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नकली एनसीईआरटी किताबों का बड़ा खुलासा ऊधमसिंहनगर में करोड़ों का शिक्षा घोटाला बेनकाब

कीरतपुर के गोदाम में पुलिस छापे से सामने आया संगठित फर्जी नेटवर्क, लाखों किताबें जब्त, लोगो और वाटरमार्क में छेड़छाड़ उजागर, एसएसपी अजय गणपति ने दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के दिए संकेत।

रूद्रपुर। ऊधमसिंहनगर में शिक्षा व्यवस्था को गुमराह करने वाले एक बड़े और सुनियोजित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गया है और जिले भर में इस कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। एसएसपी ऊधमसिंहनगर अजय गणपति के सख्त निर्देशों के बाद नकल माफिया और शिक्षा क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने कीरतपुर कोलडा में स्थित संदीप के गोदाम पर छापेमारी करते हुए भारी मात्रा में नकली एनसीईआरटी किताबों का जखीरा बरामद किया है। बरामद किताबों की संख्या लगभग नौ लाख चौहत्तर हजार बताई जा रही है, जिनकी बाजार कीमत करीब 9 से 10 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया कि इन किताबों को बेहद चालाकी और योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था ताकि आम लोग इन्हें असली समझकर खरीद लें।

घटना की पृष्ठभूमि उस समय बनी जब चौदह मार्च को पुलिस को एक बेहद महत्वपूर्ण गोपनीय सूचना मिली, जिसमें बताया गया कि कीरतपुर क्षेत्र में स्थित एक गोदाम में बड़ी मात्रा में संदिग्ध किताबों का भंडारण किया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए एक विशेष टीम गठित कर मौके की ओर रवाना किया। टीम जब वहां पहुंची तो गोदाम के बाहर एक कैंटर खड़ा मिला, जिसमें चालक मौजूद था और वह काफी घबराया हुआ नजर आ रहा था। पुलिस ने उससे पूछताछ की और वाहन में मौजूद दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि कागजातों में कई तरह की गड़बड़ियां थीं और ई-वे बिल पूरी तरह फर्जी था। कैंटर के भीतर बड़ी मात्रा में किताबें भरी हुई थीं, जिससे पुलिस का शक और गहरा गया कि मामला बेहद गंभीर और संगठित स्तर पर चल रहे अवैध धंधे से जुड़ा है।

मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल शिक्षा विभाग और मजिस्ट्रेट को सूचित किया ताकि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत और पारदर्शिता के साथ की जा सके। सभी अधिकारियों की मौजूदगी में गोदाम का ताला खुलवाया गया और अंदर जाकर जब निरीक्षण किया गया तो वहां का दृश्य बेहद चौंकाने वाला था। चारों ओर किताबों के बंडल इस तरह से रखे गए थे जैसे किसी बड़े वितरण नेटवर्क की तैयारी की जा रही हो। विस्तृत जांच के दौरान यह सामने आया कि गोदाम में लगभग नौ लाख चौहत्तर हजार किताबें मौजूद थीं। इन किताबों की पैकेजिंग इतनी सटीक थी कि पहली नजर में वे पूरी तरह असली एनसीईआरटी किताबों जैसी प्रतीत होती थीं, लेकिन गहराई से जांच करने पर कई तकनीकी खामियां सामने आने लगीं, जिससे यह साफ हो गया कि ये नकली हैं।

शिक्षा विभाग की टीम ने जब किताबों की गुणवत्ता का परीक्षण शुरू किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया। जांच में पाया गया कि कागज की गुणवत्ता असली एनसीईआरटी किताबों से काफी अलग थी और प्रिंटिंग में भी स्पष्ट अंतर नजर आ रहा था। कई किताबों में वाटरमार्क नहीं पाया गया, जबकि कुछ में एनसीईआरटी की जगह एसीईआरटी लिखा हुआ था, जो स्पष्ट रूप से छेड़छाड़ का संकेत देता है। इसके अलावा किताबों के लोगो में भी सूक्ष्म बदलाव किए गए थे ताकि आम खरीदार आसानी से इस धोखाधड़ी को पहचान न सके। यह सब देखकर अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि यह कार्य बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया है और इसके पीछे एक संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है, जो शिक्षा क्षेत्र में अवैध कमाई के लिए सक्रिय है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत इस पूरे मामले की जानकारी एनसीईआरटी को भेजी और उनसे विशेषज्ञ जांच के लिए अनुरोध किया। इसके बाद एनसीईआरटी की टीम मौके पर पहुंची और उन्होंने भी किताबों की बारीकी से जांच की। पुलिस और एनसीईआरटी की संयुक्त टीम ने विभिन्न किताबों के सैंपल एकत्र किए और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया ताकि वैज्ञानिक तरीके से यह साबित किया जा सके कि किताबें नकली हैं। इस दौरान गोदाम को पूरी तरह सील कर दिया गया और वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई ताकि कोई भी व्यक्ति साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न कर सके। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जब्त की गई किताबों की कीमत करीब नौ से दस करोड़ रुपये बताई गई है, जो इस फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

एसएसपी अजय गणपति ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सख्त बयान दिया और कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मामले में कोतवाली रुद्रपुर में एफआईआर संख्या 132/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 318(4), 336(3), 338, 340(2) तथा कॉपीराइट एक्ट की धाराओं 63 और 65 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति इस अवैध गतिविधि में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और जांच को हर दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिस गोदाम में इतनी बड़ी मात्रा में किताबें रखी गई थीं, वह एनसीईआरटी द्वारा अधिकृत नहीं था, जिससे पूरे मामले में अवैधता का पहलू और भी स्पष्ट हो गया है। इस बात से यह संकेत मिलता है कि किताबों का भंडारण पूरी तरह से नियमों के खिलाफ किया जा रहा था और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन नकली किताबों की छपाई कहां की गई और किन माध्यमों से इन्हें बाजार तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं और उनका नेटवर्क कितने बड़े स्तर तक फैला हुआ है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर नकली किताबों का मिलना चिंता का विषय है। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन ऐसे मामलों में पूरी तरह सजग है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखना है ताकि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।

इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग पुलिस की सक्रियता की सराहना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नकली किताबें बाजार में पहुंच जातीं तो इससे छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर प्रभाव पड़ता और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता। गलत सामग्री पढ़ने से छात्रों का आधार कमजोर हो सकता था, जिससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। ऐसे में समय रहते इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होना प्रशासन की बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि अगर प्रशासन सतर्क रहे और समय पर कार्रवाई करे तो बड़े से बड़े अपराध को भी रोका जा सकता है।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और हर पहलू को विस्तार से खंगाला जा रहा है ताकि किसी भी दोषी को बचने का मौका न मिले। एसएसपी अजय गणपति ने स्पष्ट किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले में और भी साक्ष्य सामने आ सकते हैं, जिसके आधार पर अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं सकता, चाहे वह कितनी भी बड़ी योजना क्यों न बना ले।

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