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गूँजा स्वच्छता का शंखनाद महिलाओं ने थामी कूड़ा गाड़ी की स्टेयरिंग और रचा नया इतिहास

आत्मनिर्भरता की महाक्रांति: कूड़ा प्रबंधन से मालामाल होंगी गाँव की सवा दो हजार महिलाएं, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक स्वावलंबन के इस अद्भुत संगम से देश भर में मिसाल बनेगा काशीपुर का यह नया 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल।

काशीपुर। स्वच्छता के संकल्प को सिद्धि की ओर ले जाते हुए काशीपुर ने आज एक नया इतिहास रच दिया है, जहाँ कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में ग्रामीण अंचल की महिलाओं की आत्मनिर्भरता को जोड़कर एक अनूठी मिसाल पेश की गई। काशीपुर विकास खंड कार्यालय परिसर में आज का सवेरा एक नई उमंग लेकर आया, जब महापौर दीपक बाली और ब्लॉक प्रमुख श्रीमती चंद्र प्रभा ने संयुक्तरूप से विशेष कूड़ा वाहन को हरी झंडी दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया। यह वाहन केवल सड़कों से प्लास्टिक कचरा ही नहीं उठाएगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का नया मार्ग भी प्रशस्त करेगा। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनते हुए महापौर ने कार्यक्रम में मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता की सामूहिक शपथ दिलाई। यह पहल उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उन कड़े निर्देशों के अनुपालन में की गई है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक कचरे से पूर्णतः मुक्त करने और प्रभावी प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया गया था। प्रदेश का यह पहला ब्लॉक बन गया है जिसने इतनी व्यवस्थित योजना के साथ कचरा निस्तारण की दिशा में कदम बढ़ाया है।

ग्रामीण व्यवस्था को प्रदूषण मुक्त करने की इस महामुहिम की सबसे प्रभावशाली कड़ी ‘हिंदुस्तान संकुल स्तरीय संगठन’ नामक सहकारी संस्था बनी है, जिसमें क्षेत्र की लगभग ढाई हजार महिलाएं एकजुट हैं। खंड विकास अधिकारी कमल किशोर पांडे ने इस योजना की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कूड़ा गाड़ी सीधे तौर पर किसी वेंडर से न खरीदकर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग्रामोत्थान परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई है। प्रशासन ने इस वाहन को ₹25,000 प्रति माह के किराए पर अनुबंधित किया है, जिसका सीधा भुगतान महिलाओं के सामूहिक बैंक खाते में जमा होगा। इस वित्तीय मॉडल की सबसे बड़ी सुंदरता यह है कि जैसे ही वाहन की मूल लागत किराए के माध्यम से पूरी हो जाएगी, यह गाड़ी पूर्ण रूप से महिलाओं के समूह की संपत्ति बन जाएगी। इसके पश्चात होने वाली समस्त आय समूह की सदस्यों के बीच लाभांश के रूप में वितरित की जाएगी, जिससे ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे गरिमापूर्ण रोजगार और नियमित आय प्राप्त होगी। यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे सरकारी परियोजनाओं को जन-भागीदारी और महिला सशक्तिकरण के साथ जोड़कर सफल बनाया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण की इस तकनीकी प्रक्रिया में क्षेत्र पंचायत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और उत्तरदायी रखी गई है ताकि योजना का संचालन बिना किसी बाधा के निरंतर चलता रहे। खंड विकास अधिकारी के अनुसार, गाड़ी का अनुबंध अगले चार वर्षों के लिए किया गया है और इसकी देखरेख का पूरा जिम्मा प्रशासन के पास होगा। वाहन को संचालित करने के लिए कुशल ड्राइवर और समर्पित ‘पर्यावरण मित्र’ की नियुक्ति क्षेत्र पंचायत द्वारा की गई है, जिनका वेतन और अन्य भत्ते भी पंचायत ही वहन करेगी। इसके साथ ही वाहन के दैनिक रखरखाव और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी विभाग की होगी, जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। यह गाड़ी विशेष रूप से प्लास्टिक वेस्ट जैसे रैपर, बोतलें और पॉलीथिन एकत्रित करने के लिए डिजाइन की गई है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बिखरे पड़े उस कचरे को रोकना है जो मिट्टी की उर्वरता नष्ट कर रहा है और पशुओं के लिए काल बन रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर ग्राम पंचायत इस स्तर पर आत्मनिर्भर बने।

प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की श्रृंखला को समझाते हुए अधिकारियों ने बताया कि एकत्रित किया गया सारा कूड़ा जिला पंचायत द्वारा संचालित मुख्य संग्रहण केंद्र तक पहुँचाया जाएगा। वर्तमान में ग्राम शिवलालपुर अमर झंडा में एक अत्याधुनिक कूड़ा संग्रहण एवं रिसाइकिलिंग केंद्र स्थापित है, जहाँ इस प्लास्टिक कचरे का अंतिम निस्तारण किया जाता है। यहाँ लगी कॉम्पैक्टर यूनिट पिछले करीब आठ महीनों से सुचारू रूप से कार्य कर रही है, जो बिखरे हुए कचरे को दबाव के जरिए छोटे-छोटे ठोस ब्लॉक्स में परिवर्तित कर देती है। इन ब्लॉक्स का उपयोग भविष्य में सड़क निर्माण सामग्री के रूप में किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाला प्लास्टिक अब विकास की सड़कों का आधार बनेगा। जिला पंचायत के स्तर पर ठेकेदारों के माध्यम से इस कचरे को पुनः उपयोग में लाने की विस्तृत योजना पर काम चल रहा है। यह पूरी प्रक्रिया एक ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ का जीवंत उदाहरण है, जहाँ कचरे को संसाधन में बदलकर प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ विकास कार्यों में उसका सदुपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

काशीपुर के विभिन्न गांवों में स्वच्छता को लेकर एक जन-आंदोलन खड़ा करने के लिए ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के बजट का सदुपयोग करने हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। खंड विकास अधिकारी कमल किशोर पांडे ने मीडिया से रूबरू होते हुए साझा किया कि बरखेड़ा पांडे और शिवलालपुर जैसी कई अग्रणी पंचायतों ने अपने स्तर पर कचरा संग्रहण शुरू कर दिया है और वे सफलतापूर्वक ‘यूजर चार्ज’ भी वसूल रही हैं। स्थानीय निवासियों में भी अब यह चेतना जागृत हुई है कि वे मामूली शुल्क देकर अपने परिवेश को स्वच्छ रख सकते हैं। चूंकि कचरा उठाने वाले कर्मचारी स्थानीय होते हैं, इसलिए संवाद और समन्वय बनाना आसान हो जाता है। हालांकि वर्तमान में केवल एक मुख्य प्लांट संचालित है, लेकिन भविष्य में प्लास्टिक की बढ़ती मात्रा को देखते हुए नए रिसाइकिलिंग प्लांट लगाने का मामला जिला पंचायत के स्तर पर विचाराधीन है। आज के इस भव्य आयोजन के दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के चेहरों पर जो मुस्कान और आत्मविश्वास दिखा, वह इस बात का प्रमाण है कि काशीपुर का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए स्वच्छता और स्वावलंबन की एक नई इबारत लिखने को तैयार है।

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