देहरादून। जनगणना को लेकर जैसे ही अधिसूचना जारी हुई, प्रदेशभर में प्रशासनिक गतिविधियों ने अचानक तेज गति पकड़ ली है और सरकारी महकमों ने तय कार्यक्रम के अनुरूप व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के साथ ही राज्य में यह प्रक्रिया बेहद संगठित और चरणबद्ध तरीके से संचालित की जाएगी, जिससे पूरे प्रदेश की जनसंख्या से संबंधित तथ्यात्मक और सटीक आंकड़े संकलित किए जा सकें। अधिसूचना जारी होते ही लागू होने वाले नियमों के तहत प्रशासनिक ढांचे में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं, क्योंकि इस अवधि में प्रदेश की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को स्थिर माना जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब तक जनगणना का कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक जिलों, तहसीलों, नगर निकायों, पंचायतों और वार्डों की सीमाओं में किसी भी प्रकार का फेरबदल संभव नहीं होगा। सरकार और प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित किया गया है कि जनगणना की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो, ताकि प्रदेश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का स्पष्ट चित्र सामने आ सके।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद उत्तराखंड में तैयारियों को और अधिक गति प्रदान की गई है और राज्य प्रशासन ने तय समय-सारिणी के अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार कर ली है। अधिकारियों के अनुसार जनगणना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रदेश की विकास योजनाओं की आधारशिला मानी जाती है, इसलिए इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं रखी जा रही है। मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों में प्रशिक्षण कार्यक्रम से लेकर फील्ड स्तर तक की गतिविधियों का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया गया है, जिसके अनुरूप उत्तराखंड में व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अधिसूचना के प्रभावी होते ही लागू नियमों के अंतर्गत प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं को स्थिर बनाए रखना अनिवार्य हो गया है, जिससे आंकड़ों के संकलन में किसी प्रकार का भ्रम या विसंगति उत्पन्न न हो। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक जिले और क्षेत्र में जनगणना की प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी हो सके और सभी स्तरों पर कर्मचारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
इस व्यापक प्रक्रिया के सफल संचालन के लिए सबसे पहले प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है और 16 फरवरी से प्रदेश में जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाएगा। प्रशिक्षण व्यवस्था को बहुस्तरीय स्वरूप प्रदान किया गया है, ताकि प्रत्येक स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को उनके दायित्वों की स्पष्ट जानकारी मिल सके। पहले चरण में कुल 23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर पूरी व्यवस्था की रीढ़ माना जा रहा है। यह मास्टर ट्रेनर आगे अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर जनगणना की प्रक्रिया को सुचारु बनाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी पहलुओं, डेटा संकलन की विधियों और फील्ड कार्य की चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की टीम ही इस विशाल अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और इसी कारण प्रशिक्षण कार्यक्रम को अत्यंत गंभीरता से संचालित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की दूसरी कड़ी में 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा, जो मास्टर ट्रेनरों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जमीनी स्तर पर अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके साथ ही लगभग 4000 कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है, जिनकी जिम्मेदारी गणनाकर्मियों की निगरानी और मार्गदर्शन करना होगी। सुपरवाइजर यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक क्षेत्र में जनगणना का कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए और किसी भी प्रकार की त्रुटि या गड़बड़ी को तुरंत सुधारा जा सके। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कर्मचारी आगे अपने-अपने क्षेत्रों में शेष स्टाफ को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि जनगणना का प्रत्येक चरण पूरी तरह समन्वित और वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न हो, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में इन आंकड़ों का उपयोग नीति निर्माण में प्रभावी रूप से किया जा सके।
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां जनगणना के कार्य को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं, क्योंकि प्रदेश के कई क्षेत्र उच्च हिमालयी इलाकों में स्थित हैं जहां मौसम की प्रतिकूलता के कारण सामान्य समय में पहुंच पाना कठिन होता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए जनगणना को तीन अलग-अलग चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में समय और मौसम का विशेष महत्व होता है और यदि कार्य को मौसम के अनुकूल समय में पूरा नहीं किया गया तो कई क्षेत्रों में जनगणना अधूरी रह सकती है। इसलिए अधिकारियों ने विस्तृत सर्वेक्षण कर यह तय किया है कि किन क्षेत्रों में किस समय गणना कार्य संचालित किया जाएगा। इस रणनीति के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि राज्य का कोई भी क्षेत्र जनगणना प्रक्रिया से वंचित न रह जाए और हर नागरिक का विवरण सटीक रूप से दर्ज किया जा सके।
जनगणना के पहले चरण के अंतर्गत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मकान सूचीकरण और जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर भवनों की सूची तैयार करेंगे और प्रत्येक परिवार से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्रित करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस चरण में एकत्रित आंकड़े जनगणना की नींव साबित होंगे, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया संचालित होगी। गणनाकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक घर तक पहुंचकर परिवारों की संरचना, सदस्यों की संख्या और अन्य आवश्यक जानकारियां पूरी सावधानी से दर्ज करें। प्रशासन इस बात को लेकर सतर्क है कि किसी भी घर या परिवार की जानकारी छूटने न पाए, क्योंकि इससे अंतिम आंकड़ों की सटीकता प्रभावित हो सकती है और भविष्य की योजनाओं पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

दूसरे चरण में 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक उन चिन्हित क्षेत्रों में जनगणना का कार्य किया जाएगा जहां सामान्य मौसम में पहुंचना कठिन होता है और जहां अधिक बर्फबारी या दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां रहती हैं। इन क्षेत्रों के लिए अलग समय निर्धारित करने का उद्देश्य यह है कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियों में ही गणना कार्य पूरा किया जा सके और कर्मचारियों को भी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने इन इलाकों के लिए विशेष रणनीति तैयार की है और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का विवरण दर्ज करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मैदानी क्षेत्रों का, क्योंकि राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है जब हर क्षेत्र के आंकड़े पूरी तरह सटीक हों। इस चरण के दौरान कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों की जानकारी भी दी जाएगी।
जनगणना की प्रक्रिया का तीसरा और अंतिम चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा, जिसमें शेष बचे क्षेत्रों में गणना कार्य पूरा किया जाएगा। इस चरण के माध्यम से पूरे राज्य की जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों को अंतिम रूप दिया जाएगा और संकलित डेटा का विश्लेषण किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि सभी चरणों के आंकड़ों को एकत्रित कर एक समग्र और विश्वसनीय जनगणना रिपोर्ट तैयार की जाए, जिससे प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में सहायता मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि अंतिम चरण में विशेष सतर्कता बरती जाएगी, क्योंकि इसी चरण में पूरे अभियान की सफलता का आकलन किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी क्षेत्र या नागरिक जनगणना प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।
अधिसूचना जारी होने के साथ ही एक महत्वपूर्ण नियम स्वतः लागू हो गया है, जिसके तहत राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाओं को जनगणना पूर्ण होने तक स्थिर माना जाएगा। इसका सीधा प्रभाव यह है कि अब किसी भी जिले, तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इस प्रावधान को लागू करने के लिए अलग से किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अधिसूचना जारी होते ही यह नियम स्वतः प्रभावी हो जाता है। प्रशासन का मानना है कि यदि जनगणना के दौरान सीमाओं में परिवर्तन किया जाता है तो आंकड़ों की सटीकता प्रभावित हो सकती है और डेटा के विश्लेषण में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। इसी कारण यह नियम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और सभी प्रशासनिक इकाइयों को इसका पालन अनिवार्य रूप से करना होता है।

राज्य सरकार भी इस अवधि में किसी नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन नहीं कर सकेगी और न ही किसी स्थानीय निकाय के स्वरूप में बदलाव संभव होगा। इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि जनगणना के दौरान प्रशासनिक ढांचे में स्थिरता बनी रहे और आंकड़ों का संकलन व्यवस्थित तरीके से किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं बल्कि विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण, निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण और नीतिगत निर्णयों की आधारशिला होती है। इसलिए इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न करना आवश्यक होता है। उत्तराखंड में भी प्रशासन ने इस दिशा में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं और तय समय-सारिणी के अनुसार प्रशिक्षण से लेकर फील्ड वर्क तक की सभी गतिविधियों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का सटीक विवरण दर्ज कर भविष्य की योजनाओं को ठोस आधार प्रदान किया जा सके।
जनगणना अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तकनीकी संसाधनों और आधुनिक डिजिटल व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि आंकड़ों के संकलन में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों के अनुसार इस बार डेटा संकलन के दौरान डिजिटल उपकरणों और व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रणाली का अधिक उपयोग किया जाएगा, जिससे आंकड़ों के सुरक्षित भंडारण और त्वरित विश्लेषण में सहायता मिलेगी। प्रशासन ने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गणना कार्य के दौरान प्रत्येक परिवार की जानकारी अत्यंत सावधानी से दर्ज करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना को न्यूनतम रखा जाए। इसके साथ ही नागरिकों से भी सहयोग की अपील की जा रही है, ताकि वे सही जानकारी प्रदान कर इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। राज्य के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जनगणना से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों तक कर्मचारियों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए परिवहन तथा संचार सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के संयोजन से जनगणना अभियान अधिक प्रभावी और व्यवस्थित रूप से संपन्न किया जा सकेगा।
प्रदेश में जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय लेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में जनगणना से प्राप्त डेटा अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विविध प्रदेश में जनसंख्या का सटीक आकलन विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान प्राप्त जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए ही किया जाएगा। जनगणना अभियान को लेकर प्रदेश में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे नागरिक इस प्रक्रिया के महत्व को समझ सकें और स्वेच्छा से सहयोग प्रदान करें। अधिकारियों का विश्वास है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा और राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार होगा।





