काशीपुर। नगर की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने और सामाजिक सरोकारों को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुक्रवार, 13 फरवरी को नगर निगम परिवार द्वारा एक विशेष सामूहिक आयोजन किया गया, जिसने नगर के सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की। प्रातः 10:00 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में महापौर दीपक बाली के नेतृत्व में नगर निगम से जुड़े सभी पार्षदगण, एसएसजी की बहनें और पर्यावरण मित्र एक साथ एसआरएस सिनेमा हॉल पहुंचे, जहां उन्होंने कालजयी साहित्यिक कृति पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ का सामूहिक अवलोकन किया। इस आयोजन को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे सामाजिक मूल्यों, सांस्कृतिक परंपराओं और सामूहिक जिम्मेदारियों को पुनर्जीवित करने के व्यापक अभियान के रूप में देखा गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि साहित्य और सिनेमा समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नगर निगम परिवार की इस सामूहिक उपस्थिति ने यह भी दर्शाया कि प्रशासनिक और सामाजिक संस्थाएं मिलकर सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने में सक्रिय योगदान दे सकती हैं।
कार्यक्रम के दौरान महापौर दीपक बाली ने अपने संबोधन में फिल्म ‘गोदान’ के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह केवल एक कहानी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, गौ संरक्षण, संस्कार, स्वास्थ्य और समृद्धि जैसे मूलभूत विषयों को जनमानस तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गाय को विशेष स्थान प्राप्त है और उसे केवल पशु के रूप में नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। महापौर ने बताया कि गाय का दूध अमृत के समान माना जाता है और यह मानव जीवन के पोषण और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौवंश से प्राप्त गोमूत्र और गोबर का उपयोग जैविक खेती सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तब उसे अनुपयोगी मानकर त्याग देना उचित नहीं है, बल्कि उसका संरक्षण और सेवा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर देते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि सनातन परंपरा में गौ माता का सम्मान केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि वैज्ञानिक और सामाजिक आधार पर भी किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि प्राचीन समय से भारत के कई क्षेत्रों में गोबर का उपयोग घरों की लिपाई-पुताई में किया जाता रहा है, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों को लाभ मिलता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गाय से जुड़ी परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। महापौर ने कहा कि ‘गोदान’ जैसी फिल्में समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक बनाती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगे।
नगर में बढ़ती आवारा और बेसहारा गौवंश की समस्या पर भी महापौर दीपक बाली ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर में घूम रहे गौवंश के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती जा रही है और साथ ही स्वच्छता व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि गौशाला निर्माण के लिए भूमि स्थानांतरित की जा चुकी है और इसके निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। महापौर ने कहा कि जैसे ही धनराशि स्वीकृत होगी, टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और भव्य गौशाला का निर्माण कराया जाएगा, जिससे शहर में घूम रहे गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि नगर निगम इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मीडिया से बातचीत करते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि गौ माता का दूध मानव जीवन के लिए अमृत के समान है और समाज इसका व्यापक उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो कई बार उसे अनुपयोगी मानकर छोड़ दिया जाता है, जो कि गलत सोच है। उन्होंने बताया कि गोमूत्र और गोबर जैविक खेती से लेकर विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक उपयोगों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के अनेक हिस्सों में आज भी गोबर का उपयोग स्वच्छता और स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महापौर ने कहा कि फिल्म ‘गोदान’ का उद्देश्य गौ माता के महत्व के प्रति समाज को जागरूक करना है और इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह सामूहिक आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि इस फिल्म की स्क्रीनिंग का उद्देश्य किसी प्रकार की राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस आयोजन को राजनीतिक दृष्टि से देखने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य पूरी तरह समाज को अपनी परंपराओं और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में सभी लोगों को बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के आमंत्रित किया गया था। महापौर ने कहा कि भारतीय संस्कृति से जुड़े विषय किसी एक वर्ग या दल तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह पूरे समाज की साझा धरोहर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्यकार प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा लिखित ‘गोदान’ की कहानी समाज को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण संदेश देती है।
भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि सनातन परंपरा में गाय को घर में पालना समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में कई नई बीमारियां सामने आ रही हैं और ऐसे में पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और यह केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि वैज्ञानिक सोच का परिणाम है। महापौर ने कहा कि समय-समय पर गौ माता के महत्व को समझाने के लिए विभिन्न प्रयास किए जाते रहे हैं और इस प्रकार के आयोजन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि गौ संरक्षण को केवल धार्मिक विषय न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।
इस विशेष आयोजन में अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम में पीसीयू चेयरमैन राम मल्होत्रा, संयुक्त प्रकोष्ठ जिला संयोजक मुकेश चावला, मंडल अध्यक्ष मानवेंद्र मानस, वरिष्ठ नेता ईश्वर गुप्ता, वरिष्ठ नेता अभिषेक गोयल, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष बृजेश पाल, अमित मित्तल, पार्षद सीमा सागर, पार्षद ममता कुमारी, पार्षद गुंजन प्रजापति, चौधरी समरपाल सिंह नितिन गोला, राजीव अरोरा बच्चू, घनश्याम एवं बबलू चौधरी सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक व्यक्तित्व उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को समाज में सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने की दिशा में सराहनीय पहल बताया। उपस्थित अतिथियों ने कहा कि साहित्य और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक संदेश देना अत्यंत प्रभावी तरीका है और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

नगर निगम परिवार द्वारा आयोजित इस सामूहिक फिल्म प्रदर्शन को सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी माना जा रहा है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब प्रशासनिक और सामाजिक संस्थाएं एक साथ मिलकर कार्य करती हैं, तो समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन लाने में आसानी होती है। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने फिल्म के माध्यम से गौ संरक्षण, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों के महत्व को समझने का प्रयास किया। इस आयोजन ने नगर में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का अवसर भी प्रदान किया।
समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। नगर निगम परिवार की इस सामूहिक भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि सांस्कृतिक और सामाजिक विषय केवल परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वर्तमान समाज की आवश्यकताओं से भी जुड़े हुए हैं। महापौर दीपक बाली के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस आयोजन ने नगर में सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए यह साबित किया कि साहित्य, सिनेमा और सामाजिक सहभागिता मिलकर समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





