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गैरसैंण बजट सत्र में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन सरकार पर बेरोजगारी कानून व्यवस्था मुद्दों पर हमला

भराडीसैंण विधानसभा कूच के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प, वाटर कैनन का इस्तेमाल, 12 पुलिसकर्मी घायल; हरक सिंह रावत, ज्योति रौतेला और अनुपम शर्मा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।

भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। आयोजित उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गर्माती नजर आई। ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में स्थापित गैरसैंण के भराडीसैंण परिसर में चल रहे पांच दिवसीय बजट सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सड़कों से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विधानसभा कूच कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। इस दौरान कांग्रेस ने स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ते महिला अपराध, बेरोजगारी और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना था कि प्रदेश की जनता इन समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही। यही कारण है कि कांग्रेस को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता के सवालों से बचने का प्रयास कर रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े इन मुद्दों को लेकर पार्टी का संघर्ष लगातार जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

सुबह से ही गैरसैंण क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज दिखाई देने लगी थी और धीरे-धीरे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ती चली गई। विभिन्न जिलों से पहुंचे कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने नेताओं के साथ प्रदर्शन स्थल पर जुटने लगे और विधानसभा की ओर कूच करने की रणनीति बनाई गई। कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का जत्था जैसे ही नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ा, पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और झंडे लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और विधानसभा के सामने अपनी मांगें रखने की जिद पर अड़े रहे। हालांकि पुलिस ने उन्हें सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कई बार स्थिति ऐसी बन गई जब दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे और लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। इस घटनाक्रम के कारण पूरे क्षेत्र का माहौल कुछ समय के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गया और आसपास के इलाकों में भीड़ बढ़ने लगी।

विधानसभा के प्रवेश मार्गों पर पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखा गया था। प्रशासन को यह अंदेशा था कि बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों की ओर से आक्रामक प्रदर्शन किया जा सकता है, इसलिए पहले ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर लिए गए थे। जब प्रदर्शनकारी दिवालिखाल बैरियर तक पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें स्पष्ट रूप से आगे जाने से रोक दिया। इस दौरान कई बार बातचीत के जरिए स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और विधानसभा तक जाने की अनुमति मांगते रहे। पुलिस अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की कि सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें आगे नहीं जाने दिया जा सकता, लेकिन प्रदर्शनकारी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थे। धीरे-धीरे बहस का माहौल तेज होता गया और कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस खींचतान ने पूरे इलाके में तनाव का वातावरण पैदा कर दिया। हालांकि सुरक्षा बलों ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया और किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को होने से रोकने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी।

जब प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं मिली तो नाराज कांग्रेसी कार्यकर्ता दिवालिखाल बैरियर के पास ही सड़क पर बैठ गए और वहीं धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से रोका जा रहा है, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। धरने के दौरान कई कांग्रेस नेताओं ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राज्य की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए और सरकार की नीतियों की आलोचना की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास करती रही और प्रदर्शनकारियों से सड़क खाली करने की अपील करती रही, लेकिन जब लंबे समय तक प्रदर्शन जारी रहा तो पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। पानी की तेज धार के कारण कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी वहीं डटे रहे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखते रहे। इस घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश में चल रहे बजट सत्र को और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की आवाज, विपक्ष की आवाज, महिलाओं और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। हरक सिंह रावत ने कहा कि सरकार अपनी नीतियों पर उठ रहे सवालों से बचने के लिए पुलिस का सहारा ले रही है और जनता के मुद्दों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आज पहाड़ के इलाकों में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है और लोग अपने खेत-खलिहानों तक जाने से डरने लगे हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में लोग आज भी पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं की ओर ध्यान देने के बजाय केवल दिखावटी कामों में लगी हुई है। उनके अनुसार राज्य की जनता लगातार परेशानियों का सामना कर रही है, लेकिन सरकार को इन समस्याओं से कोई फर्क नहीं पड़ता।

हरक सिंह रावत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि रोजगार के अवसर खत्म होते जा रहे हैं और प्रदेश के युवा भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि हजारों युवा रोजगार की तलाश में प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पलायन की समस्या को भी गंभीर बताते हुए कहा कि सुविधाओं और रोजगार की कमी के कारण पहाड़ के गांव लगातार खाली होते जा रहे हैं। हरक सिंह रावत ने सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया, भू माफिया और शराब माफिया का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और सत्ता में बैठे लोग इन पर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है। उनके अनुसार यदि सरकार समय रहते इन समस्याओं पर गंभीरता से काम नहीं करती तो आने वाले समय में हालात और भी खराब हो सकते हैं। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब प्रदेश की जनता को ऐसे शासन के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और बदलाव के लिए आगे आना चाहिए।

इसी क्रम में कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी सरकार की कार्यशैली पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब से वर्तमान सरकार सत्ता में आई है, तब से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि देखने को मिली है और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ज्योति रौतेला ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और युवा वर्ग निराशा का सामना कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है, जिसके कारण दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार सरकार ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन वास्तविकता यह है कि उन वादों का धरातल पर कोई असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासनिक व्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है। ज्योति रौतेला ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इन गंभीर मुद्दों पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए।

धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण हालात का असर पुलिसकर्मियों पर भी पड़ा। जानकारी के अनुसार इस दौरान करीब 12 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें मौके पर मौजूद चिकित्सकीय टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया। दिवालिखाल क्षेत्र में ही डॉक्टरों की टीम तैनात थी, जिसने घायल पुलिसकर्मियों का तत्काल इलाज किया। इस दौरान एक महिला पुलिस कर्मी के पैर में चोट लगने की सूचना भी सामने आई, जिसके बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए गैरसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। चिकित्सा अधीक्षक गैरसैंण अर्जुन रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति फिलहाल सामान्य है और उन्हें प्राथमिक उपचार प्रदान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई थीं और इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की बात कही है।

राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शन के बीच कांग्रेस महासचिव अनुपम शर्मा ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि जनता के वास्तविक दर्द से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार प्रदेश की जनता के हितों के लिए संघर्ष कर रही है और राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठाने का काम कर रही है। अनुपम शर्मा ने कहा कि बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे आज प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं बल्कि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। उनके अनुसार यदि सरकार इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रहती है तो कांग्रेस आने वाले समय में और बड़ा जन आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें और प्रदेश के विकास तथा जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखें।

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