देहरादून। उत्तराखण्ड कि की शांत वादियों में उस वक्त कोहराम मच गया और सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया, जब रोड रेज की एक मामूली सी चिंगारी ने रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की जान ले ली। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने न केवल उत्तराखंड की राजधानी को दहला दिया है, बल्कि दिल्ली तक सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जैसे ही इस जघन्य वारदात की खबर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची, उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। मुख्यमंत्री ने इस घटना को देवभूमि की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ी चुनौती माना और बिना किसी देरी के कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गहरी नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में कुठालगेट चौकी इंचार्ज और सब एक्साइज इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने पूरी पुलिस फोर्स में खलबली मचा दी है और अब शासन के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने देहरादून को अपराधियों से मुक्त करने के लिए ‘ऑपरेशन प्रहार’ का बिगुल फूंक दिया है, जो शहर की सड़कों पर पुलिस के खौफ को फिर से स्थापित करने का संकल्प है।
राजधानी देहरादून में बढ़ते अपराध और रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की हत्या के बाद उपजे जनाक्रोश को देखते हुए मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में एक बेहद हाई-प्रोफाइल और आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की कमान खुद डीजीपी दीपम सेठ ने संभाली, जहां उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। बैठक में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह जैसे दिग्गज पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। डीजीपी दीपम सेठ ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि अब ढुलमुल रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल की आपराधिक घटनाओं ने पुलिस की साख पर बट्टा लगाया है और अब वक्त है कि पुलिस अपनी सक्रियता से अपराधियों की कमर तोड़ दे। बैठक के दौरान एक-एक अपराधी की कुंडली खंगालने और शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने की रणनीति तैयार की गई, जिसमें पुलिस के विशेष दस्तों को सीधे तौर पर मैदान में उतरने के आदेश दिए गए हैं ताकि ‘ऑपरेशन प्रहार’ को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस बैठक में अधिकारियों की जिम्मेदारियां इस तरह निर्धारित की हैं कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे देहरादून की कानून-व्यवस्था की पल-पल की दैनिक मॉनिटरिंग खुद करेंगे और हर छोटी-बड़ी घटना की रिपोर्ट सीधे मुख्यालय भेजेंगे। वहीं, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल को अपने अधीनस्थ अधिकारियों की स्पष्ट टास्किंग करने और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने का टास्क दिया गया है। डीजीपी ने साफ कहा कि यदि किसी क्षेत्र में अपराध होता है, तो वहां के थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी को इसका जवाब देना होगा। ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया है कि क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी अब दफ्तरों में बैठने के बजाय स्वयं फील्ड में सक्रिय रहेंगे और चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की विजिबिलिटी को कई गुना बढ़ाएंगे। बैरियर्स पर सघन चेकिंग का दौर अब चौबीसों घंटे चलेगा, विशेष रूप से सुबह के समय जब अपराधी अक्सर वारदातों को अंजाम देकर भागने की फिराक में होते हैं, उस समय पुलिस बल की उपस्थिति और सतर्कता को चरम पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस ऑपरेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एसटीएफ को सौंपा गया है, जहां आईजी एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह को देहरादून में सक्रिय तमाम आपराधिक तत्वों के विरुद्ध एक विशेष और आक्रामक अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। एसटीएफ अब शहर के उन गुंडों और उपद्रवियों की सूची तैयार कर रही है जो बार-बार कानून तोड़ते हैं। डीजीपी दीपम सेठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि देहरादून में रहने वाले बाहरी व्यक्तियों और संदिग्धों की पहचान के लिए एक व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत पीजी और किरायेदारों का सघन सत्यापन किया जाना अनिवार्य है, ताकि कोई भी अपराधी छात्र या आम नागरिक के भेष में छिप न सके। साथ ही, होम-स्टे में संचालित होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की कड़ी निगरानी रहेगी। डीजीपी ने कड़े शब्दों में कहा कि निर्धारित समय के बाद संचालित हो रहे बार और पब्स को अब किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जो भी नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर कानून का ऐसा प्रहार होगा कि वह दोबारा सिर नहीं उठा पाएगा।
पब और बार संस्कृति के कारण बिगड़ते माहौल को देखते हुए एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने खुद कमान संभाली और मंगलवार को जनपद के सभी पब, बार और रेस्टोरेंट के मालिकों के साथ एक आपातकालीन गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में एसएसपी का तेवर काफी सख्त नजर आया और उन्होंने संचालकों को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि यदि कोई भी प्रतिष्ठान निर्धारित समयावधि के उपरान्त संचालित पाया गया, तो पुलिस अब चेतावनी नहीं देगी, बल्कि सीधे अभियोग पंजीकृत कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही, नियमों को ताक पर रखने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट भी तुरंत शासन को भेजी जाएगी। एसएसपी ने यह साफ कर दिया कि पुलिस अब किसी भी दबाव में नहीं आएगी और शहर की शांति भंग करने वाले इन अड्डों पर ताला लगाने में गुरेज नहीं करेगी। गौरतलब है कि इस गोष्ठी से ठीक एक दिन पहले पुलिस ने आकस्मिक छापेमारी के दौरान दो ऐसे रेस्टोरेंट संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया है जो समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से संचालन कर रहे थे, जो पुलिस के बदले हुए कड़े तेवरों का जीता-जागता सबूत है।
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने संचालकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले हर एक कर्मचारी का शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित करें। कर्मचारियों की पूरी सूची और उनका विवरण पुलिस को उपलब्ध कराना अब अनिवार्य होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी प्रतिष्ठान में कोई आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति काम न कर रहा हो। यदि किसी भी पब या बार में कोई विवाद होता है, तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस को देना संचालक की जिम्मेदारी होगी। एसएसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी प्रतिष्ठान में विवाद हुआ और संचालक ने पुलिस को सूचित नहीं किया, और उसके बाद कोई आपराधिक घटना घटित हुई, तो पुलिस उस संचालक को भी अपराधी का मददगार मानकर सख्त वैधानिक कार्रवाई करेगी। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सभी पब और रेस्टोरेंट के एंट्री तथा एग्जिट पॉइंट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पुलिस कंट्रोल रूम से सीधे यह निगरानी की जा सकेगी कि कौन सा बार समय के बाद खुला है और वहां किस तरह के लोग आ-जा रहे हैं।
देहरादून में अक्सर यह देखा गया है कि पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्र देर रात तक पबों में बैठे रहते हैं और वहां से नशे की हालत में निकलकर सड़कों पर अपनी गाड़ियों को मौत की रफ्तार से दौड़ाते हैं, जिससे न केवल उनकी जान को खतरा होता है बल्कि मासूम राहगीर भी दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। इसी कड़वे सच को ध्यान में रखते हुए एसएसपी ने बार मालिकों को हिदायत दी है कि वे किसी भी सूरत में निर्धारित समय के बाद किसी को भी प्रवेश न दें और न ही शराब परोसें। देहरादून में संचालित पब और बार की संख्या के मुकाबले पुलिस बल की कमी को स्वीकार करते हुए एसएसपी ने संचालकों से अपील की कि वे केवल व्यापार न देखें, बल्कि शहर के माहौल को सुधारने में पुलिस का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पुलिस अब हर गली में मौजूद नहीं रह सकती, इसलिए संचालकों को खुद अनुशासन बनाए रखना होगा। ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत अब देहरादून की सड़कों पर हुड़दंग मचाने वालों और कानून की धज्जियां उड़ाने वालों का समय समाप्त हो चुका है, क्योंकि पुलिस की अब केवल एक ही प्राथमिकता है—आमजन की सुरक्षा और अपराधियों का समूल नाश।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की हत्या ने जिस तरह से सरकार और पुलिस प्रशासन की साख को हिलाया है, उसका बदला अब ‘ऑपरेशन प्रहार’ के जरिए लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि देवभूमि की पावन धरती पर अपराध के लिए कोई स्थान नहीं है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब केवल एक जांच भर नहीं रह गया है, बल्कि यह देहरादून की जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि कानून का इकबाल आज भी बुलंद है। जिस तरह से पुलिस ने सत्यापन अभियान, पब-बार पर शिकंजा और सघन चेकिंग शुरू की है, उससे अपराधियों में दहशत का माहौल साफ देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने वाला है, जिसमें और भी कई बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। देहरादून पुलिस का यह ‘ऑपरेशन प्रहार’ न केवल ब्रिगेडियर जोशी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि यह उन सभी असामाजिक तत्वों के लिए एक अंतिम चेतावनी है जो शहर की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने का दुस्साहस करते हैं।





