काशीपुर। जनसेवा और प्रशासनिक सक्रियता का अनोखा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब नगर निगम काशीपुर परिसर में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के अंतर्गत एक भव्य बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। नागरिक सुविधाओं को घर-घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में नगर के प्रथम नागरिक दीपक बाली की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों ने एक ही मंच पर एकत्र होकर जनता की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया। शिविर में बड़ी संख्या में नागरिक अपने दस्तावेजों और शिकायतों के साथ पहुंचे, जहां अधिकारियों ने सीधे संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की पहल की। आयोजन के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि उन योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। कार्यक्रम में लगे विभागीय स्टॉलों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि नागरिकों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक सजग हो चुके हैं।
सरकारी योजनाओं को आम जनता तक सीधे पहुंचाने की इस पहल को लेकर नगर में उत्साह का वातावरण दिखाई दिया, जहां नागरिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर ही लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने योजनाओं से संबंधित आवेदन पत्र भरवाने से लेकर दस्तावेजों की जांच तक सभी औपचारिकताओं को सरल और पारदर्शी तरीके से पूरा किया। कार्यक्रम का संचालन इस प्रकार किया गया कि प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्या रखने का अवसर मिले और उसे संबंधित विभाग से समाधान प्राप्त हो सके। आयोजन स्थल पर सामाजिक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने शिविर को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ अपने अनुभव भी साझा किए। नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि इस प्रकार के शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। मंच पर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने भी नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाना है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं बल्कि जनता और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत करने का माध्यम भी है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस प्रकार के शिविरों में भाग लें और अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखें। उनके संबोधन के दौरान नागरिकों में उत्साह दिखाई दिया और कई लोगों ने योजनाओं के लाभ से जुड़ी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी साझा कीं। आयोजन स्थल पर मौजूद जनसमूह ने यह विश्वास जताया कि प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।

प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हुए नगर आयुक्त रविन्द्र सिंह बिष्ट ने शिविर में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और योजनाओं के लाभ को सरल प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। आयोजन के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे शिविर के बाद भी क्षेत्र में भ्रमण कर ऐसे लोगों तक पहुंचें जो किसी कारणवश शिविर में उपस्थित नहीं हो सके। उनके इस निर्देश को प्रशासनिक सक्रियता का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे योजनाओं का प्रभाव अधिक व्यापक हो सकेगा।
शिविर में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह ने नागरिकों की शिकायतों को सुनकर संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर जनता की समस्याओं को मौके पर हल करने का प्रभावी माध्यम हैं और प्रशासन इसे गंभीरता से लागू कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की देरी न करें और प्रत्येक मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल करें। कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने प्रशासन की इस सक्रियता की सराहना की और कहा कि इससे सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास मजबूत होता है। उनके नेतृत्व में कई शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया, जिससे लोगों को राहत मिली और शिविर की उपयोगिता स्पष्ट रूप से सामने आई।
शिविर में प्रशासनिक सहयोग प्रदान करते हुए तहसीलदार पंकज चंदोला ने राजस्व विभाग से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने की पहल की। उन्होंने नागरिकों से संवाद करते हुए कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सरलता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। शिविर के दौरान कई नागरिकों ने अपने भूमि विवाद और प्रमाण पत्र से संबंधित समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर समाधान करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में राजस्व विभाग के स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक उनकी समस्याओं को सुना। इससे नागरिकों में प्रशासन के प्रति सकारात्मक संदेश गया और लोगों ने इस पहल को सराहनीय बताया।
नगर निगम प्रशासन की ओर से सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल और शालिनी नेगी ने शिविर के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि नगर निगम का प्रयास है कि शहरी क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को स्वच्छता, पेयजल, आवास और अन्य सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों। शिविर के दौरान कई लोगों ने नगर निगम से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें सफाई व्यवस्था, जल निकासी और सड़क मरम्मत जैसे मुद्दे शामिल थे। अधिकारियों ने नागरिकों को आश्वासन दिया कि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्वास्थ्य निरीक्षक मनोज बिष्ट ने शिविर में चिकित्सा सुविधाओं और जनस्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक करते हुए कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। शिविर में स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाती है।
स्थानीय विकास को गति देने और सामाजिक सहभागिता को सशक्त बनाने में ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा की मौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम की प्रभावशीलता को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि दोनों क्षेत्रों की समस्याएं और जरूरतें अलग-अलग होते हुए भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ी रहती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के जनसहभागिता आधारित शिविर ग्रामीण और शहरी नागरिकों को एक समान मंच उपलब्ध कराते हैं, जिससे योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ बिना किसी भेदभाव के लोगों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सरकारी योजनाओं से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है। महिलाओं ने कहा कि इन योजनाओं ने उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास दिया है और समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जिला प्रशासन की ओर से अभियान को विस्तार देने के लिए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया द्वारा विशेष निर्देश जारी किए गए थे। प्रशासनिक आदेश के अनुसार यह अभियान पहले 31 जनवरी 2026 तक निर्धारित था, लेकिन शासन के निर्देशों के बाद इसे 20 फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है जहां अब तक प्रशासनिक सेवाएं सीमित रूप से पहुंच पाई थीं। जिला प्रशासन का मानना है कि अभियान की अवधि बढ़ाने से अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ मिल सकेगा और योजनाओं की पहुंच व्यापक होगी।
शिविर में विभिन्न विभागों की सक्रिय सहभागिता इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही, जहां राजस्व, ग्राम्य विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास तथा शहरी विकास सहित कुल 24 विभागों ने अपने स्टॉल लगाकर नागरिकों को योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शिविर समाप्त होने के बाद भी क्षेत्र में भ्रमण कर पात्र व्यक्तियों के आवेदन भरवाएं ताकि कोई भी नागरिक योजनाओं से वंचित न रह सके। इस पहल को प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है, जहां सभी विभागों ने एक साथ मिलकर कार्य किया।

कार्यक्रम के दौरान श्रम विभाग द्वारा जरूरतमंद लोगों को कंबल और छतरी वितरित किए गए, जिससे शिविर का सामाजिक सरोकार और अधिक मजबूत हुआ। वितरण कार्यक्रम के दौरान कई जरूरतमंद परिवारों ने प्रशासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार की सहायता उन्हें कठिन परिस्थितियों में राहत प्रदान करती है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं बल्कि जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी है। इस पहल ने शिविर को जनसेवा के व्यापक मंच में बदल दिया।
शिविर में कुल 185 शिकायतों का पंजीकरण कर उनका मौके पर निस्तारण किया गया, जिसे प्रशासनिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। नागरिकों ने बताया कि पहले उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन इस शिविर के माध्यम से उन्हें एक ही स्थान पर समाधान मिल गया। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के शिविर जनता और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करते हैं और शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन की सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य करें तो विकास कार्यों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।





