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धामी कैबिनेट का महाधमाका प्रचंड निर्णयों की बौछार से उत्तराखंड में विकास और सुशासन का ऐतिहासिक आगाज़

उत्तराखंड में धामी सरकार का ऐतिहासिक मास्टरस्ट्रोक जिसने 16 बड़े फैसलों से युवाओं पूर्व सैनिकों और किसानों की तकदीर बदल दी है अब देवभूमि में विकास की नई क्रांति और रोजगार के सुनहरे अवसरों का शंखनाद।

देहरादून।उत्तराखंड की पावन धरती पर सत्ता के गलियारों में आज उस वक्त एक नई ऊर्जा का संचार देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के पश्चात पहली बार पूर्णकालिक कैबिनेट बैठक का आयोजन किया। सचिवालय के मुख्य कक्ष में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में न केवल प्रशासनिक दक्षता की झलक देखने को मिली, बल्कि राज्य के भविष्य को संवारने वाले 16 अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहितकारी प्रस्तावों पर भी आधिकारिक मुहर लगा दी गई। इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग, चाहे वह न्यायपालिका के कर्मचारी हों, पुलिस भर्ती के इच्छुक युवा हों, अन्नदाता किसान हों या फिर देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिक और अग्निवीर हों, सभी के हितों को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के ध्येय वाक्य पर चलते हुए उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह बैठक राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह सरकार की पहली सामूहिक शक्ति प्रदर्शन जैसी स्थिति थी, जहाँ विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी की गई।

उत्तराखंड के न्यायिक तंत्र को आधुनिकता की ओर ले जाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के क्रम में न्याय विभाग से जुड़े प्रस्तावों ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। धामी कैबिनेट ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए न्यायिक अधिकारियों को ई-व्हीकल (इलेक्ट्रिक वाहन) की खरीद पर विशेष ब्याज छूट देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे सरकार की मंशा प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण को कम करना और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, न्याय विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक विशेष वित्तीय राहत का प्रावधान किया गया है। अब विभाग के कर्मचारी अत्यंत ‘नॉमिनल’ यानी नाममात्र की ब्याज दरों पर 10 लाख रुपए तक का सॉफ्ट लोन प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा कर्मचारियों को उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने में न केवल आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि विभाग के भीतर कार्यकुशलता और मनोबल को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। राज्य सरकार का यह फैसला दर्शाता है कि वह अपने प्रशासनिक और न्यायिक स्तंभों को मजबूत करने के लिए कितनी गंभीर है, जिससे अंततः आम जनता को मिलने वाली न्याय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

ऊर्जा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्तावों को कैबिनेट ने व्यापक चर्चा के बाद मंजूरी दी है। बैठक में फ्री बिजली योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सब्सिडी और उसकी उचित वसूली के लिए एक नए ‘सब्सिडी-वसूली एक्ट’ को पारित किया गया है। यह कानून राज्य की बिजली व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने और राजस्व के नुकसान को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके साथ ही, कैबिनेट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में दी जा रही बिजली सब्सिडी का लाभ केवल 31 मार्च 2025 तक ही मान्य होगा। इस निश्चित समय सीमा के निर्धारण से सरकार को अपनी भविष्य की ऊर्जा नीतियों और बजट प्रबंधन में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विभाग का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे न केवल बिजली की बर्बादी पर लगाम लगेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि सरकारी खजाने का पैसा वास्तव में उन पात्र लाभार्थियों तक पहुँचे जिन्हें इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। सरकार के इस सख्त लेकिन जरूरी फैसले से बिजली निगमों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रदेश के दुर्गम इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास और सड़कों के जाल को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से बिछाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यसंचालन में बड़े बदलाव की स्वीकृति दी गई है। अब विभाग में 1 करोड़ रुपए से अधिक की कंसल्टेंसी रिपोर्ट को पास करने की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बना दिया गया है। पूर्व में जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण बड़े प्रोजेक्ट्स की डीपीआर और तकनीकी जांच में लंबा समय लगता था, जिससे लागत में वृद्धि और निर्माण में देरी होती थी। कैबिनेट के इस नए निर्णय से अब विशेषज्ञों की राय और परामर्श लेने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे पुलों, राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा हो सकेगा। यह कदम न केवल राज्य की कनेक्टिविटी को सुधारेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी एक नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कंसल्टेंसी के चयन में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और केवल उन फर्मों को ही जिम्मेदारी दी जाए जिनका ट्रैक रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा हो, ताकि राज्य के आधारभूत ढांचे की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न हो सके।

प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक गतिशील बनाने के लिए वन विभाग और कार्मिक विभाग के सेवा नियमों में बड़ा समन्वय स्थापित किया गया है। पूर्व की व्यवस्था के अनुसार, वन विभाग में मुख्य प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम 25 वर्ष की सेवा का कड़ा प्रावधान था, जबकि कार्मिक विभाग में यह सीमा केवल 22 वर्ष थी। इस विसंगति के कारण वन विभाग के कई अनुभवी और योग्य अधिकारी समय पर पदोन्नति पाने से वंचित रह जाते थे, जिसका सीधा असर विभाग की कार्यक्षमता पर पड़ता था। अब धामी कैबिनेट ने कार्मिक विभाग की तर्ज पर वन विभाग में भी मुख्य प्रशासनिक पदों हेतु न्यूनतम सेवा की सीमा को घटाकर 22 वर्ष करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस बदलाव से विभाग के भीतर लंबे समय से चली आ रही असंतोष की भावना समाप्त होगी और युवा अधिकारियों को नेतृत्व करने का अवसर पहले मिल सकेगा। प्रशासन में इस तरह का एकीकरण (Uniformity) सरकार की उस सोच को दर्शाता है जहाँ वह विभागीय मतभेदों को मिटाकर एक एकीकृत कार्यप्रणाली विकसित करना चाहती है।

राज्य की कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और भविष्योन्मुख बनाने के लिए गृह विभाग के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण नियमावलियों को हरी झंडी दिखाई गई है। देश भर में लागू हुई नई ‘भारतीय न्याय संहिता’ के आलोक में उत्तराखंड पुलिस और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया गया है। इसके अलावा, उत्तराखंड होमगार्ड के लिए एक नई समर्पित नियमावली तैयार की गई है, जो इस बल को और अधिक अनुशासित और सुविधायुक्त बनाएगी। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय कार्मिक विभाग द्वारा पुलिस भर्ती को लेकर लिया गया है। पूर्व में सिपाही और उप निरीक्षक (SI) के पदों के लिए आयु सीमा और मानकों में जो बदलाव किए गए थे, उसके बाद कई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए थे। अब सरकार ने उन युवाओं को एक और सुनहरा अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिन्हें बदली हुई आयु सीमा के कारण मौका नहीं मिल पाया था। इस फैसले का लाभ पुलिस, पीएसी (PAC), अग्निशमन विभाग और प्लाटून कमांडर जैसे विभिन्न संवर्गों में भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हजारों युवाओं को मिलेगा। यह निर्णय युवाओं के प्रति धामी सरकार की संवेदनशीलता और रोजगार सृजन के प्रति उनकी कटिबद्धता का जीता-जागता प्रमाण है।

शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायता प्राप्त (एडेड) स्कूलों की वर्तमान स्थिति, वहां कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं का गहन अध्ययन करने के लिए एक विशेष ‘मंत्रिमंडलीय उप समिति’ के गठन का निर्णय लिया गया है। यह समिति एडेड स्कूलों के ढांचागत सुधार और वहां की शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अपनी सिफारिशें देगी। इसके साथ ही, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के प्रीमियम के भुगतान और उससे जुड़ी शर्तों के संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिस पर कैबिनेट ने सकारात्मक रुख अपनाया है। सरकार का उद्देश्य राज्य में निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थानों में एक उच्च मानक स्थापित करना है, ताकि उत्तराखंड को ‘एजुकेशन हब’ के रूप में विकसित किया जा सके। इन फैसलों से न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाले छात्रों के भविष्य के लिए भी एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।

अन्नदाताओं की समृद्धि और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए लक्ष्यों को कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है। इस वर्ष राज्य से 2.2 लाख मैट्रिक टन अनाज (धान और गेहूँ) की खरीद का एक विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि गेहूँ और धान की खरीद पर भारत सरकार जितना प्रतिशत मंडी शुल्क दे रही है, उतना ही अतिरिक्त प्रतिशत राज्य सरकार भी वहन करेगी। इस निर्णय से किसानों की जेब में सीधा आर्थिक लाभ पहुँचेगा और उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के मिश्रित भूगोल वाले राज्य में कृषि ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों के कल्याण के लिए किए गए इस प्रावधान से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और युवाओं का रुझान फिर से खेती-किसानी की ओर लौटेगा।

वीर भूमि उत्तराखंड के वीर सपूतों और स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए उत्तराखंड वीर उद्यमी योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए हैं। मंत्रिमंडल ने इन योजनाओं के तहत निर्धारित वार्षिक लक्ष्यों में 10% की अतिरिक्त वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों और ‘अग्निवीर’ योजना के तहत अपनी सेवा पूर्ण कर लौटने वाले युवाओं के लिए इन स्वरोजगार योजनाओं में विशेष आरक्षण (रिजर्वेशन) का प्रावधान किया गया है। इन श्रेणियों के आवेदकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 5% अतिरिक्त सब्सिडी देने का भी संकल्प लिया है। इसका अर्थ यह है कि अब हमारे पूर्व सैनिक और युवा अग्निवीर अपनी दूसरी पारी में न केवल खुद उद्यमी बनेंगे, बल्कि अन्य स्थानीय लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकेंगे। धामी कैबिनेट का यह फैसला उन लोगों के प्रति एक सम्मान है जिन्होंने राष्ट्र रक्षा में अपना योगदान दिया है। यह कदम राज्य में सूक्ष्म और लघु उद्योगों के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा।

नियोजन और भविष्य की रणनीतियों को लेकर नियोजन विभाग के अंतर्गत ‘सेतु आयोग’ (SETU) की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर कैबिनेट ने अपना विस्तृत अनुमोदन प्रदान किया है। नीति आयोग की तर्ज पर बनाया गया यह ‘सेतु आयोग’ राज्य के विकास के लिए एक थिंक-टैंक के रूप में कार्य करेगा, जो विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और भविष्य की परियोजनाओं का खाका तैयार करेगा। आयोग की टच (Touch) यानी पहुंच और उसके कार्यक्षेत्र को और अधिक व्यापक बनाया गया है ताकि विकास का लाभ राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच सके। इसके अतिरिक्त, संसदीय परंपराओं का निर्वहन करते हुए मंत्रिमंडल ने पंचम विधानसभा के सत्रावसान की प्रक्रिया को भी विधिवत मंजूरी दे दी है। इस बैठक के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका ध्यान केवल तात्कालिक समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक विकास के रोडमैप पर भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहली ‘फुल कैबिनेट’ बैठक ने उत्तराखंड के प्रशासनिक और विकासोन्मुख इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 16 बड़े फैसलों की यह सूची केवल कागज पर उकेरे गए प्रस्ताव नहीं हैं, बल्कि ये लाखों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं और सपनों को साकार करने की दिशा में उठाए गए मजबूत कदम हैं। चाहे वह कर्मचारियों को सस्ते ऋण की सुविधा हो, पुलिस भर्ती में दोबारा मौका देना हो, या फिर पूर्व सैनिकों के लिए सब्सिडी का प्रावधान, हर निर्णय में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की झलक मिलती है। सरकार की इस तत्परता ने विपक्ष को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है और जनता के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से चला गया है कि धामी सरकार अपने कार्यों के प्रति कितनी संजीदा है। अब चुनौती इन फैसलों के धरातल पर क्रियान्वयन की है, जिस पर मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय सचिवों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। उत्तराखंड की यह विकास यात्रा अब एक नए आयाम की ओर अग्रसर है।

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