काशीपुर। नगर निगम में आज एक बार फिर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की यादें ताज़ा हो गईं, जब दर्जनों आंदोलनकारी साथी एकजुट होकर अपने हक और पहचान के लिए एकजुट हुए। विद्यार्थी भैया के नेतृत्व में राज्य आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम पहुंचा और महापौर दीपक बाली को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उनकी एक ही मांग प्रमुख रही — “हमें खटीमा की तर्ज पर चिन्हित कर हमारा चिह्नीकरण किया जाए।” आंदोलनकारियों ने कहा कि बीते पच्चीस वर्षों से वे अपने अधिकार और सम्मान के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब उन्हें पूरा विश्वास है कि दीपक बाली जैसे आंदोलनकारी मेयर के नेतृत्व में उनकी यह लड़ाई अब परिणाम तक पहुंचेगी।
विद्यार्थी भैया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि उस पीड़ा की आवाज़ है जिसे वर्षों से आंदोलनकारियों ने अपने भीतर दबा रखा था। उन्होंने कहा कि जब खटीमा के आंदोलनकारियों को चिह्नीकरण और मान्यता मिली, तो काशीपुर के सक्रिय आंदोलनकारियों को यह अधिकार क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि काशीपुर भी उसी आंदोलन का अभिन्न केंद्र था, जहां अनेक लोगों ने जेलें भरीं, संघर्ष किया और उत्तराखंड राज्य की नींव मजबूत की। उनका कहना था कि अब वक्त आ गया है जब जिले में समानता के मानक लागू हों और सभी आंदोलनकारियों को एक समान सम्मान मिले। विद्यार्थी भैया ने भरोसा जताया कि “मुझे पूरा विश्वास है कि मेरा छोटा भाई दीपक बाली इस काम को रुकने नहीं देंगे। वह स्वयं एक घोषित आंदोलनकारी हैं, जेल जा चुके हैं, इसलिए हमारी पीड़ा को सबसे अधिक समझते हैं।”

मीडिया से बात करते हुए युगल किशोर सिंगल ने कहा कि यह ज्ञापन उम्मीद नहीं बल्कि विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनके साथियों ने आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी, लेकिन आज तक उनका चिह्नीकरण नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में तत्कालीन मंत्री अरविंद पांडे ने उन्हें आश्वासन दिया था कि यदि कुछ लोगों का चिह्नीकरण करना है तो वे स्वयं सूची बनवाकर प्रक्रिया पूरी करेंगे। मगर आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा था कि “सिर्फ दो-चार नहीं, बल्कि सभी को समान मान्यता मिले — या तो सब चिन्हित हों, या कोई नहीं।” उन्होंने कहा कि आंदोलन के समय जो लोग सड़कों पर थे, जेल गए, उनके बलिदान की अनदेखी किसी भी सूरत में उचित नहीं। अब जब बाली जैसे आंदोलनकारी नगर की कमान संभाल रहे हैं, तो उन्हें भरोसा है कि न्याय जरूर मिलेगा।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद महापौर दीपक बाली ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया है और अब यह केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि “मैं जानता हूं कि जब पूरे उत्तराखंड आंदोलन में हजारों लोगों ने सड़क पर उतरकर आवाज उठाई थी, तब काशीपुर ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी। उस समय मुलायम सिंह सरकार ने जब आंदोलनकारियों को जेल भेजा, तो यहां के सैकड़ों लोगों ने हिम्मत नहीं हारी।” बाली ने कहा कि आज वही लोग अपने हक की मांग कर रहे हैं, और उनकी यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर यह ज्ञापन सौंपेंगे और काशीपुर के आंदोलनकारियों को भी खटीमा की तर्ज पर चिह्नीकरण दिलाने का प्रयास करेंगे।
दीपक बाली ने कहा कि यह मांग किसी व्यक्तिगत लाभ की नहीं, बल्कि सम्मान की मांग है। उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों ने केवल उस त्याग और भूमिका का सम्मान मांगा है, जो उन्होंने राज्य निर्माण के दौरान निभाई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की निर्णय क्षमता और संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बार आंदोलनकारियों को उनका हक मिलेगा। “मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि यह ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचे और जो भी आवश्यक प्रक्रिया है, उसे शीघ्र पूरा कराया जाए,” बाली ने कहा। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे संगठित रहें और आंदोलन की भावना को जीवित रखें, क्योंकि यह सम्मान पूरे उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा विषय है।
मीडिया ने जब उनसे पूछा कि आज इतने वर्षों बाद भी यह मामला क्यों लंबित है, तो बाली ने जवाब दिया, “सरकारें आती-जाती रहती हैं, पर उम्मीद कभी खत्म नहीं होती। अब वक्त आ गया है कि हम अतीत की बातें छोड़कर आगे बढ़ें और जो काम अधूरे हैं, उन्हें मिलकर पूरा करें। मुझे पूरा विश्वास है कि यदि यह मांग पूरी होती है, तो यह न केवल न्याय होगा बल्कि आंदोलनकारियों के आत्मसम्मान को भी पुनर्जीवित करेगा।”
इस दौरान विद्यार्थी भैया ने बताया कि करीब 207 आंदोलनकारियों ने आज इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए और पूरी सूची महापौर को सौंपी गई है। सूची में उन सभी का विवरण शामिल है जिन्होंने आंदोलन के दौरान सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। आंदोलनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई किसी लाभ या सुविधा की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और योगदान की पहचान के लिए है।
कार्यक्रम के अंत में दीपक बाली ने सभी आंदोलनकारियों को धन्यवाद दिया और कहा कि “आपकी यह एकजुटता साबित करती है कि उत्तराखंड आंदोलन केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी हमारे दिलों में जिंदा है।” उन्होंने दोहराया कि वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे और काशीपुर के हर आंदोलनकारी को उसका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह मुलाकात केवल एक ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रही — यह उस संघर्ष की याद दिलाती रही जिसने कभी पहाड़ों की चुप्पी तोड़ी थी और एक राज्य का जन्म कराया था। आज वही आवाज फिर उठी है, सम्मान और पहचान की मांग लेकर, और इस बार उम्मीद भी है कि यह आवाज सत्ता के गलियारों में जरूर गूंजेगी।



