गैरसैंण/भराड़ीसैंण।उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में चल रहे बजट सत्र का दूसरा दिन कई महत्वपूर्ण विधायी गतिविधियों और नीतिगत पहलों का साक्षी बना। सत्र के दौरान राज्य सरकार ने विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को सदन के पटल पर रखा, जिनमें सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना देवभूमि परिवार विधेयक 2026। इस विधेयक को सरकार ने राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से पेश किया। सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विधेयक को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद उत्तराखंड के नागरिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने का प्रयास कर रही है, जिनसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी सहायता बिना किसी बाधा के पहुंच सके। इस दौरान सदन में कुल 11 महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिन पर आगे चर्चा और प्रक्रिया तय की जाएगी।
बजट सत्र के दूसरे दिन प्रस्तुत किए गए इन विधेयकों में प्रशासनिक सुधार, सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रबंधन और संस्थागत मजबूती से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन विधायी पहलों के माध्यम से राज्य की शासन प्रणाली को अधिक सक्षम और उत्तरदायी बनाया जाएगा। विशेष रूप से देवभूमि परिवार विधेयक 2026 को राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल के रूप में प्रस्तुत किया है, जो आने वाले समय में योजनाओं के संचालन के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह विधेयक उत्तराखंड में परिवार आधारित एकीकृत डेटा प्रणाली स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके तहत प्रदेश के परिवारों का एक सत्यापित और समेकित डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध लाभार्थी आंकड़ों को एक मंच पर लाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि जब विभिन्न विभागों के आंकड़े एकीकृत होंगे, तब योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी बल्कि योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया भी अधिक सुगम बन सकेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वर्तमान समय में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के संचालन के लिए स्वतंत्र रूप से लाभार्थी डेटा का उपयोग करते हैं। इससे कई बार एक ही व्यक्ति या परिवार का विवरण अलग-अलग विभागों में अलग रूप में दर्ज हो जाता है, जिससे आंकड़ों के दोहराव की समस्या सामने आती है। कई बार यह भी देखा गया है कि लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है, क्योंकि विभिन्न विभागों के बीच डेटा का समन्वय ठीक से नहीं हो पाता। इसके कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है और प्रशासनिक संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सरकार का मानना है कि जब एकीकृत परिवार आधारित डेटा प्रणाली लागू होगी, तब इन समस्याओं का काफी हद तक समाधान संभव हो सकेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पहल राज्य में सुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और इससे योजनाओं की निगरानी तथा मूल्यांकन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
देवभूमि परिवार विधेयक 2026 के अंतर्गत प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार राज्य में एक समेकित परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा। यह डेटा प्रणाली विभिन्न विभागों और सरकारी एजेंसियों के लिए लाभार्थियों से संबंधित जानकारी का एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करेगी। इस प्रणाली को प्रशासनिक भाषा में “सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ” की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि किसी भी परिवार या व्यक्ति से जुड़ी जानकारी का एक ही प्रमाणित स्रोत उपलब्ध होगा। इससे योजनाओं के संचालन में भ्रम या दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। इसके माध्यम से राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। अधिकारियों के अनुसार, जब सभी विभाग एक साझा डेटा प्रणाली का उपयोग करेंगे तो योजनाओं का लक्ष्य निर्धारण भी अधिक सटीक होगा और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस प्रस्तावित प्रणाली की एक विशेषता यह भी होगी कि इसमें परिवार की पहचान को विशेष महत्व दिया जाएगा। देवभूमि परिवार आईडी के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जिससे उस परिवार से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं और लाभों का रिकॉर्ड एक ही मंच पर उपलब्ध रहेगा। इस व्यवस्था में परिवार के मुखिया के रूप में 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह प्रावधान महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने और उन्हें परिवार की निर्णय प्रक्रिया में अधिक सम्मानजनक स्थान देने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दे रही है और यह व्यवस्था उसी सोच का हिस्सा है। उनका कहना था कि जब परिवार की पहचान महिला सदस्य के नाम से होगी तो इससे महिलाओं की सामाजिक और प्रशासनिक भागीदारी भी बढ़ेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस डेटा प्रणाली के संचालन और प्रबंधन के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाएगा जो इस पूरे डेटाबेस के प्रबंधन, सुरक्षा और नियमित अद्यतन की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा साझा करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आंकड़े एकत्र करना नहीं बल्कि उन आंकड़ों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। जब विभागों के बीच समन्वित तरीके से डेटा का आदान-प्रदान होगा, तब योजनाओं का लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे योजनाओं के लक्षित वितरण को भी मजबूती मिलेगी और सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को लागू करते समय नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया है कि देवभूमि परिवार डेटा प्रणाली का संचालन डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। इसका अर्थ है कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग केवल उनकी सहमति और निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार तकनीक का उपयोग करते समय नागरिकों के अधिकारों और गोपनीयता का पूरा सम्मान करेगी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक के डेटा का दुरुपयोग न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा सुरक्षित तरीके से संचालित हो। सरकार का मानना है कि जब डेटा सुरक्षा के मजबूत प्रावधान लागू होंगे, तब लोग भी इस नई व्यवस्था पर अधिक विश्वास कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में यह भी कहा कि देवभूमि परिवार विधेयक 2026 राज्य के प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और सरकारी संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। उनके अनुसार जब योजनाओं से संबंधित सभी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी, तब सरकार को योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने में भी आसानी होगी। इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया भी अधिक सटीक और वैज्ञानिक बन सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं घोषित करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देवभूमि परिवार प्रणाली लागू होने के बाद उत्तराखंड के नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में कुल 11 विधेयक पेश किए गए, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संशोधन और नए प्रावधान शामिल हैं। इनमें उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026, समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1993 (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक 2026, उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 तथा उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026 शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन विधेयकों के माध्यम से प्रशासनिक सुधार, सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रबंधन और संस्थागत मजबूती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी रहेगी, जिसके बाद इन्हें अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।





