spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडधामी कैबिनेट ने 28 प्रस्तावों को मंजूरी दी बजट में 10 प्रतिशत...

धामी कैबिनेट ने 28 प्रस्तावों को मंजूरी दी बजट में 10 प्रतिशत वृद्धि सहित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यावरण और न्यायिक सुधार सहित 28 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, बजट में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को भी हरी झंडी मिली।

देहरादून। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित हुई मंत्रिमंडल बैठक ने राज्य प्रशासन और वित्तीय रणनीति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णयों की नींव रख दी। इस बैठक में कुल 28 प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर भी सहमति बनी। बजट में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 1.11 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। मंत्रिमंडल ने बजट में आवश्यक संशोधनों और सुधारों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पूर्ण अधिकार भी प्रदान किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल राशि की दृष्टि से नहीं, बल्कि राज्य के विकास, जनकल्याण और आर्थिक मजबूती की दिशा में एक संकेत है। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, उद्योग और जलापूर्ति जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने वाले कई निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हुई इस बैठक में शिक्षा क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शैक्षणिक सुधारों और शोध प्रोत्साहन योजनाओं के तहत 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इस कदम से न केवल उच्च शिक्षा का स्तर उन्नत होगा, बल्कि युवा शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। साथ ही, स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड पुस्तकालय योजना को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य के पुस्तकालयों में डिजिटल संसाधनों और आधुनिक साहित्य का समावेश होगा। यह पहल छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान के नए द्वार खोलेगी और उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी।

बैठक के दौरान प्रशासनिक ढांचे में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। उत्तराखंड वन विभाग की सर्वेक्षक सेवा नियमावली 2010 में संशोधन, शहरी विकास विभाग के तहत प्रदेश के सभी 11 नगर निगमन में पर्यावरण अभियंता के पद सृजित करना, और संविदा के आधार पर पर्यावरण अभियंताओं की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, यूआईआईडीबी के ढांचे में 14 नए पद सृजित किए गए और सहायक महाप्रबंधक लेखा/लेखाकार व ऑफिस बॉय के मानदेय में भी संशोधन किया गया। इन प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य न केवल विभागों की कार्यकुशलता बढ़ाना है, बल्कि जनता को बेहतर और तेज़ सेवाएं प्रदान करना भी है।

स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी मंत्रिमंडल ने कई महत्वाकांक्षी निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान- बाल पालाश योजना के तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्रियों में नवीन पोषक तत्वों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसी तरह, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना में अंडा, दूध और केले के साथ अन्य पोषक खाद्य पदार्थों को भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य के बच्चों और महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और पोषण स्तर में सुधार की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है। मंत्रिमंडल ने यह सुनिश्चित किया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से हो।

वित्तीय और कराधान संबंधी सुधारों को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। उत्तराखंड में माल और सेवा कर अपीलीय अधिकरण की राज्यपीठ को देहरादून में यथावत रखने के साथ हल्द्वानी में अतिरिक्त राज्य पीठ स्थापित करने, और उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक को विधानसभा में पुनर्स्थापित करने की मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को औद्योगिक विकास से वित्त विभाग में स्थानांतरित करने और वित्तीय निगरानी के लिए नए ढांचे का गठन भी स्वीकृत किया गया। राज्य के कराधान प्रणाली को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए ये कदम महत्वपूर्ण हैं।

जलापूर्ति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी मंत्रिमंडल ने ठोस कदम उठाए। विश्व बैंक पोषित उत्तराखंड दक्ष जलापूर्ति कार्यक्रम के क्रियान्वयन को मंजूरी दी गई और राज्य में उपचारित जल के सुरक्षित पुनरू उपयोग हेतु नीति 2026 को अपनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह क और ख के कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली 2026 का प्रख्यापन भी स्वीकृत किया गया। इन कदमों से राज्य में जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाईल स्टोन क्रेशर, पल्वराइज़र प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट और रेडीमिक्स प्लांट की स्थापना के लिए दूरी मानकों में संशोधन करने को भी मंजूरी मिली। यह पहल निर्माण क्षेत्र और स्थानीय उद्योगों के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। मंत्रिमंडल ने इन सभी संशोधनों के लिए व्यापक चर्चा के बाद सहमति दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार विकास और औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी गंभीरता से ले रही है।

सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने कई अहम निर्णय लिए। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत राज्य स्तरीय चयन समिति के अध्यक्ष और गैर सरकारी सदस्यों के लिए मानदेय निर्धारित किया गया। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग में लिपिक/मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के पदों के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही, देहरादून, काशीपुर और नैनीताल में तीन अतिरिक्त फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना और संबंधित पदों का सृजन किया गया। इससे न्याय प्रणाली में तेजी और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

न्यायिक सुधारों में नैनीताल हाईकोर्ट और अन्य जिला न्यायालयों के लिए नए न्यायालय प्रबंधकों के पद सृजित किए गए। विश्व बैंक के सहयोग से च्नइसपब थ्पदंदबपंस डंदंहमउमदज के सुधार और बेहतर सेवा वितरण के लिए ैजममतपदह ब्वउउपजजमम और च्तवरमबज डंदंहमउमदज न्दपज का गठन और पद सृजन की भी मंजूरी बैठक में दी गई। इसके अलावा, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 को भी मंजूरी मिली। मंत्रिमंडल ने यह स्पष्ट किया कि राज्य की न्यायपालिका और प्रशासनिक ढांचे में सुधार के लिए यह पहल आवश्यक है।

शिक्षा क्षेत्र में विशेष ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तदर्थ/अनुबंध/संविदा आधार पर कार्यरत 04 विशेष शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक (एलटी) विशेष शिक्षा शिक्षक के पदों के सापेक्ष नियमित नियुक्ति की मंजूरी दी गई। इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता और गुणवत्ता में सुधार होगा। मंत्रिमंडल के सदस्य सुबोध उनियाल ने कहा कि बैठक में कुल 32 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से 28 प्रस्तावों पर मुहर लगी। आगामी विधानसभा बजट सत्र में पेश होने वाले बजट पर भी विस्तार से चर्चा की गई और बजट में संशोधन करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया गया।

बैठक का समग्र विश्लेषण बताता है कि उत्तराखंड सरकार आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, न्यायिक सुधार और पर्यावरणीय स्थिरता के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलापूर्ति, पर्यावरण संरक्षण और न्यायिक सुधार के क्षेत्र में लिए गए निर्णय यह संकेत देते हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व में राज्य सतत विकास की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है। बजट में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी और इसके साथ लिए गए विभिन्न सुधारात्मक कदम यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार न केवल विकास पर ध्यान दे रही है, बल्कि आम जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए ठोस नीति और कार्यान्वयन पर भी फोकस कर रही है।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!