काशीपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर की काशीपुर कोतवाली परिसर उस समय जनविश्वास और संवाद का जीवंत केंद्र बन गया, जब यहां आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में नव नियुक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति का नागरिकों ने खुले दिल से स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत से ही माहौल सकारात्मक, उम्मीदों से भरा और सहभागिता से ओतप्रोत दिखाई दिया। नगर निगम के पार्षद, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रधान और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद ही समस्याओं के समाधान की सबसे मजबूत नींव है। एसएसपी अजय गणपति के आगमन को जिले के लिए नई शुरुआत के रूप में देखा गया, जहां कानून व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जगी। लोगों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुलिसिंग तभी प्रभावी हो सकती है जब जनता को यह भरोसा हो कि उनकी बात सुनी जाएगी और सम्मान के साथ उस पर कार्रवाई होगी। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों ने बेझिझक अपनी समस्याएं रखीं और उम्मीद जताई कि नया नेतृत्व जिले में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल कायम करेगा।
कार्यक्रम के दौरान नगर निगम के पार्षदों ने एक स्वर में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे हजारों नागरिकों की आवाज हैं, इसलिए उनकी बात को गंभीरता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। पार्षदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून के तहत कार्रवाई सभी के लिए समान होनी चाहिए, लेकिन जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद और व्यवहार में संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने यह अपेक्षा जताई कि जब कोई पार्षद या प्रतिनिधि थाने या प्रशासनिक कार्यालय में अपनी बात रखने पहुंचे, तो उसे नजरअंदाज न किया जाए। उनका कहना था कि प्रत्येक वार्ड में हजारों लोग रहते हैं और पार्षद उनके दुख-सुख का सेतु होता है। यदि उस सेतु को ही सम्मान न मिले, तो जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि काशीपुर जैसे शहर में भाईचारा और सामाजिक सौहार्द की गहरी परंपरा रही है, जिसे बनाए रखने के लिए पुलिस और जनप्रतिनिधियों का तालमेल बेहद आवश्यक है। पार्षदों ने उम्मीद जताई कि नए एसएसपी के नेतृत्व में संवाद की यह संस्कृति और मजबूत होगी और प्रशासन-जनता के बीच दूरी कम होगी।

जनसंवाद में सबसे गंभीर और भावनात्मक मुद्दा नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर उठा। वक्ताओं ने बताया कि शहर और आसपास के इलाकों में छोटे-छोटे स्तर पर नशा बेचने वाले लोग खुलेआम समाज को खोखला कर रहे हैं। नागरिकों का कहना था कि पुलिस कई बार ऐसे लोगों को पकड़ती है, लेकिन कानूनी सीमाओं के कारण वे जल्दी छूट जाते हैं और दोबारा उसी गतिविधि में लग जाते हैं। वक्ताओं ने तर्क दिया कि यही छोटे नशा विक्रेता चोरी, घरेलू हिंसा और सामाजिक अस्थिरता की जड़ बनते जा रहे हैं। बड़े सप्लायर पर्दे के पीछे रहकर नेटवर्क चलाते हैं और छोटे लोग समाज में जहर घोलते हैं। नागरिकों ने मांग की कि कानून में ऐसे प्रावधान हों, जिनसे छोटे स्तर पर नशा बेचने वालों पर भी कठोर कार्रवाई संभव हो सके। उनका कहना था कि यदि नशे की सप्लाई चेन के हर स्तर पर सख्ती नहीं होगी, तो समस्या जड़ से खत्म नहीं हो सकती। इस मुद्दे पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की चिंता और आक्रोश साफ झलक रहा था।
रेलवे क्रॉसिंग और बाहरी तत्वों की समस्या को लेकर भी नागरिकों ने खुलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। स्थानीय लोगों ने बताया कि देर रात रेलवे क्रॉसिंग के आसपास असामाजिक गतिविधियां आम हो गई हैं। शराबखोरी, तेज डीजे, सड़क पर अव्यवस्थित जमावड़ा और डर का माहौल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। सुबह तड़के यात्रा करने वालों को असुरक्षा का एहसास होता है और कई बार टकराव की स्थिति भी बन जाती है। नागरिकों ने कहा कि साल में कई बार यहां घटनाएं घटती हैं, जिससे क्षेत्र की छवि खराब होती है। उन्होंने स्थायी समाधान, नियमित गश्त और सत्यापन अभियान की मांग की, ताकि बाहरी तत्वों पर नजर रखी जा सके। लोगों का कहना था कि अस्थायी कार्रवाई से समस्या कुछ दिनों के लिए दब जाती है, लेकिन जड़ से समाधान के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। इस मुद्दे पर एसएसपी से सख्त और निरंतर कदम उठाने की अपील की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने जमीन से जुड़ी ठगी के मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए भोले-भाले लोगों को जमीन दिखाकर लाखों रुपये की ठगी की जा रही है। कई मामलों में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई में देरी होती है, जिससे ठगों के हौसले बढ़ते हैं। ग्रामीण प्रतिनिधियों का कहना था कि इस तरह के अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में अविश्वास और तनाव भी पैदा करते हैं। उन्होंने एसएसपी से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीण इलाकों में कानून का डर बना रहे। वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में संगठित गिरोह सक्रिय है, तो उसके खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रशासन से पारदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति की अपेक्षा जताई गई।

शहर की यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन को लेकर भी नागरिकों ने चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने बताया कि भारी डंपरों की आवाजाही से सड़कें और पुलिया क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्कूलों के समय ट्रैफिक जाम की समस्या से बच्चों और अभिभावकों को भारी परेशानी होती है। सुझाव दिया गया कि भारी वाहनों को आउटर रूट से संचालित किया जाए और स्कूलों के समय में यातायात प्रबंधन के लिए विशेष योजना बनाई जाए। नागरिकों ने यह भी कहा कि यदि स्कूलों के समय में थोड़ा तालमेल बैठा लिया जाए, तो दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है। इस मुद्दे पर नगर निगम और पुलिस के संयुक्त प्रयास की जरूरत पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जिले का कार्यभार संभालने के बाद से ही उनकी प्राथमिकता लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनके आधार पर पुलिसिंग की दिशा तय करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर थाने और चौकी में शिकायतों की सुनवाई को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी और रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम रखने का प्रयास होगा। नशे के खिलाफ सख्त रणनीति, महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान, यातायात व्यवस्था में सुधार और जमीन ठगी जैसे मामलों में कठोर कार्रवाई का आश्वासन उन्होंने दोहराया। एसएसपी ने कहा कि छोटे-छोटे लेकिन ठोस कदम ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। कार्यक्रम सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ, जहां प्रशासन और जनता के बीच विश्वास और सहयोग की नई शुरुआत साफ दिखाई दी।
मीडिया से बातचीत करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने बेहद संतुलित और स्पष्ट शब्दों में अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 15 फरवरी को जनपद का कार्यभार संभाला है और इसके तुरंत बाद सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों व शाखा प्रमुखों के साथ विस्तृत बैठक कर जिले की पुलिसिंग की दिशा तय की गई है। एसएसपी ने साफ कहा कि उनकी सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता विक्टिम सेंट्रिक पुलिसिंग है, यानी थाने और चौकियों में आने वाले हर शिकायतकर्ता की पूरी बात सुनी जाए। किसी भी शिकायत को हल्के में न लिया जाए और एक जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उसका समयबद्ध और वैधानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित को न्याय का भरोसा मिल सके। उन्होंने आगे बताया कि नशे को लेकर जनपद में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनकी पुष्टि हाल ही में हुई जनसंवाद बैठकों में भी हुई है। नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि प्रभावी और लगातार होगी। छोटे स्तर पर नशा बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि नशे की जड़ पर सीधा प्रहार किया जा सके। एसएसपी ने कहा कि यह सामाजिक बुराई अपराधों को जन्म देती है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
महिला अपराधों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में इस तरह की घटनाएं अधिक सामने आती हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। शिकायत मिलते ही त्वरित अभियोग पंजीकरण, बरामदगी और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही महिला सुरक्षा से जुड़े ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, सीसीटीवी और प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि अपराध की संभावनाएं न्यूनतम की जा सकें। यातायात व्यवस्था पर बोलते हुए एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि रुद्रपुर हो या काशीपुर, आम जनता की अपेक्षा है कि ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर हो। इसी क्रम में काशीपुर में हुई जनसभा से मिले सुझावों के आधार पर टीआई काशीपुर और सीओ काशीपुर को निर्देश दिए गए हैं कि एक ठोस और व्यावहारिक ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए। जहां पुलिस बल की आवश्यकता होगी, वहां मैनपावर बढ़ाकर सख्त और प्रभावी एनफोर्समेंट किया जाएगा। यही प्रक्रिया अन्य क्षेत्रों में भी लागू की जा रही है।
भूमि से जुड़े मामलों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से जारी निर्देशों के तहत हर शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि मामला सिविल प्रकृति का होगा तो संबंधित सिविल प्रशासन से समन्वय किया जाएगा, लेकिन यदि आपराधिक मंशा पाई जाती है तो बिना किसी दबाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और उन्हें समग्र रूप से योजनाओं में शामिल कर समाधान निकाला जाएगा। अंत में एसएसपी ने कहा कि अवैध गतिविधियों, भीख मांगने वाले गिरोहों और बाहरी तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर पहचान, सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। रेलवे और अन्य माध्यमों से आने वाले ऐसे लोगों पर भी नजर रखी जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून का सम्मान और जनता का विश्वास—यही उनकी पुलिसिंग की असली पहचान होगी।





