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चैती मेले में मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान अब 13 करोड़ से चमकेगा शक्तिपीठ का आंगन

भजन संध्या में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां बाल सुंदरी के आंगन से भरी हुंकार, विकास और सुशासन के संगम से अब 13 करोड़ की भारी-भरकम राशि चमकाएगी काशीपुर की पावन सांस्कृतिक विरासत का भविष्य।

काशीपुर। नगर कि पावन और ऐतिहासिक धरती पर चैती मेले के अवसर पर आयोजित भव्य भजन संध्या उस समय अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँच गई, जब देवभूमि उत्तराखंड के यशस्वी और ओजस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां बाल सुंदरी के दरबार में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस रूहानी शाम का नजारा इतना अद्भुत था कि पूरा मेला परिसर ‘जय माता दी’ और ‘धाकड़ धामी’ के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण में एक नई ऊर्जा और श्रद्धा का संचार हो गया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले शक्ति स्वरूपा जगत जननी मां बाल सुंदरी जी के चरणों में अत्यंत भक्ति भाव के साथ शीश नवाया और प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि तथा शांति की मंगल कामना की। इस विशेष अवसर पर उनके साथ नगर की प्रथम नागरिक और महापौर दीपिका बाली भी मौजूद रहीं, जिन्होंने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उनके साहसिक व्यक्तित्व की जमकर सराहना की। महापौर ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि जहाँ आज भजन और भक्ति की गंगा बह रही है, वहीं हम सबके सम्मुख एक ऐसा व्यक्तित्व खड़ा है जिसने देवभूमि की अस्मिता को बचाने के लिए कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।

महापौर दीपिका बाली ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना आदर प्रकट करते हुए उनके नेतृत्व की तुलना एक ऐसे रक्षक से की, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और सनातन धर्म की मर्यादा को अक्षुण्ण रखा। उन्होंने बड़े ही गर्व के साथ उल्लेख किया कि जब प्रदेश में धर्मांतरण और जिहाद जैसी चुनौतियों के खिलाफ सख्त कानून लाए गए, तब जनता ने स्वयं ही मुख्यमंत्री को ‘धर्म रक्षक धामी’ के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। इसके बाद भ्रष्टाचार की जड़ों पर कड़ा प्रहार करते हुए जब उन्होंने केवल छोटी मछलियों को ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े मगरमच्छों को भी सलाखों के पीछे पहुँचाया, तो उन्हें ‘धाकड़ धामी’ की पहचान मिली। महापौर ने आगे बढ़ते हुए कहा कि यूसीसी (समान नागरिक संहिता) जैसे जटिल और ऐतिहासिक कानून को लागू करना किसी साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं थी, यह केवल पुष्कर सिंह धामी जैसा जीवंत और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला व्यक्तित्व ही कर सकता था। इसीलिए उन्हें ‘धुरंधर धामी’ भी कहा गया। अब काशीपुर की यह सम्मानित जनता और पूरा उत्तराखंड उनके अगले साहसिक कदम और उस ‘चौथे नाम’ का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो उनके भविष्य के विजन को एक नई पहचान देगा।

भजन संध्या के इस दिव्य और अलौकिक मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और प्रेम को प्रकट करते हुए सुप्रसिद्ध भजन गायक लखवीर सिंह लख्खा का विशेष अभिनंदन और स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने बड़े ही सरल और आत्मीय अंदाज में कहा कि लखवीर सिंह लख्खा की ख्याति न केवल प्रदेश में बल्कि पूरे राष्ट्र में है और उनके भक्ति गीतों का आनंद लेने के लिए वे स्वयं को रोक नहीं पाए। उन्होंने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वे यहाँ मां के दरबार में हाजिरी लगाने और लख्खा भाई के भजनों का रसपान करने आए हैं और यहाँ से ऊर्जा प्राप्त कर वे अभी 150 किलोमीटर का लंबा सफर और तय करेंगे। काशीपुर और आसपास के जनपदों से उमड़े हजारों के जनसैलाब को देखकर मुख्यमंत्री भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि वे सोच रहे थे कि मेले का समापन काल है तो भीड़ शायद कम होगी, लेकिन यहाँ तो पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि चैती मेले के इस पावन प्रांगण में केवल वही व्यक्ति पहुँच पाता है जिस पर मां बाल सुंदरी की विशेष कृपा और इच्छा होती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन को विस्तार देते हुए काशीपुर की इस पावन धरा के साथ अपने गहरे और आत्मीय जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी लोक आस्था, गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और महान परंपराओं का एक जीवंत महोत्सव है। उन्होंने मंच से घोषणा की कि चैती मंदिर परिसर को अब ‘मानसखंड कॉरिडोर’ के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है, जिससे यह क्षेत्र आने वाले समय में एक प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि मेले के कोष में जमा 13 करोड़ रुपये की धनराशि का उपयोग अब केवल इसी परिसर के सौंदर्यीकरण और एक भव्य मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पवित्र स्थान का कायाकल्प करना उनकी प्राथमिकता है ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद पूरा पंडाल करतल ध्वनि और नारों से गूंज उठा, जिससे जनता का उनके प्रति विश्वास और अधिक गहरा हो गया।

विकास की अपनी दूरगामी सोच को जनता के सामने रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि काशीपुर को एक आधुनिक औद्योगिक और सुविधायुक्त शहर बनाने के लिए सरकार दिन-रात कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि 133 एकड़ के विशाल क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जहाँ 16 औद्योगिक इकाइयों का आवंटन पहले ही किया जा चुका है। यह परियोजना भविष्य में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के अपार अवसर सृजित करेगी। इसके साथ ही, काशीपुर-रामनगर राजमार्ग को उन्नत बनाने के लिए 494 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की जा चुकी है, जिसका कार्य तीव्र गति से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने 1950 करोड़ रुपये की लागत से शहर में पेयजल व्यवस्था, सड़क सुधार और ड्रेनेज जैसे बुनियादी ढांचों के विकास कार्यों का भी विस्तार से विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और नई तहसील कार्यालय का निर्माण कार्य भी जारी है, जो शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री के भाषण का एक अत्यंत प्रभावशाली और कड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की अटूट नीति पर केंद्रित रहा। उन्होंने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पिछली सरकारों के दौर में भ्रष्टाचार एक सामान्य प्रक्रिया बन गई थी, जहाँ फाइलें धूल फांकती थीं और जनता का पैसा बिचौलियों की जेबों में चला जाता था। लेकिन उनकी सरकार ने इस व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वह समय बीत गया जब केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरती थी; आज के समय में भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना भी प्रभावशाली मगरमच्छ क्यों न हो, उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना ही पड़ता है। उन्होंने बताया कि अब तक 200 से अधिक ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे सरकारी तंत्र में ईमानदारी और पारदर्शिता का नया युग प्रारंभ हुआ है। मुख्यमंत्री के इस निर्भीक अंदाज ने वहाँ उपस्थित युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के मन में कानून के प्रति एक नया सम्मान पैदा कर दिया।

नकल माफियाओं के खिलाफ अपनी सरकार की ऐतिहासिक जीत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि आज उत्तराखंड के 30 हजार से अधिक होनहार बेटे-बेटियों को उनकी योग्यता, क्षमता और प्रतिभा के आधार पर सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पहले गरीब माता-पिता का बच्चा चाहे कितना भी काबिल क्यों न हो, वह पैसों और रसूख की भेंट चढ़ जाता था, लेकिन अब पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि कई युवाओं को तो एक साथ चार-पांच परीक्षाओं में सफलता मिल रही है, जो इस नई और स्वच्छ व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी मेहनत पर भरोसा रखें, क्योंकि उनकी सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने गर्व से कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आजादी के बाद देश का ऐसा पहला राज्य बना है जिसने इस क्रांतिकारी कानून को लागू करने का साहस दिखाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड से निकली यह सुधार की गंगोत्री अब पूरे भारत को लाभ पहुँचाने के लिए अग्रसर है और गुजरात जैसे अन्य राज्यों ने भी इस दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सबको समान अधिकार देने और नारी शक्ति के सम्मान की रक्षा के लिए लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए काम नहीं करते, बल्कि उनका एकमात्र लक्ष्य ‘अंत्योदय’ और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाना है। उनके इस विजनरी संबोधन ने यह साफ कर दिया कि वे उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प पर अडिग हैं।

अंत में, मुख्यमंत्री ने देवभूमि की पवित्रता और जनसांख्यिकीय संतुलन (डेमोग्राफी) की रक्षा करने के अपने संकल्प को पुन: दोहराया। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण और अवैध धार्मिक संरचनाओं के खिलाफ उनका अभियान ‘ऑपरेशन क्लीन’ निरंतर जारी रहेगा, क्योंकि वे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे छोटे बच्चों को देखते हैं, तो उन्हें 25-50 साल बाद का एक सुरक्षित और विकसित उत्तराखंड दिखाई देता है और वे इन्हीं बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आज कड़े निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस बल और मेले के आयोजन में जुटे सभी सेवादारों को इस भव्य कार्यक्रम के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि यह काशीपुर की जनता के लिए एक भरोसे का संदेश था कि उनका ‘धाकड़ धामी’ उनके विकास और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन किया और कलाकारों का उत्साहवर्धन कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया।

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