काशीपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल के कार्यकाल का जश्न मनाने और विशेष कार्यक्रम में शिरकत करने देवभूमि की धरती पर पहुंचे। इस भव्य आयोजन के लिए उत्तराखंड पहुंचे राजनाथ सिंह ने मंच से जैसे ही मुख्यमंत्री की प्रशंसा के पुल बांधने शुरू किए, प्रदेश की राजनीति का पारा अचानक से बढ़ गया। गौरतलब है कि यह वही राजनाथ सिंह हैं जिन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री को ‘धाकड़ धामी’ की उपाधि देकर उनकी कार्यशैली पर मुहर लगाई थी, लेकिन हल्द्वानी के इस ऐतिहासिक मंच से उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री को ‘धुरंधर’ की नई और शक्तिशाली उपाधि से नवाज दिया। रक्षा मंत्री के इस बयान ने जहाँ भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, वहीं विपक्षी खेमे में विशेषकर कांग्रेस की महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने इसे प्रदेश की जनता के साथ एक भद्दा मजाक करार देते हुए तीखा पलटवार किया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस ‘धुरंधर’ वाले संबोधन पर उत्तराखंड कांग्रेस की कद्दावर नेत्री और महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने मर्यादा की सीमाओं को लांघती इस तारीफ पर कड़ा ऐतराज जताया है। अलका पाल ने सरकार के चार साल के जश्न के बीच अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि जिस सरकार को केंद्र के बड़े नेता ‘धुरंधर’ बता रहे हैं, वह असल में प्रदेश को गर्त में धकेलने वाली सरकार साबित हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता बंद कमरों और हवाई दौरों से उत्तराखंड की असलियत नहीं देख पा रहे हैं, क्योंकि धरातल पर तो केवल हाहाकार मचा हुआ है। अलका पाल ने रक्षा मंत्री के दौरे को केवल एक ‘इवेंट मैनेजमेंट’ का हिस्सा बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को उपाधियाँ बांटने से पहाड़ का खाली पेट नहीं भरता और न ही उन माताओं के आंसू सूखते हैं जिनके बच्चे बेरोजगारी और नशे की भेंट चढ़ रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि कांग्रेस इस ‘दिखावटी धुरंधर’ वाली राजनीति का पर्दाफाश करके रहेगी और जनता के सामने सरकार का असली और काला चेहरा उजागर करेगी।
महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने सरकार की घेराबंदी करते हुए उन 14 काले अध्यायों की फेहरिस्त जारी की, जिसे वे धामी सरकार का ‘असली रिपोर्ट कार्ड’ मानती हैं। उन्होंने सबसे पहले महिला अपराध के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देवभूमि जिसे हम मां का दर्जा देते हैं, आज वहां बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं। अंकिता भंडारी जैसे अनगिनत मामले इस बात के गवाह हैं कि सरकार अपराधियों को संरक्षण देने में ‘धुरंधर’ है, न कि महिलाओं को सुरक्षा देने में। अलका पाल ने बेहद आक्रामक लहजे में पूछा कि क्या रक्षा मंत्री को उत्तराखंड की सड़कों पर बिलखती वो मां और बहनें दिखाई नहीं दीं जो आज भी इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं? उन्होंने कहा कि जिस राज्य में महिला अपराध का ग्राफ आसमान छू रहा हो, वहां की सरकार को ‘धुरंधर’ कहना महिला शक्ति का अपमान है और कांग्रेस इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को विस्तार देते हुए अलका पाल ने प्रदेश में व्याप्त भूमि घोटाले और अवैध खनन के खेल को मुख्यमंत्री के संरक्षण में फलने-फूलने वाला व्यापार बताया। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड की कीमती जमीनें भू-माफियाओं के हवाले की जा रही हैं और पहाड़ों की छाती चीरकर अवैध खनन का काला कारोबार दिन-रात धड़ल्ले से चल रहा है। महानगर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नदियों का स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है और पर्यावरण संतुलन से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन सरकार केवल ‘कमीशन खोरी’ में व्यस्त है। उन्होंने बेबाकी से कहा कि अगर जमीन और खानों को लूटने की कला को ‘धुरंधर’ होना कहते हैं, तो निश्चित रूप से यह सरकार इस मामले में विश्व रिकॉर्ड बना रही है। अलका पाल ने सवाल किया कि क्या राजनाथ सिंह जी को नैनीताल आते समय रास्ते में खुदी हुई नदियाँ और बिकते हुए पहाड़ नजर नहीं आए, या फिर उन्होंने अपनी आंखों पर सत्ता का चश्मा चढ़ा लिया है?
कांग्रेस अध्यक्ष ने देवभूमि की पवित्रता पर प्रहार करते हुए शराब के बढ़ते कारोबार और नशा के मकड़जाल पर सरकार की चुप्पी को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि आज गांव-गांव तक शराब की नदियां बह रही हैं और सरकार राजस्व के लालच में युवाओं के भविष्य को दांव पर लगा रही है। अलका पाल ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि उत्तराखंड अब पर्यटन प्रदेश के बजाय ‘नशा प्रदेश’ बनता जा रहा है, जहाँ ड्रग्स और स्मैक जैसे जहर ने मध्यम वर्गीय परिवारों को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि नशा माफियाओं और सट्टेबाजों के साथ सत्ता का गहरा गठजोड़ है, जिसके कारण पुलिस प्रशासन भी इन पर लगाम लगाने में बेबस नजर आता है। अलका पाल के अनुसार, जिस सरकार के राज में युवाओं के हाथ में किताबों के बजाय नशा हो, उस सरकार का पतन निश्चित है और राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को ऐसी विफल सरकार की पीठ थपथपाने से पहले एक बार प्रदेश के खंडहर होते परिवारों की ओर जरूर देख लेना चाहिए था।

प्रदेश की कानून व्यवस्था पर हमला जारी रखते हुए अलका पाल ने हत्या और अपराध की बढ़ती घटनाओं को सरकार की सबसे बड़ी नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि शांत कही जाने वाली देवभूमि में अब सरेराह गोलियां चल रही हैं और रंगदारी वसूली जा रही है, जिससे व्यापारियों और आम जनता के बीच दहशत का माहौल है। इतना ही नहीं, उन्होंने पुलिस से जनता का उत्पीड़न होने का दावा करते हुए कहा कि आज आम आदमी थाने जाने से कतराता है क्योंकि वहां रक्षक ही भक्षक बनकर बैठे हैं। अलका पाल ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया गया है और उसका उपयोग विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे उन आंकड़ों को सार्वजनिक करें जिसमें पुलिस ने आम जनता की मदद की हो, न कि सत्ता के इशारे पर निर्दोषों को प्रताड़ित किया हो।
युवाओं के सबसे बड़े दर्द को आवाज देते हुए अलका पाल ने पेपर लीक और नौकरी घोटाले को लेकर सरकार की ईंट से ईंट बजाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हजारों युवा सालों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन अंत में पता चलता है कि पेपर पहले ही बिक चुका है। हाकम सिंह जैसे किरदारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार नौकरी बेचने के मामले में वाकई ‘धुरंधर’ साबित हुई है। नौकरी घोटाले ने उत्तराखंड के एक पूरे दशक के युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। अलका पाल ने सवाल उठाया कि जब सचिवालय से लेकर छोटे विभागों तक में बैकडोर एंट्री और घोटालों की भरमार हो, तो रक्षा मंत्री किस मुंह से इस सरकार की तारीफ कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह ‘धुरंधर’ सरकार केवल अपने चहेतों को रेवड़ियाँ बांटने में माहिर है और आम गरीब का बेटा आज भी नौकरी के इंतजार में ओवरऐज हो रहा है।
भ्रष्टाचार की जड़ों को और गहरा बताते हुए महानगर अध्यक्ष ने कमीशन खोरी और कालाबाजारी को सरकार का मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि राशन से लेकर सड़क निर्माण तक हर चीज में फिक्स कमीशन का खेल चल रहा है, जिसके कारण जनता को घटिया सुविधाएं मिल रही हैं और सरकारी खजाना खाली हो रहा है। बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी चरम पर है और महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार ‘ऑल इज वेल’ का नारा लगाकर जश्न मना रही है। अलका पाल ने कटाक्ष किया कि राजनाथ सिंह जी ने जिस सरकार को चार साल बेमिसाल बताया है, उसने असल में भ्रष्टाचार के मामले में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के बड़े पदों पर बैठे लोग जनता के टैक्स के पैसे से अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं और विकास के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
पहाड़ी अस्मिता और संस्कृति के साथ हो रहे खिलवाड़ पर अलका पाल का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पहाड़ी उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज पहाड़ का मूल निवासी अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि बाहरी लोग यहां की संपत्तियों पर कब्जा कर रहे हैं। भू-कानून और मूल निवास जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की टालमटोल वाली नीति ने पहाड़ के लोगों के बीच भारी असंतोष पैदा किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि के लोग सीधे-साधे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि सरकार उनके अधिकारों का हनन करे। अलका पाल ने कहा कि सट्टा और जुआ जैसे अपराधों को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो रहा है। उनके अनुसार, यह सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों की सरकार है और पहाड़ के किसानों-मजदूरों से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
अपने संबोधन के अंत में अलका पाल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनता अब जाग चुकी है और वह इन खोखली उपाधियों के बहकावे में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नैनीताल से लेकर धारचूला तक इस सरकार की 14 बड़ी नाकामियों को लेकर जन-आंदोलन खड़ा करेगी। अलका पाल ने संकल्प दोहराया कि जब तक देवभूमि को इन घोटालों और अपराधों से मुक्ति नहीं मिल जाती, तब तक कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता चैन से नहीं बैठेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि वे ‘धुरंधर’ होने के मुगालते से बाहर निकलें और उन 14 सवालों के जवाब दें जो आज हर उत्तराखंडी के दिल में हैं। नैनीताल के इस दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा भले ही जश्न मना रही हो, लेकिन कांग्रेस ने अलका पाल के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ एक ऐसा मोर्चा खोल दिया है जो 2027 के चुनावों तक थमने वाला नहीं है।





