काशीपुर। खंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र कुमार साहू ने मीडिया से मुखातिब होते हुए शिक्षा जगत में व्याप्त विसंगतियों और सरकारी प्रयासों पर जो बेबाक राय रखी है, उसने समूचे उत्तराखंड के शैक्षणिक गलियारे में एक नई बहस छेड़ दी है। साहू ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विद्यालय को बख्शा नहीं जाएगा, विशेषकर किताबों और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों का शोषण करने वाले संस्थानों पर विभाग की पैनी नजर है। उन्होंने विस्तार से बताया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी महोदय ने पहले ही यह सुनिश्चित कर दिया है कि निजी विद्यालय अपनी मनमर्जी से किसी निश्चित दुकान से पुस्तकें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव नहीं बना सकते हैं। एनसीईआरटी की पुस्तकों की उपलब्धता और उनकी अनिवार्यता को लेकर प्रशासन का रुख पूरी तरह से सख्त है और यदि कोई भी स्कूल प्रबंधन इन नियमों की अनदेखी कर अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा विभाग का ध्येय केवल व्यापार नहीं, बल्कि हर बच्चे तक सस्ती और सुलभ शिक्षा पहुँचाना है, जिसमें किसी भी प्रकार का अवरोध स्वीकार्य नहीं होगा।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र के आगाज के साथ ही ड्रेस कोड में अचानक होने वाले बदलावों को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र कुमार साहू ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि स्कूलों को यह समझना होगा कि वे शिक्षा के मंदिर हैं, न कि मुनाफाखोरी का केंद्र। उन्होंने बताया कि यदि कोई विद्यालय अपनी ड्रेस में परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम एक सत्र पूर्व अभिभावकों को सूचित करना अनिवार्य है, ताकि उन पर आर्थिक बोझ न पड़े। अचानक लिया गया फैसला न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि गार्जियंस के साथ विश्वासघात भी है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री साहू ने यह भी रेखांकित किया कि कई अधिकारियों ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए हैं कि एनसीईआरटी की किताबों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें थोपना पूरी तरह वर्जित है। सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्राप्त होने वाली लिखित शिकायतों पर त्वरित एक्शन लिया जा रहा है।
शिक्षा के अधिकार (आरईटी) के अंतर्गत होने वाले प्रवेशों पर प्रकाश डालते हुए धीरेन्द्र कुमार साहू ने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जो क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि निजी विद्यालयों के लोअर क्लास में पिछले तीन वर्षों के औसत प्रवेश की संख्या का पच्चीस प्रतिशत कोटा इस बार पूरी सटीकता और निष्पक्षता के साथ भर लिया गया है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिले में मुख्य शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं, जिसका सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। दाखिले की इस व्यवस्था में वार्ड प्रणाली का कड़ाई से पालन किया जा रहा है, जिसमें प्राथमिकता उसी वार्ड के छात्र को दी जाती है जिसमें विद्यालय स्थित है। यदि उस वार्ड में सीटें उपलब्ध नहीं होती हैं, तभी सराउंडिंग यानी आसपास के वार्डों के बच्चों को मौका मिलता है। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि स्थानीय बच्चों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े और स्कूलों में बच्चों की संख्या का संतुलन भी बना रहे।
कक्षाओं में बच्चों की निर्धारित संख्या और ओवरलोडिंग के मुद्दे पर खंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र कुमार साहू ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी क्लास रूम में उसकी क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मानकों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे वह स्कूल परिसर की बात हो या परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली बसों की। चार अप्रैल को जारी किए गए आधिकारिक आदेश में इन सभी बिंदुओं को विस्तार से शामिल किया गया है, जिसमें परिवहन सुरक्षा और बसों की फिटनेस से लेकर स्कूल की बिल्डिंग तक के मानक तय किए गए हैं। साहू ने कहा कि काशीपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है और यदि कोई विद्यालय नियमों की धज्जियां उड़ाता पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द करने तक की संस्तुति की जा सकती है। विभाग का उद्देश्य एक ऐसी सुरक्षित व्यवस्था कायम करना है जहाँ अभिभावक निश्चिंत होकर अपने बच्चों को भेज सकें और उन्हें श्रेष्ठ शिक्षा मिल सके।
राजकीय विद्यालयों की बदलती तस्वीर और वहां आयोजित होने वाले ‘प्रवेश उत्सव’ की भव्यता का वर्णन करते हुए धीरेन्द्र कुमार साहू भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि आज सरकारी स्कूल किसी भी निजी स्कूल से कमतर नहीं हैं। उन्होंने गौरव के साथ बताया कि नए सत्र में प्रवेश के लिए आने वाले बच्चों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर और फूल बरसाकर स्वागत किया गया, जैसे किसी धार्मिक या सामाजिक उत्सव में किया जाता है। प्रवेश उत्सव के दौरान बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें, कॉपियां, पेंसिल और बैग वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान बिखर गई। काशीपुर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में परियोजना निदेशक भंडारी जी और कांग्रेस नेता मनोज जी के साथ विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने शिक्षकों और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। साहू ने कहा कि सरकारी स्कूलों में दी जा रही क्वालिटी एजुकेशन और वहां का संस्कारवान माहौल आज समाज के हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जो कि शिक्षा विभाग की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी विद्यालयों में मिलने वाली सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए धीरेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठा रही है, जिसमें कक्षा एक से लेकर इंटरमीडिएट तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क गणवेश और पुस्तकों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बच्चों के शारीरिक विकास के लिए ‘मिड-डे मील’ के तहत पौष्टिक भोजन परोसा जा रहा है और सप्ताह में एक बार उन्हें विशेष भोजन (दावत) और फल वितरित किए जाते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु फॉलिक एसिड और आयरन की टैबलेट्स नियमित रूप से दी जाती हैं और डॉक्टरों की टीम द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है। साहू ने उल्लेख किया कि यदि परीक्षण के दौरान किसी बच्चे में कोई गंभीर बीमारी या कमी पाई जाती है, तो उसे तत्काल उच्च केंद्रों पर रेफर किया जाता है, जहाँ उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाता है। शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के इस समन्वय ने ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार किया है, जिससे उनकी उपस्थिति और सीखने की क्षमता में वृद्धि हुई है।
अंग्रेजी माध्यम की बढ़ती मांग को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि काशीपुर ब्लॉक में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए दो ‘अटल उत्कृष्ट विद्यालय’ संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें से एक प्रतापपुर और दूसरा कुंडा में स्थित है। ये विद्यालय सीबीएसई से संबद्ध हैं और यहाँ पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम में विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे अब गरीब परिवारों के बच्चे भी कॉन्वेंट स्कूलों जैसी शिक्षा मुफ्त में प्राप्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त ‘निपुण विद्यालय’ योजना के तहत प्राथमिक शिक्षा को मजबूत किया जा रहा है और रेलवे स्थित प्राथमिक विद्यालय जैसे संस्थान आज अपनी गुणवत्ता के कारण पूरे जिले में मिसाल बन चुके हैं। श्री साहू ने अंत में कहा कि अब वह धारणा बदल रही है कि केवल निजी स्कूलों में ही अच्छी पढ़ाई होती है; आज सरकारी स्कूलों में जगह कम पड़ रही है क्योंकि लोग अब योग्यता और समर्पण को पहचान रहे हैं। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सरकारी स्कूलों की इन सुविधाओं का लाभ उठाएं और शिक्षा के इस महायज्ञ में सहभागी बनें।





