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“भाजपा से बाहर होंगे अरविंद पांडेय”, काशीपुर प्रेस वार्ता में नेताओं का बड़ा दावा।

"सियासी भूचाल: अपनों की बगावत ने हिलाया विधायक का सिंहासन; भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के सनसनीखेज खुलासों ने उड़ाई संगठन की नींद, अब 'यूज एंड थ्रो' की राजनीति का होगा अंत और शुरू होगा निष्कासन का काउंटडाउन!"

काशीपुर। उत्तराखंड की देवभूमि में राजनीतिक सरगर्मियां उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गईं जब ऊधमसिंह नगर जिले के कद्दावर नेताओं ने अपनी ही पार्टी के सिटिंग विधायक के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया। काशीपुर की धरती पर आयोजित एक बेहद संवेदनशील और विस्फोटक प्रेस वार्ता के माध्यम से गदरपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश कांबोज और वरिष्ठ भाजपा नेता सुखदेव सिंह नामधारी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान विधायक अरविंद पांडेय पर आक्रमण करते हुए उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए। इन नेताओं ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया कि अरविंद पांडेय की कार्यशैली और उनकी संदिग्ध गतिविधियां लगातार संगठन की गरिमा और राज्य सरकार की साख को बट्टा लगाने का काम कर रही हैं, जिसके चलते अब उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की पटकथा लगभग लिखी जा चुकी है। नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस भाजपा ने उन्हें शिखर तक पहुँचाया, उसी की जड़ों को वे भीतर रहकर खोखला करने का प्रयास कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए सुरेश कांबोज ने प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार की उपलब्धियों का गुणगान किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि संगठन के भीतर कुछ ऐसे “दीमक” लग चुके हैं जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं। उन्होंने अरविंद पांडेय के राजनीतिक चरित्र को “यूज एंड थ्रो” की संज्ञा देते हुए कहा कि पांडेय ने हमेशा अपनी सुविधा के अनुसार लोगों का इस्तेमाल किया और फिर उन्हें दरकिनार कर दिया। कांबोज ने दावा किया कि जसपुर से लेकर खटीमा तक भाजपा के भीतर ऐसे स्वार्थी तत्वों की पहचान करने का अभियान शुरू हो गया है जो पार्टी लाइन से हटकर निजी हितों को साध रहे हैं। आरोपों की फेहरिस्त में यह भी कहा गया कि विधायक का मुख्य कार्य कार्यकर्ताओं को एकजुट करना होता है, लेकिन अरविंद पांडेय ने हमेशा कार्यकर्ताओं को आपस में लड़ाने, गुटबाजी को हवा देने और चुनावी समर में माहौल को खराब करने का काम किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब समर्पित कार्यकर्ताओं का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे नेताओं के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल दिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस वक्त सनसनी फैल गई जब नेताओं ने अरविंद पांडेय पर भूमि कब्जे और भ्रष्टाचार के गंभीर आर्थिक आरोप जड़ दिए। सुखदेव सिंह नामधारी और सुरेश कांबोज ने दस्तावेजी प्रमाणों का हवाला देते हुए दावा किया कि विधायक और उनके करीबियों ने गदरपुर और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी भूमियों के साथ-साथ जनजातीय और आरक्षित वर्गों की जमीनों का नियम विरुद्ध तरीके से बंदरबांट किया है। उन्होंने विशेष रूप से सेमलपुरी क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त और नामांतरण में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है। नेताओं ने घोषणा की कि वे इस पूरे प्रकरण को साक्ष्यों के साथ जिलाधिकारी के सम्मुख रखेंगे और यदि प्रशासन ने त्वरित कठोर कार्रवाई नहीं की, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होंगे। उन्होंने मांग की कि विधायक और उनके परिजनों के नाम पर जितनी भी संपत्तियां हाल के वर्षों में अर्जित की गई हैं, उनकी उच्च स्तरीय जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

सुखदेव सिंह नामधारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कठोर और ऐतिहासिक निर्णयों जैसे समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त नकल विरोधी कानून और सामाजिक सम्मान की योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार इतना उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है, तब अपनी ही सरकार के विरुद्ध बयानबाजी करना राजनीतिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद पांडेय ने न केवल वर्तमान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, बल्कि कई महत्वपूर्ण चुनावों में पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशियों को हराने के लिए गुप्त रूप से विपक्षी खेमे की मदद भी की। नामधारी ने कहा कि संगठन के भीतर कई बार अरविंद पांडेय को समझाने और सुधारने की कोशिश की गई, लेकिन उनके व्यवहार में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं आया। अब स्थिति यह हो गई है कि वे भाजपा के समानांतर एक अलग शक्ति केंद्र बनाने का स्वप्न देख रहे हैं, जो कैडर आधारित पार्टी में कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता। नेताओं ने कहा कि ऐसे अहंकारी नेतृत्व के कारण पार्टी का जनाधार कमजोर हो रहा है और अब समय आ गया है कि उन्हें संगठन से मुक्त किया जाए।

प्रेस वार्ता के दौरान उस समय माहौल और भी गंभीर हो गया जब नेताओं ने विधायक पांडेय के पूर्व के मुकदमों और उनके आपराधिक इतिहास की ओर इशारा किया। वक्ताओं ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को समाज के लिए आदर्श होना चाहिए, लेकिन यहाँ स्थिति इसके ठीक विपरीत है। अरविंद पांडेय पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते हुए भी नियुक्तियों और विभागीय कार्यों में अपने चहेतों को लाभ पहुँचाया और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। सुरेश कांबोज ने कहा कि गदरपुर की जनता अब इस गुंडागर्दी और कब्जे वाली राजनीति से त्रस्त आ चुकी है और वे स्वयं को विधायक के चंगुल से मुक्त कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में विधायक की बढ़ती सक्रियता केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का एक नाकाम प्रयास है। नेताओं ने कहा कि भाजपा एक अनुशासित परिवार है जहाँ गद्दारी और स्वार्थ की कोई जगह नहीं है, और जो व्यक्ति पार्टी के अनुशासन को तोड़ने का साहस करेगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए इन वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में वे अरविंद पांडेय के खिलाफ और भी कई चौंकाने वाले खुलासे करेंगे, जिसमें उनके करीबियों द्वारा संचालित फर्जी संस्थानों और अवैध कारोबारों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं जो विधायक की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख देंगे। इस प्रेस वार्ता ने न केवल ऊधमसिंह नगर बल्कि पूरे उत्तराखंड की भाजपा राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जिससे पार्टी आलाकमान भी अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। वक्ताओं ने अंत में संकल्प दोहराया कि वे भाजपा को ऐसे “स्वार्थी” तत्वों से मुक्त कराकर ही दम लेंगे ताकि मुख्यमंत्री धामी के विकास के संकल्प को बिना किसी अवरोध के पूरा किया जा सके। इस तीखे हमले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधायक अरविंद पांडेय इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और भाजपा संगठन इस उभरते हुए आंतरिक विद्रोह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।

प्रेस वार्ता के समापन के उपरांत राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि क्या अरविंद पांडेय के दिन अब भाजपा में गिनती के रह गए हैं। सुखदेव सिंह नामधारी ने स्पष्ट किया कि सिख समाज और अन्य सभी वर्ग भाजपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं, लेकिन वे किसी ऐसे व्यक्ति का साथ नहीं देंगे जो उनके विश्वास के साथ खिलवाड़ करे। उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करने वाली और “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देने वाली पार्टी में अरविंद पांडेय जैसे “विभाजनकारी” नेता की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है। जसपुर से लेकर खटीमा तक के कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का यह प्रयास सीधे तौर पर पांडेय के प्रभुत्व को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, काशीपुर की यह प्रेस वार्ता उत्तराखंड भाजपा के भीतर चल रही एक बड़ी रार का आधिकारिक दस्तावेज बन गई है, जिसके परिणाम स्वरूप आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़े फेरबदल की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

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