रामनगर। उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवनधारा माँ गंगा की अविरलता एवं निर्मलता को अक्षुण्ण बनाए रखने के संकल्प के साथ रामनगर स्थित पी एन जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उत्साह का एक नया ज्वार देखा जा रहा है। संस्थान की नमामि गंगे इकाई द्वारा आयोजित विशेष ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ (16 मार्च से 31 मार्च 2026) अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच चुका है, जिसके अंतर्गत आज दिनांक 28/03/26 को एक अत्यंत प्रभावशाली और बौद्धिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का सफल संपादन किया गया। पिछले 13 दिनों से महाविद्यालय परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में स्वच्छता की अलख जगा रहे इस अभियान के तहत ‘गंगा की स्वच्छता हमारी जिम्मेदारी’ विषय पर एक उच्च स्तरीय भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता ने न केवल छात्रों की वाकपटुता को एक मंच प्रदान किया, बल्कि राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रति उनके उत्तरदायित्वों और भावनात्मक जुड़ाव को भी प्रखरता के साथ समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की गूँज पूरे रामनगर क्षेत्र में सुनाई दे रही है, जहाँ युवा शक्ति ने अपनी आवाज़ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का एक नया अध्याय लिखने का साहसिक प्रयास किया है।
महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रो. एम सी पांडे ने इस गरिमामयी आयोजन की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया और इस मुहिम को जन-जागरूकता की दृष्टि से एक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि गंगा हमारे लिए मात्र एक जलधारा या भूगोल का हिस्सा नहीं है, अपितु यह हमारी हज़ारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब है। प्रो. पांडे ने कहा कि स्वच्छता पखवाड़ा जैसे अनुशासित और सुनियोजित आयोजन समाज में केवल प्रतीकात्मक संदेश नहीं देते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के मानस पटल पर संवेदनशीलता की ऐसी छाप छोड़ते हैं जो अंततः एक व्यापक और सकारात्मक सामाजिक बदलाव की सुदृढ़ नींव रखने में सहायक होती है। उनके अनुसार, जब युवा मस्तिष्क गंगा की पवित्रता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने लगता है, तभी वास्तविक अर्थों में पर्यावरण संरक्षण का स्वप्न धरातल पर साकार हो पाता है।

कार्यक्रम की कुशल सूत्रधार और नमामि गंगे इकाई की नोडल अधिकारी डॉ नीमा राणा ने इस अवसर पर प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके व्यापक उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विशिष्ट भाषण प्रतियोगिता का प्राथमिक ध्येय छात्रों के भीतर छिपी नेतृत्व क्षमता को उजागर करना और समाज के प्रत्येक वर्ग को स्वच्छता के प्रति न केवल सचेत करना है, बल्कि गंगा नदी के पुनरुद्धार में सक्रिय जनभागीदारी सुनिश्चित करना भी है। डॉ नीमा राणा ने गौरवपूर्ण शब्दों में उल्लेख किया कि युवाओं के कंधों पर ही देश का भविष्य टिका है और यदि वे ग्रामीण परिवेश तथा शहरी बस्तियों में स्वच्छता का संदेश लेकर अग्रसर होंगे, तो यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय और दूरगामी परिणाम देने वाली सिद्ध होगी। उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने गंगा की वर्तमान चुनौतियों, प्रदूषण के कारणों और समाधान के नवीन विकल्पों पर अपने मौलिक विचार रखे, जिससे कार्यक्रम की बौद्धिक गरिमा में चार चाँद लग गए।
इस विचारोत्तेजक और चेतना जागृत करने वाले समारोह में महाविद्यालय परिवार के वरिष्ठ सदस्यों एवं प्रबुद्ध शिक्षाविदों की उपस्थिति ने छात्रों के उत्साह को दोगुना कर दिया। कार्यक्रम में डॉ पुनीता कुशवाहा, डॉ ललित मोहन, डॉ सुरेश चंद्र, डॉ मुरली धर और डॉ रागिनी गुप्ता जैसे विद्वान प्राध्यापकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और स्वच्छता की इस पावन मुहिम को अपना समर्थन दिया। इसके साथ ही, छात्र शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए दीप्ती, रोहन विशाल, निर्मल सिंह, कुमकुम, रेखा, वर्षा, हिमानी, पदमा, प्रीति और माहि सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं इस आयोजन का हिस्सा बने। इन सभी प्रतिभागियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संकल्प लिया कि वे केवल इस पखवाड़े तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गंगा की स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे। महाविद्यालय परिसर आज युवाओं के जोश और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का केंद्र बना रहा, जो निश्चित रूप से उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक शुभ संकेत है।

स्वच्छता पखवाड़े के 13वें दिन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा और सकारात्मक सोच के साथ प्रयास किए जाएं, तो बड़ी से बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान संभव है। पी एन जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के इस प्रयास ने स्थानीय स्तर पर एक ऐसी लहर पैदा की है, जिससे न केवल गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रेरित होंगे, बल्कि संपूर्ण छात्र समुदाय एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका में स्वयं को स्थापित करेगा। भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं ने अपने शब्दों से यह सिद्ध कर दिया कि गंगा की स्वच्छता का मार्ग सरकारी फाइलों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत सजगता और हृदय की गहराई से निकलता है। इस आयोजन के समापन की ओर बढ़ते कदम अब एक नए संकल्प की ओर इशारा कर रहे हैं, जहाँ ‘नमामि गंगे’ का नारा केवल एक मिशन न रहकर प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत धर्म बन जाएगा, ताकि हमारी भावी पीढ़ियाँ भी गंगा की पवित्रता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।





