काशीपुर। रामलीला मैदान उस वक्त रोशनी और आतिशबाजी की चमक से जगमगाता दिखाई दिया जब आसमान छूते रावण और कुंभकरण के पुतलों को अग्नि की लपटों में जलाकर असत्य पर सत्य की विजय का पर्व विजयदशमी मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर कार्यक्रम की भव्यता को और अधिक बढ़ा दिया। भीषण बारिश के बावजूद शाम ढलते ही मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ी, जिसने उत्साह और उमंग के साथ इस आयोजन को यादगार बना दिया। मैदान में हर उम्र के लोग मौजूद रहे और रावण व कुंभकरण के वध को अपनी आंखों से देखने का जोश उनके चेहरों पर साफ झलक रहा था। आतिशबाजी के धमाकों और लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रामलीला मंचन ने इस धार्मिक आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया।
शहर का यह ऐतिहासिक आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी देर शाम शुरू हुआ, जब रामनगर रोड स्थित मैदान में बनाए गए 55 फीट ऊंचे रावण और 50 फीट लंबे कुंभकरण के पुतलों को भगवान श्रीराम के बाणों से वध कर जलाया गया। दिन के समय जब बारिश ने लोगों को परेशान किया, तो कई जगहों पर यह चर्चा थी कि दशहरे का जश्न इस बार प्रभावित हो सकता है, लेकिन जैसे ही शाम ढली, उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा और मैदान में उमड़ी भीड़ ने इस आयोजन को भव्य बना दिया। दोपहर बाद से ही रामलीला मंच पर रंगारंग कार्यक्रमों का दौर चल पड़ा था, जिनमें कलाकारों ने अपने अभिनय और प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा। इसी बीच जब पुतलों के दहन का क्षण आया, तो पूरा मैदान आतिशबाजी की चमक से झिलमिला उठा और हर तरफ जय श्रीराम के नारों से वातावरण गूंज उठा।

भीड़ को संभालने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस प्रशासन ने इस बार विशेष इंतजाम किए। ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए बाजपुर रोड की ओर जाने वाले वाहनों को टांडा उज्जैन मोड़ से शुगर फैक्ट्री रोड होते हुए चौती चौराहा की ओर डायवर्ट किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर रामलीला मैदान और आस-पास के इलाकों में पुलिस बल की भारी तैनाती रही। कीचड़ और फिसलन भरी जमीन पर भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और मैदान के हर कोने में भीड़ का जोश साफ दिखाई दे रहा था। दशहरे मेले की तैयारियां काफी समय पहले से शुरू हो गई थीं और आयोजकों ने इस बार भी कार्यक्रम को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
रावण और कुंभकरण के इन आदमकद पुतलों के दहन का नजारा हर साल की तरह इस बार भी सबसे बड़ा आकर्षण रहा। आतिशबाजी के धमाकों और रंग-बिरंगी रोशनी ने रात के अंधेरे को दिन में बदल दिया। जब भगवान श्रीराम ने अपने बाणों से रावण का वध किया, तो पूरा मैदान उत्साह और धार्मिक भावनाओं से सराबोर हो गया। इसके बाद लंका दहन की रस्म निभाते हुए विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी ने इस ऐतिहासिक पल को अपने दिल में संजो लिया। मैदान में मौजूद सैकड़ों दर्शकों ने तालियों और नारों से इस अद्भुत दृश्य का स्वागत किया और एक बार फिर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश पूरी मजबूती से दिया।
रामलीला मैदान में इस बार भी वही परंपरागत जोश और श्रद्धा देखने को मिली, जिसने दशहरे को हर बार की तरह खास बना दिया। असत्य पर सत्य की जीत का यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक रहा। बारिश के बाद भी लोग अपने परिवारों के साथ यहां पहुंचे और देर रात तक इस भव्य आयोजन का आनंद लेते रहे। जयकारों और आतिशबाजी के बीच जब रावण और कुंभकरण के विशाल पुतले धू-धू कर जले, तो ऐसा लगा मानो अंधकार मिटाकर प्रकाश ने अपनी जीत दर्ज की हो। इस तरह काशीपुर का दशहरा इस बार भी उत्साह और परंपरा के रंगों से सराबोर होकर इतिहास में दर्ज हो गया।



