देहरादून/नई दिल्ली। आज एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक संवाद का केंद्र तब बना जब हरिद्वार से सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय राजधानी में देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान केवल औपचारिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि उत्तराखंड से जुड़े कई ऐसे विषयों को गंभीरता के साथ उठाया गया जो विशेष रूप से राज्य के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के जीवन से जुड़े हुए हैं। बैठक के दौरान त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्पष्ट रूप से यह बात रखी कि उत्तराखंड एक ऐसा प्रदेश है जहाँ बड़ी संख्या में सैनिक और पूर्व सैनिक रहते हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए उनके सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ देखा जाना चाहिए। सांसद ने कहा कि जब कोई सैनिक अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की रक्षा में समर्पित करता है, तो उसके सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाज और सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसके जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाया जाए। इसी भावना के साथ उन्होंने रक्षामंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं, ताकि उत्तराखंड में रहने वाले पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
राजधानी नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विशेष रूप से देहरादून के क्लेमनटाउन और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले पूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों की चिकित्सा सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को विस्तार से बताया कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी निवास करते हैं, जिनमें कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें उम्र के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है। सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके तो इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में काफी सुधार आ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने देहरादून स्थित वेलमेड अस्पताल का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अस्पताल आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए जाना जाता है। उन्होंने रक्षामंत्री से आग्रह किया कि इस अस्पताल को पूर्व सैनिकों की चिकित्सा योजना के तहत सूचीबद्ध किया जाए ताकि उन्हें उपचार की बेहतर सुविधा मिल सके।
बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह भी बताया कि देहरादून का वेलमेड अस्पताल चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है और यहाँ अत्याधुनिक उपकरणों के साथ विभिन्न जटिल रोगों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कैंसर जैसे गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अस्पताल में अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद है जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से मरीजों का इलाज कर रही है। सांसद ने कहा कि यदि इस अस्पताल को ईसीएचएस योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार के लिए सूचीबद्ध किया जाता है तो इससे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि वेलमेड अस्पताल को इस योजना के तहत शामिल किया जा सके। त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह भी कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता पहले से ही एक चुनौती रही है, ऐसे में यदि आधुनिक अस्पतालों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए तो इससे आम लोगों के साथ-साथ पूर्व सैनिकों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।
मुलाकात के दौरान केवल चिकित्सा सुविधाओं का विषय ही नहीं उठा, बल्कि सैन्य इकाइयों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बना। सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 130 इन्फैंट्री बटालियन प्रादेशिक सेना (पर्यावरण) की दो कंपनियों और बटालियन मुख्यालय को जनपद पिथौरागढ़ से अन्य स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया और कहा कि पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में इस बटालियन की उपस्थिति स्थानीय लोगों के लिए गौरव का विषय है। इसके साथ ही यह इकाई पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। सांसद ने यह भी बताया कि इस विषय को लेकर स्थानीय पूर्व सैनिकों और समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस बटालियन को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाता है तो इससे क्षेत्र की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है और स्थानीय स्तर पर कई तरह की समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए उन्होंने रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव का पुनर्मूल्यांकन करते हुए सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
इस मुद्दे को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रक्षामंत्री को पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के अध्यक्ष द्वारा भेजा गया एक पत्र भी सौंपा। इस पत्र में स्थानीय पूर्व सैनिकों की भावनाओं और चिंताओं का उल्लेख किया गया था। सांसद ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के लोगों का सेना से गहरा जुड़ाव रहा है और यहां के अनेक युवाओं ने देश की सेवा के लिए सेना में अपना योगदान दिया है। ऐसे में यदि वहां स्थित सैन्य इकाइयों को हटाने का निर्णय लिया जाता है तो इससे क्षेत्र के लोगों की भावनाएं प्रभावित होंगी। उन्होंने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया कि इस विषय को संवेदनशीलता के साथ देखा जाए और ऐसा निर्णय लिया जाए जिससे स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं और भावनाओं का सम्मान बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सैन्य इकाइयों की मौजूदगी केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होती है।
बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सैनिकों और पूर्व सैनिकों का सम्मान करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जब कोई जवान देश की सीमाओं पर तैनात होकर अपनी जिम्मेदारी निभाता है तो वह अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर राष्ट्र की सेवा करता है। ऐसे में उसके सेवानिवृत्त होने के बाद यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसे सम्मान, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं मिलती रहें। त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पूर्व सैनिकों की चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना राष्ट्र के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है और भविष्य में भी पूर्व सैनिकों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
नई दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्ट भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने इस बैठक को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया क्योंकि उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाया गया। बैठक में राज्य के पूर्व सैनिकों से संबंधित विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई और उम्मीद जताई गई कि आने वाले समय में इन मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे। सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड को ‘सैनिकों की भूमि’ के रूप में जाना जाता है और यहां के हजारों परिवार सेना से जुड़े रहे हैं। ऐसे में राज्य के पूर्व सैनिकों की समस्याओं और आवश्यकताओं को समझना और उनके समाधान के लिए कदम उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इन मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेंगे और जल्द ही सकारात्मक पहल देखने को मिलेगी।
इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट संदेश भी सामने आया कि पूर्व सैनिकों से जुड़े विषयों को लेकर सरकार और जनप्रतिनिधि लगातार सक्रिय हैं। सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना ही नहीं बल्कि उनके समाधान की दिशा में ठोस पहल करना भी है। उन्होंने कहा कि चाहे स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो या सैन्य इकाइयों से जुड़े निर्णय, हर मामले में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हित सुरक्षित रहें। नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें उत्तराखंड से जुड़े कई अहम मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया और उनके समाधान की दिशा में सकारात्मक संवाद हुआ।





