नैनीताल। सरोवर नगरी में उस समय हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई जब उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय को धमकी भरा ई-मेल मिलने की सूचना सामने आई। यह सूचना सामने आते ही प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई, क्योंकि मामला केवल किसी एक कार्यालय तक सीमित नहीं था, बल्कि सीधे न्यायपालिका की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा हुआ था। न्यायालय जैसे संवेदनशील और सर्वाेच्च संस्थान को मिली धमकी को हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं थी। इसी कारण पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने बिना समय गंवाए तत्काल मोर्चा संभाल लिया। उच्च न्यायालय परिसर को देखते ही देखते हाई अलर्ट ज़ोन घोषित कर दिया गया और हर स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई। आम दिनों में शांत रहने वाला नैनीताल का यह इलाका अचानक भारी सुरक्षा घेरे में तब्दील हो गया।
सूचना मिलते ही कुमायूँ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने न केवल मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूरी जानकारी ली, बल्कि न्यायालय परिसर और उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था का गहन निरीक्षण भी किया। उनके पहुंचते ही स्पष्ट संदेश चला गया कि प्रशासन इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। उनके निर्देश पर पूरे न्यायालय क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा लागू किया गया, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की कोई गुंजाइश न रहे। हर प्रवेश और निकास बिंदु पर पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई और आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जाने लगी।
इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टी.सी., पुलिस अधीक्षक अपराध डॉ. जगदीश चंद्रा तथा सीएसओ राकेश बिष्ट भी न्यायालय परिसर में मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शा रही थी कि मामला केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संभावित खतरे को ध्यान में रखकर ठोस रणनीति बनाई जा रही है। आईजी कुमायूँ ने मौके पर ही एसएसपी नैनीताल को स्पष्ट निर्देश दिए कि उच्च न्यायालय की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और तीन दिनों के भीतर इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कहीं भी कोई सुरक्षा चूक न रह जाए।

न्यायालय परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए तुरंत सघन तलाशी अभियान चलाया गया। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते को बुलाकर पूरे क्षेत्र की बारीकी से जांच कराई गई। परिसर के हर कोने, पार्किंग क्षेत्र, गलियारों और खुले स्थानों को खंगाला गया। इस दौरान किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया गया। सभी प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई और आगंतुकों की गहन तलाशी अनिवार्य कर दी गई, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना जांच के अंदर प्रवेश न कर सके।
सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एक कंपनी पीएसी की तैनाती की गई। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस को भी न्यायालय की सुरक्षा में लगाया गया। इस कदम से स्पष्ट हो गया कि प्रशासन किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क है। अब न्यायालय परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर विशेष नियंत्रण लागू कर दिया गया है। तय किया गया कि केवल वही व्यक्ति परिसर में प्रवेश कर सकेंगे, जिनके पास बार एसोसिएशन नैनीताल द्वारा जारी अधिकृत पत्र होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को परिसर में घुसने से रोका जा सके।

आईजी कुमायूँ श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि हाल के दिनों में यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ समय से राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित जिला जज न्यायालयों को भी इसी तरह के धमकी भरे ई-मेल मिल रहे हैं। इनमें उत्तरकाशी, देहरादून, हरिद्वार, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे जिले शामिल हैं। इन सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा विधिक कार्रवाई की जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही।
उन्होंने आगे बताया कि इन धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच के लिए राज्य की एसटीएफ की टीमें लगातार काम कर रही हैं। आईपी एड्रेस को ट्रेस करने के लिए केंद्रीय सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। यह प्रक्रिया जटिल है, क्योंकि आजकल साइबर अपराधों में डार्क वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ई-मेल भेजने वाले की पहचान छुपाई जा सकती है। इसके बावजूद पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि इन ई-मेल्स के स्रोत तक पहुंचा जा सके।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने केवल भौतिक सुरक्षा तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि साइबर स्तर पर भी जांच को तेज कर दिया गया। आईजी कुमायूँ रिद्धिम अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि जिस तरह से लगातार अलगदृअलग जिलों के न्यायालयों को धमकी भरे ईदृमेल प्राप्त हो रहे हैं, उससे यह आशंका और भी गंभीर हो जाती है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय को मिला ईदृमेल उसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी कड़ियाँ पहले जिला जज न्यायालयों तक देखी गई थीं। इसी कारण इस पूरे प्रकरण को किसी एक जिले या एक घटना तक सीमित न मानते हुए राज्यस्तरीय और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जांच की जा रही है, ताकि खतरे की जड़ तक पहुंचा जा सके।
जांच के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए आईजी कुमायूँ ने बताया कि एसटीएफ की विशेष टीमें लगातार आईपी एड्रेस ट्रेस करने में जुटी हुई हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज के दौर में साइबर अपराधी डार्क वेब ब्राउज़र और वीपीएन जैसी तकनीकों का उपयोग कर अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करते हैं, जिससे जांच प्रक्रिया जटिल हो जाती है। इसके बावजूद जहांदृजहां से आईपी एड्रेस की आंशिक जानकारी मिल रही है, वहांदृवहां भारत सरकार की ओर से एमएलएटी के माध्यम से संबंधित देशों की एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य यही है कि यदि ईदृमेल देश के बाहर से भेजे गए हैं, तो भी उनकी वास्तविक लोकेशन और भेजने वालों की पहचान सामने लाई जा सके।
जब मीडिया ने ईदृमेल में पाकिस्तान का जिक्र होने को लेकर सवाल किया, तो आईजी कुमायूँ ने बेहद संतुलित और सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिलहाल तकनीकी जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। कुछ आईपी एड्रेस देश के बाहर से जरूर ट्रेस हुए हैं, लेकिन केवल इस आधार पर किसी विशेष देश या संगठन की भूमिका तय नहीं की जा सकती। उन्होंने साफ किया कि जांच पूरी तरह तथ्य और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित होगी, न कि किसी अनुमान या अफवाह पर। यही कारण है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर पहलू को बारीकी से खंगाल रही हैं, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
न्यायालय परिसर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़े और ठोस कदम उठाए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टी.सी. के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। हर उस बिंदु की पहचान की जा रही है, जहां से किसी भी प्रकार की चूक की संभावना हो सकती है। पुलिस अधीक्षक अपराध जगदीश चंद्रा ने बताया कि एंटीदृसैबोटाज चेकिंग को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सुरक्षा व्यवस्था के रूप में लागू किया गया है। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता समयदृसमय पर परिसर की जांच करता रहेगा, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। सीएसओ राकेश बिष्ट ने जानकारी दी कि अब न्यायालय परिसर में प्रवेश से पहले आगंतुकों का पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है। नाम, पहचान पत्र, आने का उद्देश्य और किससे मिलने आए हैंकृइन सभी जानकारियों को रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की 24×7 निगरानी सुनिश्चित की गई है और कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की सख्त व्यवस्था से किसी भी असामाजिक तत्व के लिए परिसर में प्रवेश कर पाना बेहद कठिन हो जाएगा।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से यदि कोई व्यक्ति बिना पुष्टि के भ्रामक जानकारी फैलाता है, तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। पुलिस का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अफवाहें भी उतना ही बड़ा खतरा बन सकती हैं, जितना कि वास्तविक धमकी। इसलिए आम जनता से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध जानकारी को तुरंत पुलिस के साथ साझा करें।
राज्य एसटीएफ और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल लगातार मजबूत किया जा रहा है। हर नई जानकारी को साझा किया जा रहा है, ताकि जांच की दिशा सही बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि न्यायपालिका की सुरक्षा केवल कानूनदृव्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है। यदि न्यायालय सुरक्षित हैं, तभी आम नागरिकों का कानून और संविधान पर भरोसा बना रहेगा। इसी भावना के साथ उत्तराखण्ड पुलिस और प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस चुनौती का सामना कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कुमायूँ पुलिस ने आमजन को आश्वस्त किया है कि उच्च न्यायालय और अन्य न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को समयदृसमय पर और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा तथा तकनीकी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि धमकी देने वालों का उद्देश्य चाहे डर फैलाना हो या व्यवस्था को चुनौती देना, लेकिन कानून के दायरे में रहकर हर साजिश का जवाब दिया जाएगा। यह मामला केवल एक ईदृमेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सतर्कता की परीक्षा है, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भविष्य में और अधिक मजबूत होकर सामने आएगी।





