काशीपुर। नगर का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल उस समय अद्भुत दृश्य में बदल गया, जब मां मनसा देवी की 53वीं विशाल शोभायात्रा पूरे उत्साह और उमंग के साथ निकली। अष्टमी तिथि पर होने वाली यह शोभायात्रा न सिर्फ काशीपुर बल्कि पूरे उत्तर भारत में अपनी भव्यता और आकर्षण के लिए जानी जाती है। इस वर्ष शोभायात्रा की आधुनिकता के 53 वर्ष पूरे होने का विशेष अवसर रहा और नगर निगम काशीपुर के मेयर दीपक बाली मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे। आसमान में मंडराते बरसाती बादलों के बावजूद मां की आराधना और श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा और भक्तों ने झूमते-गाते मां के जयकारे लगाए। हर साल की तरह इस बार भी शोभायात्रा में शहरवासियों का भारी उत्साह देखने को मिला और गलियों से लेकर मुख्य मार्ग तक भक्तिमय वातावरण बना रहा।
शहर की परंपरा और आस्था से जुड़ी इस शोभायात्रा का इतिहास बेहद पुराना है। लगभग 150 वर्ष पूर्व मां मनसा देवी की प्रतिमा को शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर सिर पर टोकरी में रखकर निकाला जाता था। समय बीतने के साथ यह परंपरा बदलती गई और प्रतिमा को ठेले पर सजाकर ले जाया जाने लगा। आधुनिक दौर में प्रवेश करते ही झांकियों का स्वरूप शामिल हुआ और पिछले 52 वर्षों से शोभायात्रा में स्वचालित झांकियां हर साल बढ़ते हुए आकर्षण का हिस्सा बनती गईं। लंबे समय तक इस शोभायात्रा का नेतृत्व रमेश चंद्र शर्मा उर्फ खुट्टू मास्टर ने संभाला। उनके निधन के बाद उनके पुत्र विकास शर्मा खुट्टू ने जिम्मेदारी को आगे बढ़ाया। हालांकि इस वर्ष विकास शर्मा खुट्टू के देहांत के बाद उनके पुत्र आशीष शर्मा खुट्टू ने इस परंपरा की कमान अपने हाथों में ली और सफल आयोजन का नेतृत्व किया।

इस बार शोभायात्रा में पिछले वर्ष की तुलना में झांकियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। पिछले साल के मुकाबले 12 झांकियां अधिक रहीं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 106 तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी और शोभायात्रा में हर कोई इन झांकियों को देखने के लिए आतुर नजर आया। लाहौरियान स्थित मां मनसा देवी मंदिर से प्रारंभ हुई यह भव्य यात्रा मोहल्ला गंगेबाबा चौक, मोहल्ला किला, मुख्य बाजार, नगर निगम रोड, कोतवाली रोड, महाराणा प्रताप चौक, चीमा चौराहा, माता मंदिर रोड, रतन सिनेमा रोड, मुल्तानी मोड़, मुंशीराम चौक सहित कई मार्गों से होकर गुज़री। आधी रात तक यह यात्रा चामुंडा मंदिर पहुंचने के बाद पुनः मां मनसा देवी मंदिर लौटकर सम्पन्न हुई। इस दौरान हर गली और चौक पर भक्तों ने शोभायात्रा का स्वागत फूलों की वर्षा और जलपान से किया।
विभिन्न झांकियों ने इस आयोजन को और भी अधिक दिव्य और आकर्षक बना दिया। पानीपत से आई पंचमुखी हनुमान की झांकी श्रद्धालुओं का विशेष आकर्षण बनी। इसी तरह महाकाल बाबा, शेरावाली माता, नौ देवियों, राधा-कृष्ण, राम मंदिर, शेषनाग, क्षीरसागर में विष्णु-लक्ष्मी, राम दरबार, हनुमान, मां काली, मां सरस्वती, कृष्ण भगवान, शंकर भगवान और नृसिंह भगवान द्वारा हिरण्यकश्यप वध जैसे अद्भुत दृश्य लोगों को आध्यात्मिक अनुभव से भरते चले गए। वहीं, देश की शक्ति और सामर्थ्य का संदेश देने वाली ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल की झांकियों ने भी सबका ध्यान खींचा। इसके अलावा खाटू श्याम बाबा, गणेश भगवान और शिव-पार्वती की झांकियां भक्तों के बीच श्रद्धा का प्रतीक बनीं।
कलात्मकता और भक्ति से सजी इस यात्रा में न सिर्फ झांकियां बल्कि नृत्य और संगीत भी शामिल रहे। राधा-कृष्ण के भावपूर्ण नृत्य ने वातावरण को और भक्तिमय बना दिया। भोलेबाबा की डीजे झांकी और सीता हरण का दृश्य भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र रहा। इसके साथ ही बैंड-बाजे की गूंज, जागेश्वर का छोलिया नृत्य और महावीर अखाड़ा का प्रदर्शन भी लोगों को आकर्षित करता रहा। इस भव्य आयोजन में बहजोई, सोनीपत, रुद्रपुर, सहारनपुर और इटावा से आई झांकियों ने भी पूरे माहौल को रोशन कर दिया। हर दिशा से आती ढोल-नगाड़ों की गूंज ने शोभायात्रा की भव्यता को कई गुना बढ़ा दिया और लोगों ने मां के दरबार में झुककर आशीर्वाद प्राप्त किया।

काशीपुर की धरती पर निकली मां मनसा देवी की इस शोभायात्रा ने न सिर्फ आस्था और भक्ति की मिसाल पेश की बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी अद्वितीय उदाहरण सामने रखा। इस यात्रा ने साबित कर दिया कि समय चाहे कितना भी बदल जाए, श्रद्धा और परंपरा की डोर कभी कमजोर नहीं होती। झांकियों की रोशनी, भजनों की गूंज और भक्तों की भीड़ ने मिलकर एक ऐसा नजारा पेश किया जिसे देखने के लिए दूर-दूर से आए लोग धन्य हो गए। श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक शोभायात्रा नहीं बल्कि मां मनसा देवी के दरबार में समर्पण और विश्वास का महापर्व बताया। ऐसी विशालता और भव्यता के बीच काशीपुर एक दिन के लिए सचमुच आस्था का अद्भुत तीर्थ बन गया।



