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बाबा श्री मोटेश्वर महादेव के दरबार में उज्जैन महाकाल के मुख्य पुजारी करेंगे अद्भुत रौद्र श्रृंगार

काशीपुर। उज्जयनी नगरी पावन और ऐतिहासिक धरा पर स्थित बाबा श्री मोटेश्वर महादेव के प्राचीन शिवालय में आस्था का एक ऐसा महाकुंभ उमड़ने जा रहा है, जिसकी चमक और दिव्यता पूरे उत्तराखंड को शिवमय कर देगी। प्रति वर्ष की गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखते हुए, इस बार भी महादेव का वह दिव्य और भव्य श्रृंगार आयोजित होने जा रहा है, जिसकी प्रतीक्षा भक्त चातक की भांति पूरे वर्ष करते हैं। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विश्व प्रसिद्ध उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी अमर शर्मा जी स्वयं अपने कर-कमलों से बाबा का श्रृंगार करेंगे। उनके साथ उनके सुपुत्र और परंपराओं के संवाहक हर्ष शर्मा जी भी इस पुनीत कार्य में अपनी विशेषज्ञता और श्रद्धा का अर्पण करेंगे। काशीपुर वासियों के लिए यह किसी सौभाग्य से कम नहीं है कि साक्षात महाकाल की नगरी से चलकर विद्वान पुजारी इस सिद्धपीठ पर महादेव का अभिषेक और श्रृंगार करने पधार रहे हैं। इस आयोजन ने अभी से नगर में उत्सव जैसा वातावरण निर्मित कर दिया है, जहाँ हर गली और चौराहे पर केवल बाबा के आगामी रौद्र स्वरूप की चर्चा हो रही है।

धार्मिक आयोजन की इस विशाल श्रृंखला में अमत गुरु जी का समर्पण और कुशल मार्गदर्शन एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरा है। उनकी देखरेख में मंदिर समिति और स्थानीय भक्तगण दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं ताकि इस महा-आयोजन को भव्यता के नए शिखर पर पहुँचाया जा सके। बाबा श्री मोटेश्वर महादेव के इस विशेष श्रृंगार के दौरान भगवान महाकाल के उस श्रौद्र स्वरूपश् के दर्शन कराए जाएंगे, जो काल का भी काल है और भक्तों के लिए परम कल्याणकारी है। उज्जैन की विशेष पद्धति से होने वाले इस श्रृंगार में भस्म, विशेष पुष्पों, आभूषणों और तांत्रिक विधि-विधानों का संगम देखने को मिलेगा। स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास गहरा है कि जब उज्जैन के पुजारी साक्षात मंत्रोच्चार के साथ बाबा का श्रृंगार करते हैं, तो मंदिर की ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है और वहां साक्षात शिव की उपस्थिति का अनुभव होता है। मंदिर परिसर को तोरण द्वारों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है, जिससे संध्या काल में मंदिर किसी कैलाश पर्वत की भांति दैदीप्यमान प्रतीत होगा।

इस पावन उत्सव की तिथि और समय का निर्धारण भी विशेष ज्योतिषीय महत्व को ध्यान में रखकर किया गया है। आगामी 31 मार्च 2026, दिन मंगलवार को यह महा-श्रृंगार संपन्न होगा। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सायं 7 बजे से होगा, जिसमें शंखनाद और डमरूओं की गूँज के बीच बाबा का रूप निखारा जाएगा। आयोजन समिति की ओर से समस्त धर्मप्रेमी जनता और शिवभक्तों को सपरिवार इस अलौकिक दर्शन का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया गया है। भक्तों से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे समय से मंदिर पहुँचकर महादेव के इस दुर्लभ और रौद्र रूप के दर्शन करें, क्योंकि ऐसा अवसर वर्ष में केवल एक ही बार प्राप्त होता है। अमत गुरु जी ने बताया कि सुरक्षा और सुविधा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि भारी भीड़ के बावजूद हर भक्त शांतिपूर्वक दर्शन कर सके। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह हमारी सनातनी संस्कृति और उज्जैन-काशीपुर के बीच अध्यात्म के सेतु को और अधिक मजबूत करने का एक सशक्त प्रयास है।

इस भव्य आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रखर युवा वक्ता और समाजसेवी शिवम शर्मा ने अपना विशेष वक्तव्य देते हुए कहा कि बाबा श्री मोटेश्वर महादेव का यह भव्य श्रृंगार मात्र एक कर्मकांड नहीं, बल्कि हमारी अटूट आस्था का जीवंत प्रतिबिंब है। उज्जैन महाकाल के मुख्य पुजारी श्री अमर शर्मा जी और हर्ष शर्मा जी का काशीपुर आगमन हमारे नगर के आध्यात्मिक गौरव को नए आयाम प्रदान करेगा। उन्होने कहा कि जब हम महादेव के रौद्र स्वरूप का दर्शन करते हैं, तो हमारे भीतर के समस्त नकारात्मक विचार और तामसी प्रवृत्तियाँ भस्म हो जाती हैं। अमत गुरु जी के नेतृत्व में जिस प्रकार यह आयोजन प्रति वर्ष अपनी भव्यता की नई सीमाएं लांघ रहा है, वह प्रशंसनीय है। उन्होने काशीपुर विधानसभा कि समस्त क्षेत्रवासियों और युवा पीढ़ी से विशेष आग्रह करते हुये कहा कि 31 मार्च को सायं 7 बजे मंदिर पहुँचकर इस दैवीय ऊर्जा का हिस्सा बनें। शिवम शर्मा ने कहा कि ‘‘हम सब मिलकर इस पावन बेला पर महादेव से प्रार्थना करें कि हमारे प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।’’

महादेव के इस श्रृंगार की महिमा निराली है क्योंकि इसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री और पुजारियों की साधना का प्रभाव सीधे भक्तों के अंतर्मन तक पहुँचता है। उज्जैन की परंपरा के अनुसार, रौद्र श्रृंगार में महादेव को एक रक्षक और संहारक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो अधर्म का विनाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। काशीपुर के बाबा श्री मोटेश्वर महादेव का यह विग्रह स्वयं में अत्यधिक चौतन्य है और जब इस पर महाकाल के पुजारियों का हाथ लगता है, तो इसकी दिव्यता अकल्पनीय हो जाती है। पूरे क्षेत्र में इस संदेश को प्रसारित किया जा रहा है कि कोई भी भक्त इस पुण्य फल से वंचित न रहे। जैसे-जैसे मंगलवार की वह घड़ी नजदीक आ रही है, शिवभक्तों के हृदय में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और अधिक तीव्र होता जा रहा है। यह महा-उत्सव निश्चित रूप से उज्जयनी नगरी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा, जहाँ भक्ति, शक्ति और परंपरा का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

काशीपुर के इस महा-आयोजन को सफल बनाने के लिए धर्मरक्षकों की एक विराट टोली मैदान में उतर चुकी है, जिसमें नितिन गुप्ता, शिवम शर्मा, सौरभ शर्मा, हिमांशु अग्रवाल, मयंक मेहता, प्रिंस अग्रवाल, मानस बंसल, प्रियांशु अग्रवाल, रजत शर्मा, अनुराग बता, मानवेन्द्र सिंह, आदर्श मित्तल, रचित अग्रवाल, अंकुश अग्रवाल, नमन गुप्ता और पुलकित अग्रवाल जैसे उत्साही युवा सेवादार अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इन सभी समर्पित भक्तों के अटूट संकल्प और कड़ी मेहनत ने मंदिर परिसर में एक ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया है, जो 31 मार्च की सायं को बाबा श्री मोटेश्वर महादेव के दिव्य श्रृंगार दर्शन को अविस्मरणीय बनाने के लिए तैयार है। उज्जैन महाकाल के मुख्य पुजारियों के भव्य स्वागत से लेकर हज़ारों श्रद्धालुओं की सुगम व्यवस्था तक, यह टीम एक अभेद्य सुरक्षा कवच और सेवा भाव के साथ इस महा-उत्सव को सफल बनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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