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खनन वाहनों के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य आक्रोशित खुलेआम सड़क पर बैठा धरने पर

लगातार सड़क हादसों में हो रही निर्दोष लोगों की मौतों पर भड़का जनआक्रोश, प्रशासनिक लापरवाही और ओवरलोड डंपरों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सियासी संघर्ष हुआ तेज।

काशीपुर। उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया, जहां एक बाइक सवार की मौत के बाद हालात अचानक विस्फोटक हो गए और गुस्साए ग्रामीणों ने खनन सामग्री से भरे एक 12 टायरा ट्रक को आग के हवाले कर दिया। यह हादसा इतना भयावह था कि कुछ ही समय में घटनास्थल पर तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ही मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रक चालक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। घटना ने एक बार फिर जिले में बेलगाम दौड़ रहे खनन वाहनों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों का माहौल बना हुआ है, क्योंकि लगातार हो रहे हादसों से आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ती नजर आ रही है।

बताया जा रहा है कि यह हादसा काशीपुर के कुंडेश्वरी पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत ढकिया नंबर एक गांव में हुआ, जहां निवासी जयपाल सिंह, जिनकी उम्र लगभग 60 वर्ष बताई जा रही है, सोमवार सुबह अपने घर से किसी जरूरी कार्य के लिए बाइक पर निकले थे। घर से कुछ ही दूरी तय करने के बाद पीछे से आ रहे तेज रफ्तार खनन सामग्री से लदे ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जयपाल सिंह सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया और मृतक की पहचान होते ही शोक की लहर दौड़ गई। जयपाल सिंह के परिवार और परिचितों को जब इस दुर्घटना की सूचना मिली तो घर में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने बताया कि जयपाल सिंह लंबे समय से दूध का व्यवसाय करते थे और क्षेत्र में मेहनती व मिलनसार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे।

घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए और देखते ही देखते माहौल आक्रोश में बदल गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रक चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार इस दुर्घटना की मुख्य वजह है। गुस्साए लोगों ने ट्रक संख्या UP21 CT 6334 को घेर लिया और चालक के फरार होने की जानकारी मिलने पर भीड़ ने ट्रक को आग के हवाले कर दिया। कुछ ही मिनटों में ट्रक धू-धू कर जलने लगा, जिससे क्षेत्र में दहशत और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए पीछे हटना पड़ा। इस घटना के कारण सड़क पर आवागमन भी पूरी तरह बाधित हो गया और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना था कि लगातार हो रहे हादसों से वे पहले ही परेशान थे और इस दुर्घटना ने उनके गुस्से को भड़का दिया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुंडेश्वरी चौकी पुलिस और काशीपुर कोतवाली से भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों को भीड़ को शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ट्रक में लगी आग को बुझाने के लिए दमकल विभाग को बुलाया गया, जिसके बाद काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया जा सका। पुलिस ने मौके से सबूत जुटाने के साथ ही मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि ट्रक चालक की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस बीच पुलिस प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है।

उधम सिंह नगर में लगातार हो रहे सड़क हादसों ने प्रशासन और जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में खनन सामग्री से लदे वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से सड़कें मौत का जाल बनती जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण खनन वाहन बेखौफ होकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि सुबह और रात के समय इन भारी वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक रहती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और खनन वाहनों के संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस हादसे के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी और ओवरलोड डंपरों को ‘मौत की मशीनें’ करार देते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ढकिया नंबर–1 स्थित शिवनगर ग्राम में हुई इस दुर्घटना ने क्षेत्र में व्याप्त लापरवाही को उजागर कर दिया है। यशपाल आर्य ने दावा किया कि बीते दो से तीन दिनों के भीतर ढकिया, कुंडेश्वरी, कुंडेश्वरा और ब्रह्मनगर क्षेत्रों में खनन वाहनों की चपेट में आने से पांच निर्दोष नागरिकों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से ओवरलोड डंपरों से लोगों की जान जा रही है, उतनी मौतें अब युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं में भी नहीं होतीं। उनके अनुसार यह केवल दुर्घटनाएं नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हो रही जनहत्याएं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि रोजाना किसी न किसी परिवार का सहारा छिन रहा है और कई घरों में माताओं की गोद सूनी हो रही है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रशासन संवेदनहीन रवैया अपनाए हुए हैं। यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि तेज रफ्तार और ओवरलोड डंपरों से हो रही मौतें उत्तराखंड सरकार की असफल कार्यप्रणाली को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, लेकिन वर्तमान हालात में लोगों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल प्रभाव से ओवरलोड डंपरों पर रोक नहीं लगाई गई और खनन वाहनों पर कड़ी निगरानी नहीं की गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य खुद कुंडेश्वरी पहुंचे और सड़क पर बैठकर धरना दिया। धरना स्थल पर उन्होंने मौजूद अधिकारियों पर कड़ा हमला बोला और जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जनता के सामने आकर जवाब दें और जमीन पर बैठकर बातचीत करें। यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन किससे वार्ता कर रहा है और किस मुद्दे पर बातचीत हो रही है, जब लगातार लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। उनका यह आक्रोश स्थानीय लोगों के गुस्से को और बढ़ाने वाला साबित हुआ। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या वे चाहते हैं कि क्षेत्र में रहने वाले सभी लोग इसी तरह हादसों का शिकार होते रहें।

अफसरशाही पर निशाना साधते हुए यशपाल आर्य ने कहा कि क्या पैसे के प्रभाव में लोगों की जिंदगी को खतरे में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में पांच लोगों की मौत हो चुकी है और हर मौत के पीछे एक परिवार पूरी तरह टूट गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी अधिकारी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा समझने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन कारणों से ये हादसे हो रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यशपाल आर्य ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन ओवरलोडिंग को भ्रष्टाचार और लूट का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे सत्ता में रहे हों या विपक्ष में, जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते खनन वाहनों पर सख्त नियंत्रण नहीं लगाया गया तो ऐसी घटनाएं आगे भी होती रहेंगी। लोगों का मानना है कि ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

फिलहाल पुलिस प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है और ट्रक चालक की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे हुई थी और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासन ने क्षेत्र में खनन वाहनों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने की बात भी कही है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक हादसों का सिलसिला थमने की उम्मीद कम ही दिखाई देती है।

यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि सड़क सुरक्षा और खनन वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सुधार की आवश्यकता है। जयपाल सिंह की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक आम नागरिक इस तरह हादसों का शिकार होते रहेंगे। अब लोगों की नजर सरकार और प्रशासन पर टिकी है कि वे इस त्रासदी से सबक लेकर ठोस कदम उठाते हैं या फिर सड़कें इसी तरह लोगों की जान लेती रहेंगी।

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