काशीपुर। आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक वैभव के अद्भुत संगम के रूप में पहचाने जाने वाले काशीपुर के ऐतिहासिक “चैती मेले” का आज मां बाल सुंदरी देवी मंदिर प्रांगण में भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर नैनीताल-उधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अजय भट्ट की मौजूदगी में ध्वज पताका फहराकर मेले की शुरुआत की गई, जिसके साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्सव और भक्ति का माहौल छा गया। उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल इस मेले का आयोजन हर वर्ष चौत्र मास की प्रथम नवरात्रि से किया जाता है और यह करीब एक महीने तक निरंतर चलता है। इस बार भी आयोजन को लेकर पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं, जिससे उद्घाटन समारोह को भव्य और सुव्यवस्थित रूप दिया जा सके। मंदिर परिसर में जैसे ही ध्वजारोहण हुआ, “जय मां बाल सुंदरी” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा और श्रद्धालुओं की आस्था अपने चरम पर दिखाई दी। इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से यहां पहुंचे और मां के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया, जिससे पूरे नगर में धार्मिक उल्लास की लहर दौड़ गई और बाजारों से लेकर गलियों तक मेले की चर्चा तेज हो गई।
विधिवत पूजा-अर्चना के साथ आयोजित इस शुभारंभ कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट के अलावा मंदिर के मुख्य पुजारी पांडा परिवार के सदस्य, पूर्व सांसद के सिंह बाबा के पुत्र एन सी सिंह, महापौर दीपक बाली और विधायक त्रिलोक सिंह चीमा सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने मिलकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर मेले की शुरुआत को औपचारिक स्वरूप दिया। जैसे ही वैदिक मंत्रों के बीच पूजन की प्रक्रिया आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती गई और मंदिर प्रांगण पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया। परंपराओं के अनुसार यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है। आयोजन स्थल को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से इस तरह सुसज्जित किया गया था कि हर ओर भव्यता का दृश्य नजर आ रहा था। झोलिया नृत्य की थाप ने इस आयोजन को और अधिक जीवंत बना दिया और स्थानीय लोक संस्कृति की छटा बिखेर दी, जिससे उपस्थित लोगों में विशेष उत्साह और आनंद का संचार हुआ।

परंपरा और विरासत की निरंतरता को बनाए रखते हुए इस मेले के शुभारंभ में राजपरिवार की उपस्थिति भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। पूर्व सांसद के सिंह बाबा के पुत्र एन सी सिंह ने अपने परिवार की परंपरा का निर्वहन करते हुए इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। मां बाल सुंदरी को कुल देवी मानने वाले इस परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार हर वर्ष उनके परिवार का प्रतिनिधि इस मेले के उद्घाटन में शामिल होता है और उसी परंपरा को इस बार भी पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाया गया। मंदिर के मुख्य पांडा विकास अग्निहोत्री ने विधि-विधान के अनुसार पूजन संपन्न कराया और उपस्थित श्रद्धालुओं को इस आयोजन के धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ध्वजारोहण के साथ मेले की शुरुआत करना अत्यंत शुभ माना जाता है और यह परंपरा क्षेत्र की आस्था का प्रमुख आधार है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन माँ के दरबार में उपस्थित होकर पूजा करने से पूरे वर्ष सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है तथा परिवार में खुशहाली का वास होता है।
प्रशासन की ओर से भी इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। मेला अधिकारी अभय प्रताप सिंह ने सभी श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए अधिक से अधिक संख्या में मेले में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह, ने बताया कि सुरक्षा, साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं को भी पूरी तरह से सक्रिय रखा गया है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके और किसी भी श्रद्धालु को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उद्घाटन अवसर पर सांसद अजय भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि काशीपुर का चैती मेला उत्तर भारत की आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जो वर्षों से लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मां बाल सुंदरी की कृपा से यह आयोजन हर साल और अधिक भव्य होता जा रहा है और इसमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में मेले में शामिल होकर माँ का आशीर्वाद प्राप्त करें और क्षेत्र की उन्नति के लिए प्रार्थना करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
वहीं विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने कहा कि चैती मेला काशीपुर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है और यह आयोजन वर्षों से यहां की परंपराओं को जीवित रखे हुए है। उन्होंने कहा कि इस मेले के माध्यम से समाज में आपसी भाईचारा और एकता का संदेश मिलता है। विधायक ने प्रशासन और आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे इस आयोजन की भव्यता और अधिक बढ़ेगी और लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी प्राप्त होगा, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से जुड़ सकेगी।
महापौर दीपक बाली ने इस अवसर पर कहा कि चैती मेला काशीपुर के गौरव और परंपरा का प्रतीक है, जो शहर की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा मेले के दौरान साफ-सफाई, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लें और शहर की इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। महापौर ने यह भी कहा कि इस मेले को और अधिक भव्य और आकर्षक बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और भविष्य में इसे और बेहतर स्वरूप देने की दिशा में योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

इस भव्य आयोजन के दौरान पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, भाजपा के जिलाध्यक्ष काशीपुर मनोज पाल, प्रदेश प्रवक्ता गुरविंदर सिंह चंडोक, प्रदेश महामंत्री ओबीसी मोर्चा रवि पाल, पूर्व मेयर ऊषा चौधरी, खिलेंद्र चौधरी, मुक्ता सिंह, जिला महामंत्री सुशील शर्मा, जिला महामंत्री अमित सिंह, मंडल अध्यक्ष अर्जुन सिंह, मंडल अध्यक्ष बृजेश पाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सहभागिता निभाई और मां बाल सुंदरी के दरबार में क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही और हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए उत्साहित नजर आया। कुल मिलाकर काशीपुर का यह ऐतिहासिक चैती मेला एक बार फिर अपनी भव्यता, आस्था और सांस्कृतिक गरिमा के साथ प्रारंभ हो चुका है, जो आने वाले दिनों में और भी आकर्षक स्वरूप में दिखाई देगा और उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा।





