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जिन्न तंत्र के नाम पर करोड़ों की ठगी उजागर फर्जी मौलाना गिरोह पर पुलिस का शिकंजा

धार्मिक आस्था और चमत्कार का झांसा देकर ग्रामीणों की मेहनत की कमाई हड़पने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ पुलिस जांच में करोड़ों की ठगी और कई जिलों तक फैले नेटवर्क के चौंकाने वाले खुलासे।

काशीपुर। उधम सिंह नगर जिले में सामने आई यह घटना केवल एक ठगी का मामला नहीं, बल्कि समाज में गहराई तक फैले अंधविश्वास, लालच और भय के खतरनाक गठजोड़ का भयावह उदाहरण बनकर उभरी है। उधम सिंह नगर के काशीपुर क्षेत्र में कोतवाली आईटीआई पुलिस द्वारा जिस फर्जी मौलाना बाबा और उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया है, उसने धार्मिक आस्था की आड़ में लोगों की जिंदगी भर की कमाई को लूटने का संगठित खेल रचा। इस पूरे मामले ने न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में सनसनी फैलाई, बल्कि यह भी उजागर किया कि किस तरह चमत्कार, जिन्न और तंत्र-मंत्र जैसे शब्द आज भी लोगों की सोच को जकड़ लेते हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से लोगों के बीच रहकर भरोसा जीतता रहा और उसी भरोसे को हथियार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देता रहा।

काशीपुर के आईटीआई कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बांसखेड़ा खुर्द के रहने वाले महिला और पुरुष जब एक साथ थाने पहुंचे, तो पुलिस भी इस शिकायत की गंभीरता को समझने पर मजबूर हो गई। पीड़ितों ने बताया कि गांव में रहने वाला एक व्यक्ति, जो मूल रूप से रामपुर का निवासी था, लंबे समय से खुद को धार्मिक और सिद्ध पुरुष बताकर लोगों के बीच सक्रिय था। उसने धीरे-धीरे ग्रामीणों से मेलजोल बढ़ाया, उनके पारिवारिक मामलों में रुचि दिखाई और खुद को मददगार साबित किया। इसी दौरान उसने यह दावा करना शुरू किया कि उसके पास जिन्न को काबू में करने की शक्ति है और वह जिन्न के माध्यम से लोगों का पैसा दोगुना कर सकता है। शुरुआत में कुछ चुनिंदा लोगों को उसने तय समय पर अधिक रकम लौटाई, जिससे उसकी बातों पर लोगों का विश्वास और गहरा हो गया।

जैसे-जैसे यह खबर फैली कि किसी व्यक्ति ने पैसा लगाकर दोगुना प्राप्त किया है, वैसे-वैसे गांव और आसपास के इलाकों से लोग उसके पास पहुंचने लगे। आरोपी ने इस पूरे खेल को बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया। उसने तंत्र-मंत्र, रहस्यमयी पूजा-पाठ, धूप-दीप और डरावने कथनों का सहारा लिया, ताकि लोग सवाल न पूछ सकें। जिन्न का नाम लेकर उसने लोगों के मन में यह भय बैठाया कि यदि तय नियमों का पालन नहीं किया गया या किसी ने बात बाहर बताई, तो अनहोनी हो सकती है। इस मानसिक दबाव के कारण कई लोग अपनी समझ-बूझ खो बैठे और अपनी मेहनत की कमाई आरोपी के हवाले कर दी। पुलिस को दिए गए बयानों में पीड़ितों ने बताया कि कुछ लोगों ने जमीन बेचकर, तो कुछ ने कर्ज लेकर इस उम्मीद में पैसे दिए कि थोड़े समय में उनकी आर्थिक स्थिति सुधर जाएगी।

आरोपी ने ठगी के इस नेटवर्क को और फैलाने के लिए अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी शामिल किया। उसने उनसे कहा कि वे अपने जानने वालों को पैसे दोगुना कराने के लिए लेकर आएं, ताकि सभी को फायदा हो सके। इस लालच ने देखते ही देखते ठगी के दायरे को कई गुना बढ़ा दिया। लोग एक-दूसरे को देखकर भरोसा करने लगे और किसी को यह आभास तक नहीं हुआ कि वे एक बड़े जाल में फंसते जा रहे हैं। जब बड़ी संख्या में लोगों की रकम जमा हो गई, तो आरोपी ने भुगतान करना बंद कर दिया। शुरुआत में वह टालमटोल करता रहा, लेकिन जब दबाव बढ़ा, तो उसने पीड़ितों को धमकाना शुरू कर दिया।

पीड़ितों के अनुसार, जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं और झूठे मामलों में फंसाने की चेतावनी भी दी गई। इस डर के कारण कई लोग लंबे समय तक चुप रहे, लेकिन जैसे-जैसे ठगी की घटनाएं बढ़ती गईं और अलग-अलग परिवारों पर इसका असर दिखने लगा, तब लोगों ने एकजुट होकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि आरोपी केवल काशीपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश के भोजपुर और सैफनी क्षेत्रों में भी इसी तरह लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इससे यह साफ हो गया कि यह कोई आकस्मिक अपराध नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित ठगी का नेटवर्क है।

शिकायत सामने आते ही कोतवाली आईटीआई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और उच्च अधिकारियों को जानकारी दी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 351(2) और 352 बीएनएस के तहत मामला पंजीकृत कर जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने पीड़ितों के बयान दर्ज किए, लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने ठिकानों पर ताले लगाकर फरार होने की कोशिश कर रहा है।

पुलिस ने लगातार दबिश दी और तकनीकी व मानवीय सूचनाओं के आधार पर आखिरकार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिनसे यह संकेत मिला कि ठगी की कुल राशि 25 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है। इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंधविश्वास और लालच जब मिल जाते हैं, तो वे समाज को कितनी गहरी चोट पहुंचा सकते हैं।

पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ इस पूरे ठगी कांड की परतें एक-एक कर खुलती चली गईं। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने केवल आर्थिक लालच ही नहीं, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं और मानसिक कमजोरियों को भी अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। जिन्न और तंत्र-मंत्र के नाम पर ऐसा भय का वातावरण तैयार किया गया कि पीड़ितों को यह लगने लगा था कि यदि उन्होंने सवाल उठाया या पुलिस के पास जाने की कोशिश की, तो उनके परिवार पर कोई अनहोनी घट सकती है। कई पीड़ितों ने यह भी बताया कि आरोपी अक्सर आधी रात को बुलाकर विशेष पूजा कराने की बात करता था, ताकि रहस्य बना रहे और कोई बाहरी व्यक्ति उस गतिविधि को न देख सके। इस प्रकार की गतिविधियों ने लोगों के मन में रहस्यमय शक्ति का भ्रम पैदा कर दिया, जिससे वे पूरी तरह उसके वश में होते चले गए।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद को साधारण व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता था। वह न तो महंगे कपड़े पहनता था और न ही खुलकर धन का प्रदर्शन करता था, ताकि किसी को शक न हो। यह सादगी दरअसल उसकी सबसे बड़ी चाल थी, जिससे लोग उसे ईमानदार और भरोसेमंद मान बैठे। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग स्थानों पर समय-समय पर ठिकाने बदलता रहता था और नए इलाकों में जाकर वही पुराना तरीका अपनाता था। उत्तर प्रदेश के भोजपुर और सैफनी क्षेत्रों में भी उसने इसी तरह लोगों को चमत्कार दिखाकर विश्वास में लिया और फिर बड़ी रकम समेटकर वहां से निकल गया। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी के संपर्क अन्य राज्यों तक भी हो सकते हैं, जिनकी कड़ियां अब जोड़ी जा रही हैं।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जो चौंकाने वाले थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि शुरुआत में कुछ लोगों को पैसा दोगुना लौटाना उनके गिरोह की रणनीति का हिस्सा था, ताकि बाजार में उनकी साख बन सके। इसके बाद वे ज्यादा से ज्यादा लोगों से रकम इकट्ठा करते थे और एक समय पर अचानक गायब हो जाते थे। इस मामले में हालांकि वे समय रहते पकड़े गए, लेकिन पुलिस का मानना है कि यदि यह गिरोह और कुछ समय तक सक्रिय रहता, तो ठगी की रकम कई गुना बढ़ सकती थी। पीड़ितों के अनुसार, कुछ लोगों ने अपनी बेटियों की शादी के लिए जमा की गई रकम तक इस झांसे में आकर दे दी, जिससे उनके सामने गंभीर पारिवारिक संकट खड़ा हो गया।

जांच के दौरान पुलिस को कई पीड़ित ऐसे भी मिले, जिन्होंने सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से अब तक शिकायत नहीं की थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे मामला सार्वजनिक हुआ, वैसे-वैसे और भी लोग सामने आ सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने अपील की है कि जिन लोगों के साथ इस तरह की ठगी हुई है, वे बिना डर के आगे आएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं। प्रशासन का कहना है कि सभी पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें पूरा कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। इस ठगी कांड ने यह भी उजागर किया है कि कैसे संगठित गिरोह धार्मिक पहचान की आड़ लेकर कानून को चुनौती देते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। गांवों और कस्बों में लोग एक-दूसरे को इस तरह के झांसे से बचने की सलाह देने लगे हैं। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा है कि शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण लोग आज भी ऐसे अंधविश्वास में फंस जाते हैं। कई लोगों का मानना है कि यदि समय रहते लोगों को ऐसे ढोंगियों के बारे में जागरूक किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। पुलिस प्रशासन ने भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस प्रकार की ठगी रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों की रकम की बरामदगी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी से प्राप्त धन कहां-कहां निवेश किया गया या किस माध्यम से उसे इधर-उधर किया गया। बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। यदि धन की बरामदगी होती है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को लौटाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि पुलिस यह भी स्पष्ट कर रही है कि इस प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा। यह मामला समाज के लिए एक कड़वी सीख भी लेकर आया है। लालच और चमत्कार के सपने किस तरह लोगों की मेहनत की कमाई को पल भर में खत्म कर सकते हैं, इसका यह जीता-जागता उदाहरण है। पुलिस और प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के पैसे दोगुना करने, अलौकिक शक्ति या चमत्कार के दावों पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। यदि कोई इस तरह का दावा करता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानें और पुलिस को सूचना दें। इस ठगी कांड के उजागर होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि लोग अब ज्यादा सतर्क होंगे और ऐसे गिरोहों के लिए जमीन तैयार नहीं होने देंगे।

अंततः, उधम सिंह नगर जिले में सामने आया यह ठगी कांड केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के सामने आई एक बड़ी चुनौती है। अंधविश्वास, डर और लालच के खिलाफ सामूहिक जागरूकता ही इसका स्थायी समाधान है। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को कानून के कठोरतम प्रावधानों के तहत सजा दिलाई जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना एक चेतावनी है कि जब तक लोग विवेक और जागरूकता को नहीं अपनाएंगे, तब तक ऐसे शातिर लोग नए-नए रूप में सामने आते रहेंगे।

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