काशीपुर। धार्मिक आस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना का सशक्त उदाहरण उस समय देखने को मिला जब नगर के रामलीला मैदान से महापौर दीपक बाली ने कांवरियों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध कराई गई दो बसों को हरिद्वार के लिए रवाना किया। सावन माह में शिव भक्ति के रंग में रंगे कांवरियों के चेहरों पर उत्साह और संतोष साफ झलक रहा था। महापौर ने इस अवसर पर कहा कि शिव भक्तों की यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा स्वीकार्य नहीं होगी और नगर निगम द्वारा रोशनी, स्वच्छता, यातायात तथा सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं पूरी मुस्तैदी से सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांवर यात्रा मार्ग में मांस और उससे संबंधित दुकानों को पूरी तरह बंद कराया जाएगा, ताकि धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे। रामलीला मैदान में मौजूद श्रद्धालुओं ने महापौर की इस पहल की खुले दिल से सराहना की और इसे सेवा व समर्पण का जीवंत प्रतीक बताया।
आज की इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि कई कांवरियों को हरिद्वार जाने के लिए बसें नहीं मिल पा रही थीं। ऐसे समय में बिना किसी किराये के दो बसें उपलब्ध कराए जाने से शिव भक्तों में जबरदस्त खुशी देखने को मिली। कांवरियों ने कहा कि लंबी और कठिन यात्रा में जब साधन की चिंता दूर हो जाए तो भक्ति और आस्था और अधिक मजबूत हो जाती है। महापौर दीपक बाली द्वारा अपने निजी खर्च पर यह सुविधा उपलब्ध कराना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इससे पहले भी पिछले वर्ष उन्होंने इसी प्रकार दो बसें कांवरियों के लिए रवाना कराई थीं, जिसे अब एक निरंतर चलने वाली सेवा परंपरा के रूप में देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना था कि इस प्रकार की पहल से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी प्रेरणा मिलती है।

इन बसों की व्यवस्था को सफल बनाने में महापौर प्रतिनिधि समरपाल सिंह चौधरी की भूमिका उल्लेखनीय रही। बीते कई दिनों से वे लगातार तैयारियों में जुटे हुए थे। उन्होंने कुल एक सौ चार कांवरियों का पंजीकरण कराया और 52-52 सीटर दो बसों की व्यवस्था सुनिश्चित की। प्रत्येक कांवरी का नाम, यात्रा विवरण और आवश्यक जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज की गई, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की असुविधा न हो। बसों के रवाना होने से पहले सभी यात्रियों को जलपान कराया गया, फूल मालाएं पहनाई गईं और शुभकामनाओं के साथ विदा किया गया। जैसे ही बसें आगे बढ़ीं, “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा। इस भावनात्मक माहौल ने उपस्थित हर व्यक्ति को शिव भक्ति की अनुभूति से भर दिया।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता ईश्वर चंद्र गुप्ता, भाजपा प्रकोष्ठ अध्यक्ष मुकेश चावला, राजीव अरोरा, बच्चू, जसवीर सिंह सैनी, प्रकाश नेगी, अवनीश चौहान, अभिताभ सक्सेना एडवोकेट सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में इस पहल को समाजहित में उठाया गया सराहनीय कदम बताया। उपस्थित नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से व्यवस्थाएं बेहतर होती हैं और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बढ़ता है। कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था का वातावरण देखने को मिला, जहां नगर निगम के कर्मचारियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर जिम्मेदारियां निभाईं। हर चेहरे पर संतोष और गर्व की झलक दिखाई दे रही थी कि काशीपुर से निकली यह सेवा यात्रा शिव भक्तों के लिए सुखद और सुरक्षित बनेगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान महापौर दीपक बाली ने कहा कि सनातन परंपरा में भक्ति और सेवा भाव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि शिव भक्त लगभग 180 किलोमीटर की कठिन यात्रा पैदल तय करते हैं, ऐसे में उनका दायित्व बनता है कि नगर की ओर से उन्हें हर संभव सुविधा दी जाए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कुल तीन बसों की व्यवस्था की गई है, जिनमें से दो बसें आज रवाना हुई हैं और एक बस अगले दिन भेजी जाएगी। उनका कहना था कि सेवा के इस मार्ग पर चलते हुए कहीं न कहीं शिव का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है। महापौर ने दो टूक कहा कि कांवर यात्रा के दौरान नगर निगम की पूरी टीम सतर्क रहेगी और किसी भी समस्या को तुरंत हल किया जाएगा।
नगर निगम की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है और सफाई के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिव भक्तों के लौटने तक यह व्यवस्थाएं लगातार जारी रहेंगी। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भुवनेश्वर फार्म क्षेत्र में परिषद द्वारा लगाया गया बड़ा भंडारा कांवरियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है, जहां गंगा जल, भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। नगर निगम की टीम वहां सुबह से ही सफाई और अन्य प्रबंधों में जुटी हुई है। इस समन्वित प्रयास का उद्देश्य यही है कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।

शहर के माहौल में इन दिनों भक्ति और उत्सव का रंग साफ दिखाई दे रहा है। कांवरियों की आवाजाही, भजन-कीर्तन और शिव नाम के जयकारों से काशीपुर की गलियां जीवंत हो उठी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और प्रशासन की सक्रियता से शांति और व्यवस्था बनी हुई है। महापौर द्वारा मांस की दुकानों को बंद कराने के निर्णय को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। व्यापारियों ने सहयोग का आश्वासन दिया है, ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। इस निर्णय से यह संदेश गया है कि प्रशासन सभी समुदायों की आस्था का सम्मान करते हुए संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांवरियों की प्रतिक्रिया भी इस पूरी व्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक रही। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं आगे बढ़कर सुविधा उपलब्ध कराते हैं तो यात्रा का अनुभव और भी यादगार बन जाता है। बिना किराये बस मिलने से न केवल आर्थिक बोझ कम हुआ, बल्कि यात्रा की चिंता भी दूर हुई। कांवरियों ने महापौर दीपक बाली और उनकी टीम का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रकार की सेवाएं सच्चे अर्थों में शिव भक्ति का रूप हैं। उनके अनुसार, सेवा और समर्पण के बिना भक्ति अधूरी है, और काशीपुर से मिली यह सुविधा उसी भावना को मजबूत करती है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी नगर निगम और संबंधित विभाग पूरी तरह सतर्क हैं। यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता और आपात सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। महापौर ने स्पष्ट किया कि यदि यात्रा के दौरान किसी भी स्थान पर कठिनाई आती है तो तुरंत समाधान किया जाएगा। इसके लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं भी सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लौटने वाले कांवरियों के स्वागत और उनकी सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा से निभाया जाएगा।
समापन की ओर बढ़ते हुए, यह कहा जा सकता है कि काशीपुर से हरिद्वार तक की यह यात्रा केवल दूरी तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और आस्था का संगम बन गई है। महापौर दीपक बाली की पहल ने यह साबित किया है कि जनप्रतिनिधि यदि संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करें तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। शिव भक्तों के चेहरे पर दिख रही मुस्कान और संतोष इस बात का प्रमाण है कि यह प्रयास सफल रहा। आने वाले दिनों में भी ऐसी ही व्यवस्थाओं के साथ कांवर यात्रा शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण रूप से संपन्न हो, यही सभी की कामना है।





