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पुलिस रेड का बदला लेने को सरेआम चलीं गोलियां मासूमों की चीखों से कांपा रामनगर

गांजा तस्करी की रंजिश में दहला शांत गांव जहाँ बदमाशों ने घर में घुसकर मासूमों और महिलाओं पर बरसाईं गोलियां जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त है और पुलिस सरगर्मी से तलाश रही है।

रामनगर। उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में स्थित रामनगर उस वक्त अचानक दहशत और सनसनी के माहौल में घिर गया, जब नैनीताल जिले के पिरूमदारा चौकी क्षेत्र अंतर्गत थारी-कांडला गांव में रविवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। आम दिनों की तरह शांत रहने वाला यह इलाका सुबह करीब साढ़े नौ से दस बजे के बीच उस समय सहम उठा, जब लोगों ने एक के बाद एक कई फायर होने की आवाजें सुनीं। शुरुआती क्षणों में ग्रामीण कुछ समझ पाते, इससे पहले ही अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई। पिरूमदारा चौकी पुलिस, रामनगर कोतवाली की टीम और वरिष्ठ अधिकारी चंद ही मिनटों में मौके की ओर रवाना हो गए। पुलिस के अनुसार महज पांच मिनट के भीतर टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी, जिसने पूरे क्षेत्र को घेरते हुए हालात को काबू में लेने की कोशिश शुरू कर दी। इसके बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी बुलाया गया ताकि घटनास्थल से हर अहम साक्ष्य जुटाया जा सके। गोलीबारी की इस घटना ने न सिर्फ थारी-कांडला बल्कि आसपास के गांवों में भी भय का माहौल पैदा कर दिया और लोग अपने बच्चों व परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।

घटना के पीछे की वजह को लेकर सामने आई जानकारी ने मामले को और भी गंभीर बना दिया। पीड़ित पक्ष के अनुसार यह पूरा विवाद गांजा तस्करी से जुड़ी एक पुरानी रंजिश का नतीजा है। पीड़ित गुरमीत सिंह ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले गांव के ही एक युवक को पुलिस ने करीब आठ से नौ किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया था। बताया गया कि पकड़ा गया युवक उनके पड़ोसी अर्जुन सिंह का रिश्तेदार है। इसी गिरफ्तारी के बाद से अर्जुन सिंह गुरमीत सिंह और उनके परिवार को शक की नजर से देखने लगा था। गुरमीत का आरोप है कि अर्जुन सिंह को यह भ्रम हो गया था कि गांजा पकड़वाने के पीछे उन्हीं का हाथ है। इसी गलतफहमी ने धीरे-धीरे दुश्मनी का रूप ले लिया। गुरमीत के मुताबिक, अर्जुन सिंह न केवल उन्हें बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी आए दिन धमकाने लगा था। इतना ही नहीं, वह बाहर से आने वाले कुछ युवकों के साथ मिलकर गांव में अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा था। गुरमीत ने यह भी आरोप लगाया कि अर्जुन सिंह उनके ट्रैक्टर चालक पर दबाव डाल रहा था कि वह उनका काम छोड़कर उसके यहां काम करे, जिससे विवाद और गहराता चला गया।

रविवार की सुबह हालात उस समय और बिगड़ गए, जब क्रशर के पास एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई। गुरमीत सिंह के अनुसार, अर्जुन सिंह ने उनके ड्राइवर के साथ अभद्र व्यवहार किया और खुलेआम जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद गुरमीत और उनका ड्राइवर किसी तरह वहां से निकलकर अपने घर लौट आए। उन्हें अंदेशा था कि मामला यहीं थम जाएगा, लेकिन थोड़ी ही देर बाद स्थिति ने भयावह रूप ले लिया। आरोप है कि अर्जुन सिंह चार से पांच अन्य युवकों के साथ गुरमीत सिंह के घर पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से घर में मौजूद महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे बुरी तरह घबरा गए। जान बचाने के लिए परिवार के लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ लोग पड़ोसियों के घरों में छिपने को मजबूर हो गए। गोलियों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों में भी लोग सहम गए और पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।

फायरिंग का सिलसिला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि हमलावरों ने पास स्थित एक अन्य मकान को भी निशाना बनाया और वहां भी गोलियां चलाईं। इस घटना की पुष्टि करते हुए गुरमीत सिंह की पड़ोसी सुखविंदर कौर ने बताया कि उनके घर पर भी गोलियां चलाई गईं, जिससे दीवारों और दरवाजों में नुकसान हुआ। सुखविंदर कौर के अनुसार, अचानक हुई इस वारदात से उनके बच्चे बुरी तरह डर गए थे। उन्होंने किसी तरह छोटे बच्चों को एक कमरे में बंद कर खुद बाहर से कुंडी लगाई और जान बचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि अगर समय रहते लोग सतर्क न होते, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि हमलावर खुलेआम गांजा बेचने का काम करते हैं और अपने रिश्तेदार की गिरफ्तारी के बाद से पूरे गांव पर शक कर रहे थे। इसी शक के चलते वे लोगों को डराने-धमकाने के लिए इस तरह की वारदात को अंजाम दे रहे हैं, ताकि कोई उनके खिलाफ पुलिस को जानकारी देने की हिम्मत न कर सके।

मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने सबसे पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया और ग्रामीणों से संयम बनाए रखने की अपील की। घटनास्थल के चारों ओर पुलिस बल तैनात कर दिया गया ताकि किसी तरह की और अप्रिय स्थिति न बने। इसके बाद फॉरेंसिक टीम ने मौके से खाली कारतूस, गोलियों के निशान और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से विस्तार से बातचीत कर घटना की पूरी जानकारी ली। ग्रामीणों से भी पूछताछ की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि फायरिंग के वक्त मौके पर कौन-कौन मौजूद था और हमलावर किस दिशा में फरार हुए। इस दौरान गांव में भारी पुलिस मौजूदगी रही, जिससे लोगों में कुछ हद तक भरोसा लौटा। हालांकि, महिलाओं और बच्चों के चेहरे पर अभी भी डर साफ नजर आ रहा था। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि घटना किसी व्यक्तिगत विवाद से कहीं ज्यादा, नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी रंजिश का परिणाम हो सकती है। इसी एंगल से जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है और सभी संदिग्धों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।

मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी सुमित पांडे ने बताया कि फायरिंग की सूचना मिलते ही पिरूमदारा चौकी, रामनगर कोतवाली पुलिस और वे स्वयं तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। उनके अनुसार शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ दिन पहले गांजा तस्करी के एक मामले में हुई गिरफ्तारी को लेकर गलतफहमी और आपसी रंजिश पैदा हो गई थी। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने लोगों को डराने-धमकाने के उद्देश्य से फायरिंग की। सुमित पांडे ने कहा कि पुलिस इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे हथियारों और हमलावरों की पहचान में मदद मिलेगी। इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

जांच के दौरान एक नाम विशेष रूप से सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में रोहित गुर्जर नामक युवक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिस पर पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी आपराधिक हिस्ट्री खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसका संबंध किन-किन मामलों और लोगों से रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित पक्ष की ओर से लिखित तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई को और तेज किया जाएगा। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाएगा और गांव में शांति व्यवस्था बहाल की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती की जाती, तो शायद ऐसी स्थिति पैदा ही न होती। फिलहाल पुलिस की सक्रियता से लोगों को न्याय की उम्मीद है, लेकिन थारी-कांडला की यह सुबह लंबे समय तक लोगों के जेहन में डर बनकर रहने वाली है।

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