काशीपुर। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल उस समय तेज हो गई जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कुमाऊं क्षेत्र के दौरे के दौरान काशीपुर पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नई ऊर्जा भरने का प्रयास किया। अपने प्रवास के दौरान वह प्रदेश कांग्रेस सचिव शिवम शर्मा के निवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर उनके परिवार को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उनका स्वागत उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया और बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक भी उपस्थित रहे। राजनीतिक औपचारिकताओं से हटकर उन्होंने पारिवारिक समारोह में भाग लेकर कार्यकर्ताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर खुलकर विचार रखे और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीतिक सोच को सामने रखा। उनके इस दौरे को कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में आगामी चुनावों को लेकर उत्साह बढ़ता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक संवाद के दौरान उन्होंने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव जनता के मुद्दों पर लड़ा जाएगा और मतदाता ही तय करेंगे कि प्रदेश की दिशा क्या होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासनिक तंत्र पारदर्शिता बनाए रखने में असफल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मुख्य फोकस जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर रहेगा, जिनमें रोजगार, सुरक्षा और विकास सबसे प्रमुख विषय होंगे। उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और लोग अब बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। उनके अनुसार कांग्रेस जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और हर वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह बयान चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, जिससे संगठन के भीतर एकजुटता का संदेश भी गया है।
प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की समस्या लगातार गहराती जा रही है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवा नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से काम करना चाहिए, क्योंकि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप ले सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार कानून व्यवस्था की स्थिति को मजबूत किए बिना राज्य के समग्र विकास की कल्पना संभव नहीं है। इस मुद्दे पर उन्होंने सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग भी की।
ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को जंगली जानवरों के खतरे से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाघ, भालू, बंदर, सूअर और हाथियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भय का वातावरण बना हुआ है और कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को वन्यजीव और मानव संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहरों में अवैध खनन और भारी वाहनों की आवाजाही ने लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। उनके अनुसार खनन माफिया और डंपरों का बढ़ता दबाव आम नागरिकों के जीवन को असुरक्षित बना रहा है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।
प्रदेश में अपराध की बढ़ती घटनाओं और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने हाल ही में विभिन्न जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादलों को सरकार की असफलता का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों का स्थानांतरण कर देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उनके अनुसार अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस व्यवस्था जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय अन्य गतिविधियों में व्यस्त दिखाई देती है, जिससे कानून व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देना आवश्यक है, तभी जनता का विश्वास बहाल किया जा सकता है।
चुनावी राजनीति में उठाए जाने वाले धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर ऐसे विषय उठाते हैं जो समाज को विभाजित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी या जुमे की नमाज़ पर छुट्टी जैसे मुद्दे पूरी तरह भ्रामक प्रचार का हिस्सा हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके नाम से जुड़े ऐसे किसी बयान का प्रमाण कोई प्रस्तुत कर दे तो वह राजनीति से संन्यास लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में प्रमाण प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति के लिए पुरस्कार की घोषणा की गई है। उनका कहना था कि जनता को भ्रमित करने के लिए झूठे मुद्दे उठाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उन्होंने सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए झूठे वादों और प्रचार का सहारा लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में प्रदेश में भ्रष्टाचार और संसाधनों की लूट जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार सरकार को जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शी शासन व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता देती रही है और भविष्य में भी इसी दिशा में कार्य करेगी। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीतिक सोच स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।
मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना होना चाहिए, लेकिन यदि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विपक्ष के समर्थकों के नाम हटाए जाते हैं या फर्जी नाम जोड़े जाते हैं तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला होती है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ लागू किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।
पार्टी के हालिया आंदोलनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच वर्तमान सरकार के प्रति असंतोष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और लोग बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “भाजपा गई” का नारा केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि जनता की भावनाओं को दर्शाता है। उनके अनुसार कांग्रेस जनता की आवाज बनकर उनके मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है और आगामी चुनावों में यही मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक भविष्य को लेकर अपनी राय व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने पिछले दस वर्षों में सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन कर लिया है और अब लोग ठोस परिणाम देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि झूठे वादे और प्रचार लंबे समय तक जनता को प्रभावित नहीं कर सकते और अंततः मतदाता अपने अनुभव के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता अपना स्पष्ट फैसला सुनाएगी और राज्य में नई राजनीतिक दिशा तय करेगी। उनके इस बयान को कांग्रेस के आत्मविश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दे रहा है। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज जोशी, त्रिलोक अधिकारी सहित कई कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत बनाने और आगामी चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और योजनाओं की जानकारी दें और लोगों की समस्याओं को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाएं। इस अवसर पर मौजूद समर्थकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आगामी चुनावों के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प दोहराया।





