काशीपुर। शहर में 17 मार्च का दिन एक खास और प्रेरणादायक प्रयोग का साक्षी बनने जा रहा है, जब जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की कक्षा दसवीं की छात्रा आन्या मेहरोत्रा पूरे दिन के लिए शहर के महापौर दीपक बाली के साथ रहकर नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझेंगी। यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों को प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आमतौर पर बच्चे किताबों में ही प्रशासन और राजनीति के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन इस पहल के माध्यम से एक छात्रा को वास्तविक परिस्थितियों में नगर प्रशासन की गतिविधियों को देखने और समझने का अवसर मिलेगा। शहर में इस खबर के सामने आने के बाद लोगों में उत्सुकता भी दिखाई दे रही है, क्योंकि किसी छात्रा को इस प्रकार सीधे महापौर की दिनचर्या के साथ जोड़ना अपने आप में एक अलग और सकारात्मक पहल मानी जा रही है। नगर निगम में आयोजित एक बातचीत के दौरान महापौर दीपक बाली, स्कूल प्रबंधन और छात्रा आन्या मेहरोत्रा ने मीडिया से संवाद करते हुए इस पहल की पूरी जानकारी साझा की और बताया कि यह प्रयोग बच्चों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
नगर निगम कार्यालय में हुई इस बातचीत के दौरान महापौर दीपक बाली ने बताया कि कुछ दिन पहले जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल मधुमिता बनर्जी, स्कूल प्रबंधन से जुड़ी ऋषिता सक्सेना अग्रवाल और छात्रा आन्या मेहरोत्रा उनसे मिलने आई थीं। उस मुलाकात के दौरान स्कूल प्रबंधन ने बताया कि आन्या मेहरोत्रा नगर प्रशासन के कार्यों को लेकर काफी उत्सुक हैं और वह यह जानना चाहती हैं कि एक महापौर दिनभर में किस प्रकार के कार्य करता है, लोगों की समस्याओं को कैसे सुनता है और शहर के विकास से जुड़े फैसले किस प्रकार लिए जाते हैं। महापौर दीपक बाली ने बताया कि जब यह प्रस्ताव उनके सामने रखा गया तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इसे स्वीकार कर लिया, क्योंकि उनके अनुसार बच्चों को कम उम्र में ही समाज और प्रशासन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए हर दिन समान रूप से काम से भरा होता है और वह सुबह से लेकर देर रात तक शहर के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करते हैं। इसलिए उन्होंने स्कूल प्रबंधन से कहा कि वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन का चयन कर सकते हैं। इसके बाद 17 मार्च का दिन तय किया गया, जब आन्या मेहरोत्रा महापौर के साथ रहकर पूरे दिन की गतिविधियों को देख सकेंगी और समझ सकेंगी कि नगर प्रशासन वास्तव में किस प्रकार काम करता है।
महापौर दीपक बाली ने इस पहल को युवाओं को प्रेरित करने वाला कदम बताते हुए कहा कि आज की पीढ़ी में नेतृत्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी कम उम्र में ही प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को समझते हैं तो उनमें समाज और देश के लिए कुछ करने की भावना मजबूत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब आन्या ने उनसे कहा कि वह एक दिन के लिए महापौर बनकर देखना चाहती हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वह केवल एक दिन की महापौर बनने की बात न सोचें, बल्कि भविष्य में स्थायी रूप से महापौर, विधायक या सांसद बनने का सपना देखें। दीपक बाली ने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए पढ़े-लिखे और जागरूक युवाओं का राजनीति और प्रशासन में आना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देश और प्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यदि नई पीढ़ी इस प्रक्रिया को समझने और इसमें भागीदारी निभाने के लिए आगे आती है तो यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उनके अनुसार यह पहल केवल एक छात्रा के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और प्रशासनिक समझ भी उतनी ही जरूरी है।
इस अवसर को लेकर छात्रा आन्या मेहरोत्रा ने भी अपनी उत्सुकता और भावनाएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा से यह जानने की जिज्ञासा रही है कि प्रशासनिक व्यवस्था वास्तव में कैसे काम करती है और एक जनप्रतिनिधि के सामने किस प्रकार की चुनौतियां आती हैं। आन्या ने कहा कि उन्होंने कई बार महापौर दीपक बाली को लोगों की समस्याओं का समाधान करते हुए देखा है और इसी कारण से वह उनकी कार्यशैली से काफी प्रभावित हुईं। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपने स्कूल की शिक्षिकाओं और प्रिंसिपल से यह इच्छा व्यक्त की कि यदि संभव हो तो उन्हें एक दिन के लिए महापौर के साथ रहने का अवसर दिया जाए। उन्होंने बताया कि जब स्कूल प्रबंधन ने उनकी इस इच्छा को गंभीरता से लिया और महापौर से अनुमति लेकर यह अवसर उपलब्ध कराया तो उन्हें बहुत खुशी हुई। आन्या ने कहा कि यह उनके जीवन का एक अनमोल अनुभव होगा, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक कार्यों को किताबों में पढ़ने के बजाय वास्तविक रूप में देखने और समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस अवसर को लेकर वह काफी उत्साहित हैं, हालांकि थोड़ी घबराहट भी महसूस कर रही हैं क्योंकि इस तरह का अनुभव हर किसी को नहीं मिलता।
आन्या मेहरोत्रा ने बताया कि 17 मार्च को वह सुबह से ही महापौर दीपक बाली के साथ रहेंगी और उनकी पूरी दिनचर्या को करीब से देखेंगी। वह उनके साथ नाश्ता करेंगी, नगर निगम कार्यालय जाएंगी, विभिन्न बैठकों में शामिल होंगी और शहर में चल रहे विकास कार्यों तथा कार्यक्रमों में भी उपस्थित रहेंगी। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे दिन को एक सीखने के अवसर के रूप में देख रही हैं और इस दौरान केवल अवलोकन करेंगी कि एक महापौर किस प्रकार अपने कार्यों का संचालन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि महापौर के साथ रहकर वह यह समझने की कोशिश करेंगी कि शहर की समस्याओं को हल करने के लिए किस तरह निर्णय लिए जाते हैं और प्रशासनिक प्रक्रिया किस प्रकार काम करती है। आन्या का कहना है कि इस अनुभव से उन्हें भविष्य में अपने करियर के बारे में सोचने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे अनुभव को वह बाद में अपने स्कूल में अपने सहपाठियों के साथ साझा करेंगी ताकि अन्य विद्यार्थियों को भी प्रशासन और जनसेवा के क्षेत्र के बारे में जानकारी मिल सके।
इस पहल के पीछे स्कूल प्रबंधन की सोच को स्पष्ट करते हुए जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल मधुमिता बनर्जी ने बताया कि स्कूल में 27 जनवरी को एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था, जिसमें महापौर दीपक बाली मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उसी कार्यक्रम में आन्या मेहरोत्रा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उनकी जिज्ञासा और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने यह महसूस किया कि उन्हें कोई ऐसा अनुभव दिया जाए जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया और मजबूत हो सके। इसी विचार के तहत यह योजना बनाई गई कि आन्या को एक दिन के लिए महापौर के साथ रहने का अवसर दिया जाए। मधुमिता बनर्जी ने कहा कि बच्चों को केवल पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और देश के लिए काम करने की प्रेरणा भी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी कम उम्र में ही प्रशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना शुरू कर दें तो वे भविष्य में अधिक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। स्कूल प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार के प्रयोग विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महापौर दीपक बाली ने अपनी दिनचर्या का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका दिन सामान्यतः सुबह साढ़े सात बजे से शुरू हो जाता है। इस दौरान वह नगर निगम के विभिन्न विकास कार्यों और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हैं। कई योजनाओं की डीपीआर तैयार की जा रही होती है या पहले से स्वीकृत परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया जाता है। इसके बाद वह नगर निगम कार्यालय पहुंचते हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर उनसे मिलने आते हैं। जनता की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश देना उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा दिनभर विभिन्न बैठकों, कार्यक्रमों और विकास कार्यों की समीक्षा में उनका समय व्यतीत होता है। उन्होंने कहा कि 17 मार्च को भी उनकी दिनचर्या सामान्य दिनों की तरह ही रहेगी, फर्क सिर्फ इतना होगा कि आन्या मेहरोत्रा उनके साथ रहेंगी और इस पूरी प्रक्रिया को करीब से देखेंगी।
महापौर दीपक बाली ने यह भी कहा कि बेटियों के प्रति उनके मन में विशेष सम्मान और संवेदनशीलता है। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलना बेहद जरूरी है और यदि कोई बेटी नेतृत्व या प्रशासन को समझने की इच्छा लेकर आगे आती है तो उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बेटी उन्हें अपनी बेटी जैसी लगती है और वह हमेशा कोशिश करते हैं कि बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर मिले। उन्होंने यह भी कहा कि नवरात्रि का समय आने वाला है, जब हम सभी देवी शक्ति की पूजा करते हैं और बेटियों को देवी का स्वरूप मानते हैं। ऐसे में यदि कोई बेटी समाज और प्रशासन को समझने की इच्छा व्यक्त करती है तो यह एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आन्या जैसी छात्राओं को देखकर उन्हें विश्वास होता है कि आने वाले समय में पढ़े-लिखे और जागरूक युवा समाज और देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
काशीपुर में शुरू हुई यह पहल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि नई पीढ़ी को प्रशासन और जनसेवा से जोड़ने की दिशा में एक प्रेरक प्रयास मानी जा रही है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की छात्रा आन्या मेहरोत्रा के लिए भी यह दिन जीवन का एक यादगार अनुभव बनने वाला है। एक दिन तक महापौर दीपक बाली के साथ रहकर वह नगर निगम की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों और शहर के विकास से जुड़े फैसलों को करीब से समझेंगी। प्रशासनिक व्यवस्था को इतने करीब से देखने का यह अवसर शायद उनके जीवन की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खुद आन्या मेहरोत्रा भी इस मौके को लेकर उत्साहित हैं और मानती हैं कि यह अनुभव उन्हें भविष्य में समाज और देश के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देगा। अब पूरे शहर की निगाहें भी इस बात पर टिकी हैं कि 17 मार्च का यह खास दिन जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की छात्रा आन्या मेहरोत्रा के लिए किस तरह का अनुभव लेकर आता है।





