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नमामि गंगे की लहरों संग युवाओं ने छेड़ा गंगा स्वच्छता का महासंग्राम और महाभियान

उत्तराखंड की पावन धरा पर युवा शक्ति का शंखनाद और नमामि गंगे के संकल्प से रामनगर में गूँजता स्वच्छता का अटूट महामंत्र, जहाँ नन्हे हाथों ने कैनवास पर उकेरी माँ गंगा की अविरल और निर्मल धारा।

रामनगर। पी एन जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की नमामि गंगे इकाई ने हाल ही में सामाजिक चेतना की एक नई और क्रांतिकारी अलख जगाते हुए पं गौरी दत्त दानी सरस्वती विद्या मंदिर छोई के पावन प्रांगण में एक बेहद भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। गंगा स्वच्छता पखवाड़े के इस पावन और महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित इस विशेष गतिविधि का मुख्य विषय “गंगा की स्वच्छता, हमारी जिम्मेदारी” निर्धारित किया गया था, जिसने न केवल उपस्थित स्वयंसेवियों के भीतर उनके सोए हुए कर्तव्यबोध को पूरी तरह से जागृत किया बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत सशक्त और दूरगामी संदेश भी समाज के बीच प्रसारित किया। इस कार्यक्रम की विशाल महत्ता और गंभीरता को इसी बात से बहुत आसानी से समझा जा सकता है कि राष्ट्रीय सेवा योजना के युवा स्वयंसेवियों ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अत्यंत उत्साह, अटूट ऊर्जा और अटूट निष्ठा के साथ अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई, जिससे पूरा स्कूल परिसर स्वच्छता के पवित्र संकल्प और युवाओं के जोश से गूँज उठा। नमामि गंगे के इस विराट महा-अभियान का मूल और प्राथमिक उद्देश्य हमारी भावी पीढ़ी को गंगा जैसी पवित्र, सनातन और जीवनदायिनी नदी के प्रति उनके नैतिक उत्तरदायित्वों का गहरा बोध कराना था, ताकि वे भविष्य में समाज के भीतर स्वच्छता के सच्चे अग्रदूत और रक्षक बनकर उभर सकें और देश को नई दिशा दे सकें।

बौद्धिक और कलात्मक प्रतियोगिताओं की इस विस्तृत श्रृंखला की शुरुआत होते ही विद्यार्थियों की असीमित सृजनात्मकता और उनकी वैचारिक गहराई को देखकर वहां उपस्थित सभी लोग दंग रह गए, जहाँ निबंध, पोस्टर और स्लोगन जैसी विभिन्न रचनात्मक विधाओं के माध्यम से छात्रों ने अपने अंतर्मन के गहरे भावों और पीड़ा को कागजों पर उकेरा। निबंध प्रतियोगिता में जहाँ होनहार प्रतिभागियों ने अपने शब्दों की मर्यादा, भाषा की शुद्धता और तर्कों की बेजोड़ शक्ति से गंगा के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक, पौराणिक और पारिस्थितिक महत्व पर बहुत ही सुंदर ढंग से प्रकाश डाला, वहीं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में रंगों, कल्पनाओं और ब्रश के जादुई मेल से प्रदूषित होती जा रही मां गंगा की व्यथा और उसके पुनरुद्धार की एक आशावादी भविष्य की तस्वीर सबके सामने पेश की। स्लोगन लेखन में भी इन प्रतिभावान युवाओं ने एक से बढ़कर एक प्रभावी, तीखे और हृदयस्पर्शी नारे लिखे, जो सीधे जनमानस के दिल पर चोट कर रहे थे और आम लोगों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने की अपार क्षमता रखते थे। इन सभी प्रतियोगिताओं ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया कि यदि आज के युवाओं को सही मार्गदर्शन और उचित मंच प्रदान किया जाए, तो वे पर्यावरण के सामने खड़ी बड़ी से बड़ी चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह से मानसिक रूप से तत्पर हैं। प्रत्येक छात्र की कलाकृति और लेखनी में गंगा के संरक्षण के प्रति एक बहुत गहरी मानवीय संवेदना और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का अद्भुत जुनून साफ तौर पर झलक रहा था, जिसने निर्णायक मंडल को भी गहरे असमंजस और सोच-विचार में डाल दिया।

इस महत्वपूर्ण बौद्धिक और कलात्मक संघर्ष की इस पावन बेला के औपचारिक शुभारंभ से ठीक पहले, आयोजन समिति और महाविद्यालय प्रबंधन ने सभी उपस्थित स्वयंसेवियों को विशेष रूप से तैयार की गई नमामि गंगे किट का सप्रेम वितरण किया, जो उन्हें इस पुनीत स्वच्छता अभियान के प्रति और अधिक समर्पित और निष्ठावान रहने के लिए प्रोत्साहित करने का एक बहुत ही अनूठा और सराहनीय माध्यम बनी। इस किट वितरण का मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्वच्छता के आधुनिक उपकरणों से पूरी तरह सुसज्जित करना और उनके भीतर यह आत्मविश्वास पैदा करना था कि वे इस बड़े राष्ट्रीय मिशन का एक अटूट और अनिवार्य हिस्सा हैं। किट प्राप्त करने के तत्काल बाद स्वयंसेवियों के चमकते चेहरों पर जो नया आत्मविश्वास, नई चमक और गौरव का भाव दिखाई दे रहा था, वह इस बात का साक्षात प्रतीक था कि वे अब केवल सामान्य प्रतिभागी नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अब गंगा और प्रकृति के सच्चे रक्षक बन चुके हैं। महाविद्यालय प्रशासन का यह दूरदर्शी कदम न केवल युवाओं को मानसिक रूप से उत्साहित करने वाला था, बल्कि यह उनके मनोबल को उस हिमालयी ऊंचाई तक ले गया जहाँ से वे समाज की पुरानी सोच में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन लाने की पूरी क्षमता रखते हैं। इस किट वितरण समारोह ने पूरे कार्यक्रम को एक सामान्य औपचारिक आयोजन की सीमाओं से ऊपर उठाकर एक समर्पित मिशनरी मोड में पूरी तरह तब्दील कर दिया, जिसमें मौजूद हर व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य केवल और केवल मां गंगा की पवित्रता और उसकी अविरलता को बनाए रखना था।

इस अत्यंत गरिमामयी और ऐतिहासिक अवसर पर महाविद्यालय और क्षेत्र के कई प्रबुद्ध शिक्षाविदों तथा गणमान्य अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और महत्ता में चार चाँद लगा दिए, जहाँ राष्ट्रीय सेवा योजना की समन्वयक डॉ दीपाली चन्याल ने अपने ओजस्वी संबोधन से युवाओं की नसों में नया जोश और ऊर्जा भर दी। उनके साथ ही वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुमन कुमार और कार्यक्रम अधिकारी डॉ ममता भदौला जोशी ने भी एक कुशल मार्गदर्शक की भूमिका बखूबी निभाते हुए सभी स्वयंसेवियों को निरंतर निस्वार्थ समाज सेवा के कठिन पथ पर बिना थके अग्रसर रहने की महान प्रेरणा दी। मालधनचौड़ के विद्वान एसोसिएट प्रोफेसर डॉ जी सी पंत और इस पूरे कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ नीमा राणा ने भी स्वच्छता की सूक्ष्म बारीकियों और गंगा के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की तत्कालीन आवश्यकता पर बहुत विस्तार से बल दिया, जिससे उपस्थित सभी छात्रों को विषय की एक नई और गहरी वैज्ञानिक समझ प्राप्त हुई। डॉ मुरली धर कापड़ी जैसे बेहद अनुभवी और अनुभवी विशेषज्ञों की मार्गदर्शक मौजूदगी ने यह भी सुनिश्चित किया कि यह पूरा कार्यक्रम न केवल सफल हो, बल्कि छात्रों के लिए अत्यधिक शिक्षाप्रद और ज्ञानवर्धक भी बना रहे। इन वरिष्ठ दिग्गजों के सानिध्य और छत्रछाया में छात्रों ने न केवल विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त की, बल्कि उन्होंने अपने जीवन भर के लिए पर्यावरण के प्रति एक नई वैश्विक दृष्टि और एक संवेदनशील हृदय भी प्राप्त किया।

कार्यक्रम की इस अभूतपूर्व सफलता का वास्तविक श्रेय उन 58 बेहद समर्पित और ऊर्जावान स्वयंसेवियों को भी जाता है, जिन्होंने अपनी सक्रिय उपस्थिति, अनुशासन और कठिन परिश्रम से इस पूरे आयोजन को जीवंत और सफल बना दिया, जिनमें रितेश, वैशाली, ज्योति, हेमंत, दीपक, निकिता और कोमल जैसे प्रतिभावान युवाओं के नाम प्रमुखता के साथ सबके सामने उभर कर आए। इन ऊर्जावान और कर्मठ छात्रों ने न केवल स्वयं पूरी तैयारी के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लिया, बल्कि आयोजन की जमीनी व्यवस्थाओं और प्रबंधन में भी अपना पूरा हाथ बँटाया, जो उनके उभरते हुए नेतृत्व कौशल और सामूहिक उत्तरदायित्व की मजबूत भावना को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। पुरस्कार वितरण की विशेष घोषणा ने कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में एक बहुत ही रोमांचक और उत्सुकता भरा मोड़ ला दिया, जहाँ यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि प्रतियोगिता के सभी विजयी प्रतिभागियों को आगामी एक भव्य और सार्वजनिक समारोह में सम्मानित कर उनकी असाधारण प्रतिभा को सराहा जाएगा। यह पुरस्कार उन छात्रों के लिए केवल एक लकड़ी की ट्रॉफी या कागज का प्रमाण पत्र नहीं होगा, बल्कि उनकी उस अटूट प्रतिज्ञा और मेहनत का सम्मान होगा जो उन्होंने मां गंगा की स्वच्छता और गरिमा को बनाए रखने के लिए आज ली है। आयोजन के गौरवशाली समापन पर सभी शिक्षकों और छात्रों ने सामूहिक रूप से हाथ उठाकर यह महा-संकल्प लिया कि वे “गंगा की स्वच्छता, हमारी जिम्मेदारी” के इस पवित्र मंत्र को समाज के जन-जन तक और हर घर तक पहुँचाएंगे और आने वाले उज्जवल समय में एक स्वच्छ, स्वस्थ और पूरी तरह हरित भारत के महान निर्माण में अपना सर्वोच्च और निस्वार्थ योगदान देंगे।

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