति की जानकारी ली, तो पता चला कि संबंधित अधिकारी करीब डेढ़ घंटे तक शिविर में नहीं पहुंचे थे। इसके बाद जैसे ही अधिकारी शिविर स्थल पर पहुंचे, महापौर का आक्रोश सार्वजनिक रूप से सामने आया। मंच से उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही जनता की उम्मीदों को ठेस पहुंचाती है। महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बहुउद्देशीय शिविर केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब अधिकारी ऐसे कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं रहते, तो इससे यह संदेश जाता है कि वे जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करेंगे, तो नगर प्रशासन ऐसे रवैये को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सांसद प्रतिनिधि विजय कुमार बाबी ने शिविर के मंच से विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता रमनदीप के व्यवहार और उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के साथ रमनदीप का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं है और कई बार लोगों को उनके कार्यालय में उचित सम्मान भी नहीं मिलता। सांसद प्रतिनिधि ने बताया कि जब वे स्वयं किसी कार्य को लेकर अवर अभियंता से मिलने गए, तो उन्हें पहचान बताने के बावजूद बैठने तक के लिए नहीं कहा गया। इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। मंच पर उपस्थित नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के सामने यह मामला उठने के बाद माहौल और अधिक गरमा गया और महापौर ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब यह सामने आया कि शिविर में उपस्थित विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता उत्कर्ष पांडे तथा उनके अधीन कार्यरत अवर अभियंता हिमांशु पंत भी समय पर समुचित जवाब देने में असफल रहे। महापौर ने मंच से दोनों अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि जनता से जुड़े कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि वे अपनी कार्यशैली में सुधार करें और नागरिकों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। महापौर का कहना था कि प्रशासनिक पद केवल अधिकार का प्रतीक नहीं बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का दायित्व भी होता है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से नहीं करेंगे, तो प्रशासन को कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। घटनाक्रम के दौरान महापौर ने विकास प्राधिकरण के सचिव एवं उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह को भी मंच से निर्देशित किया कि अवर अभियंता रमनदीप के खिलाफ तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि रमनदीप काशीपुर में कार्य करते रहेंगे तो वे स्वयं काम नहीं करेंगे। महापौर का यह बयान पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। नगर निगम परिसर में उपस्थित लोगों ने महापौर के इस कड़े रुख का समर्थन करते हुए प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की। कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों का कहना था कि सरकारी अधिकारी यदि जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेंगे तो जनहित से जुड़े कार्यक्रमों का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

नगर निगम परिसर में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में नागरिक विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। लोगों को उम्मीद थी कि इस मंच के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति और लापरवाही ने शिविर की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए। महापौर ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार की योजनाओं को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों का सक्रिय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी जनता से दूरी बनाए रखेंगे, तो शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार उधम सिंह नगर जिला विकास प्राधिकरण कार्यालय उपजिलाधिकारी कार्यालय परिसर में संचालित होता है, जहां उत्कर्ष पांडे के साथ हिमांशु पंत और रमनदीप अवर अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। पिछले कुछ महीनों से आम जनता द्वारा इन अधिकारियों के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। कई नागरिकों का आरोप था कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाता और कार्यालयों में उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता। इस प्रकार की शिकायतों के कारण विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, लेकिन शिविर में हुई घटना ने इन आरोपों को और अधिक चर्चा में ला दिया।
घटना के दौरान मंच पर मौजूद कई सामाजिक संगठनों और नागरिक प्रतिनिधियों ने भी अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि जब जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, तब प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता जनहित के विपरीत है। महापौर ने इस अवसर पर कहा कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी दोनों का उद्देश्य जनता की सेवा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करेंगे, तो प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता के साथ संवाद बढ़ाएं और शिकायतों के समाधान में तत्परता दिखाएं। महापौर ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि बहुउद्देशीय शिविर केवल शिकायत निवारण का मंच नहीं बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों में अधिकारियों की उपस्थिति जनता को यह भरोसा दिलाती है कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी भी जनसरोकार कार्यक्रम में लापरवाही बरती गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
शहर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का मानना है कि महापौर का यह कड़ा रुख प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी के कारण इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न हुई। नागरिकों का मानना है कि प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होने से इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।इस पूरे घटनाक्रम ने नगर प्रशासन और विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारी जनता की समस्याओं को समय पर नहीं सुनेंगे, तो लोगों का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा। महापौर ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उनका दायित्व केवल कार्यालय तक सीमित नहीं बल्कि जनता की सेवा करना भी है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जनता की समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता दिखानी होगी।
कार्यक्रम के अंत में महापौर ने यह स्पष्ट किया कि नगर निगम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी अधिकारी को जनहित के विपरीत कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर प्रशासन का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसके लिए सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें ताकि जनता का विश्वास प्रशासन पर बना रहे। इस घटना के बाद शहर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो जनहित से जुड़े कार्यक्रमों की प्रभावशीलता प्रभावित होगी। महापौर ने यह भी कहा कि नगर प्रशासन जनता के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक पद का अर्थ केवल अधिकार नहीं बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और सेवा भावना भी है, और इसी भावना के साथ नगर प्रशासन आगे कार्य करता रहेगा।





