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मंडी में रिश्वतखोरी की गूंज के बाद मंडी परिषद सख्त, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

काशीपुर। उत्तराखंड की कृषि मंडियों में बढ़ती अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं। काशीपुर मंडी समिति में हालिया विजिलेंस कार्रवाई ने सरकार और विभागों को झकझोर कर रख दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती की राह पर बढ़ती धामी सरकार के निर्देशों पर अब उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच की बागडोर तीन सदस्यीय समिति को सौंप दी है। यह कमेटी पंद्रह दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी, ताकि मंडियों में पनप रहे भ्रष्ट नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके। विजिलेंस ने दो दिन पूर्व काशीपुर मंडी समिति के प्रभारी सचिव को ₹1.20 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया था, जिससे मंडी परिषद की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। इसी घटना को आधार बनाते हुए अब जांच का दायरा और भी बड़ा किया जा रहा है, जिससे सभी जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो सके।

मंडी परिषद के अध्यक्ष अनिल कपूर डब्बू ने स्पष्ट शब्दों में दो टूक कहा है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, लापरवाही या भ्रष्ट गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि विजिलेंस द्वारा पकड़े गए अधिकारी के खिलाफ विस्तृत जानकारी एकत्र की जा रही है और मंडी परिषद अपने स्तर से भी उसकी भूमिका की गहन छानबीन करेगा। उनका यह भी कहना है कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करते हुए अब मंडियों में व्याप्त धांधलियों की परतें एक-एक कर खोली जाएंगी। भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी कर्मचारी या अधिकारी जांच में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। काशीपुर की घटना ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि मंडी तंत्र के भीतर लंबे समय से धांधली का खेल खेला जा रहा था, जिसे अब सरकार और मंडी परिषद दोनों मिलकर खत्म करने को आतुर हैं।

विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार किए गए अधिकारी के बारे में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक, यह अधिकारी 15-20 वर्षों तक मंडी में बतौर अकाउंटेंट काम कर चुका है और महज दो महीने पूर्व ही इसे प्रभारी सचिव का दायित्व सौंपा गया था। इतने लंबे अनुभव के बावजूद, इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होना यह दर्शाता है कि मंडियों में आंतरिक तंत्र पूरी तरह से जवाबदेही से मुक्त था। सबसे हैरत की बात यह है कि जिस अधिकारी को बहुत जल्द सेवानिवृत्त होना था, उसने भी अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में भ्रष्टाचार का सहारा लेने से परहेज नहीं किया। ऐसे में, मंडी परिषद ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच समिति को निर्देश दिए हैं कि वह न सिर्फ इस एक मामले को, बल्कि इससे जुड़े अन्य संभावित भ्रष्टाचार के बिंदुओं को भी अपनी जांच के दायरे में लाए।

इधर मंडी परिषद ने भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई ठोस निर्णय लिए हैं। अनिल कपूर डब्बू ने बताया कि राज्य की समस्त कृषि मंडियों का समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाएगा और जिन स्थानों पर किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही पाई जाएगी, वहां मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण की यह प्रक्रिया नियमित रहेगी ताकि मंडी के हर कर्मचारी और अधिकारी को यह स्पष्ट संकेत मिल सके कि अब जवाबदेही से बचने का कोई विकल्प नहीं बचा है। मंडियों के आंतरिक कार्यकलापों में पारदर्शिता लाना और किसानों व व्यापारियों को ईमानदारी से सेवाएं देना मंडी परिषद की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, इसी सोच को अब धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी गई है।

काशीपुर मंडी की घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भ्रष्टाचार जड़ से उखाड़ने के लिए केवल सतही कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसके पीछे छिपे तंत्र को उजागर कर, उसके खिलाफ निर्णायक कदम उठाने होते हैं। इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए मंडी परिषद ने यह ठान लिया है कि चाहे कितने ही प्रभावशाली या वरिष्ठ अधिकारी क्यों न हों, यदि वे जांच के घेरे में आए, तो उन्हें किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। जांच समिति के सदस्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता से अपनी रिपोर्ट तैयार करें और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को पूरी ईमानदारी से उजागर करें। इस कार्रवाई से एक मजबूत संदेश यह भी गया है कि अब मंडियों में चलने वाला श्रिश्वत तंत्रश् ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएगा।

अब सबकी निगाहें इस जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसकी प्रस्तुति अगले पंद्रह दिनों में की जाएगी। रिपोर्ट के बाद मंडी परिषद आगे की कार्यवाही की दिशा तय करेगा, जिसमें निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक के कदम शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार की ओर से भी संकेत मिल रहे हैं कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले की गहन जांच के लिए विजिलेंस को और अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। फिलहाल इतना तो तय है कि काशीपुर की इस घटना ने उत्तराखंड की मंडियों में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को हिलाकर रख दिया है और अब उसे उखाड़ फेंकने का संकल्प तेजी से क्रियान्वित हो रहा है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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