spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडकेंद्रीय बजट 2026 से उत्तराखंड किसानों को नई दिशा आयुर्वेद हर्ब्स हेंप...

केंद्रीय बजट 2026 से उत्तराखंड किसानों को नई दिशा आयुर्वेद हर्ब्स हेंप से बढ़ी उम्मीदें: मनोज पाल

केंद्रीय बजट 2026 में कृषि के पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर आयुर्वेद, जड़ी-बूटी, आधुनिक बागवानी और हेंप जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर सरकार ने उत्तराखंड के छोटे किसानों के लिए आय और रोजगार के नए रास्ते खोले हैं।

काशीपुर। केंद्रीय बजट 2026 के प्रावधानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने ‘‘हिन्दी दैनीक सहर प्रजातंत्र’ से बात करते हुये स्पष्ट कहा कि इस बजट ने उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में खेती-किसानी की दिशा को लेकर एक नई बहस और नई उम्मीद दोनों को जन्म दिया है। मनोज पाल के अनुसार इस बार का बजट केवल परंपरागत कृषि योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार ने ऐसे उत्पादों और गतिविधियों को प्राथमिकता दी है जिनका सीधा संबंध उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, यहां के छोटे और सीमांत किसानों तथा स्थानीय संसाधनों से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड की खेती लंबे समय से विशेष चुनौतियों का सामना करती रही है, जहां सिंचाई की कमी, छोटे जोत, कठिन ढलान वाली जमीन और सीमित बाजार पहुंच किसानों की आय को प्रभावित करती रही है। ऐसे में बजट में आयुर्वेद, हर्ब्स, ड्राई फ्रूट्स, आधुनिक बागवानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और हेंप जैसे क्षेत्रों पर दिया गया जोर राज्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। मनोज पाल का मानना है कि यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि पहाड़ की खेती के लिए संभावनाओं का एक स्पष्ट खाका भी प्रस्तुत करता है।

भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में हर साल किसानों को लेकर कुछ न कुछ घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन इस बार का बजट इसलिए अलग दिखाई देता है क्योंकि इसमें उन क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है जो उत्तराखंड के छोटे किसानों के लिए व्यावहारिक और लाभकारी साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाकों में खेती करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। यहां असिंचित भूमि का प्रतिशत अधिक है, खेत छोटे और बिखरे हुए हैं तथा संसाधनों की उपलब्धता सीमित है। इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने की खेती संभव नहीं हो पाती, जिससे किसानों की आमदनी सीमित रह जाती है। मनोज पाल के अनुसार बजट में जिन सेक्टरों को प्राथमिकता दी गई है, वे कम जमीन में भी अधिक मूल्य देने वाली खेती की संभावनाएं खोलते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञों और किसान संगठनों द्वारा इस बजट को उत्तराखंड की जरूरतों के अनुरूप बताया जा रहा है और इसे पर्वतीय कृषि के लिए एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है।

मनोज पाल ने विशेष रूप से कहा कि आयुर्वेद को लेकर बजट में वित्त मंत्री द्वारा दिखाई गई गंभीरता उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राज्य पहले से ही आयुर्वेद और आयुष के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में गिना जाने लगा है। उन्होंने बताया कि राज्य में कई आयुर्वेदिक संस्थान, रिसर्च सेंटर और दवा निर्माण इकाइयां पहले से कार्यरत हैं। बजट में आयुर्वेद को लेकर फोकस आने से न केवल इन संस्थानों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, बल्कि इससे जुड़े किसानों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की मांग लगातार बढ़ रही है और उत्तराखंड की जलवायु इन फसलों के लिए अनुकूल मानी जाती है। मनोज पाल के अनुसार मोदी सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में आयुर्वेद के शामिल होने से यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश, रिसर्च और मार्केटिंग के अवसर बढ़ेंगे, जिसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचेगा।

भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने औषधीय खेती का उल्लेख करते हुए कहा कि अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, कालमेघ, सर्पगंधा, जटामांसी, कुटकी और अतीस जैसी फसलें उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में कम जमीन पर भी उगाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन फसलों को योजनाबद्ध तरीके से खेती से जोड़ा जाए और किसानों को प्रशिक्षण, बीज, तकनीक तथा बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाए, तो छोटे किसान भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं। इन फसलों की खासियत यह है कि इन्हें ज्यादा पानी या बड़े खेतों की जरूरत नहीं होती, जो पहाड़ी इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त है। मनोज पाल के अनुसार बजट में आयुर्वेद पर फोकस आने के बाद इन जड़ी-बूटियों की खेती को बढ़ावा मिलने की पूरी संभावना है, जिससे पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में औषधीय खेती एक मजबूत आधार बन सकती है।

मनोज पाल ने केंद्र सरकार द्वारा तीन बड़े आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना की घोषणा को उत्तराखंड के संदर्भ में बड़ी संभावना बताया। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से एक संस्थान उत्तराखंड में स्थापित होता है, तो यह राज्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल रिसर्च और ट्रेनिंग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज को सीधे बाजार और उद्योग से जोड़ने का रास्ता खुलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। मनोज पाल के अनुसार आयुर्वेदिक संस्थान के आसपास सप्लाई चेन विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बजट की यह घोषणा केवल कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर लागू होती है, तो उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।

भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने हर्ब्स यानी जड़ी-बूटियों की खेती को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को उत्तराखंड के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों का रुझान प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर्बल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे इस सेक्टर में अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है। मनोज पाल के अनुसार उत्तराखंड के चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिलों में हर्बल खेती के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। बजट में हर्ब्स को लेकर फोकस आने से उम्मीद की जा रही है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में ठोस योजनाएं लागू करेंगी, जिससे छोटे किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

मनोज पाल ने कहा कि ड्राई फ्रूट्स को लेकर बजट में किया गया जिक्र भी उत्तराखंड के किसानों के लिए खास मायने रखता है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट का उत्पादन पहले से होता रहा है, लेकिन अभी तक इसकी गुणवत्ता सुधार, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। बजट में बादाम, अखरोट, काजू और अन्य मेवों को प्राथमिकता मिलने से यह उम्मीद जगी है कि इस क्षेत्र में तकनीक, प्रशिक्षण और निवेश बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड के किसानों को बेहतर पौध, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट्स और बाजार तक सीधी पहुंच मिलती है, तो ड्राई फ्रूट्स की खेती आय का एक मजबूत स्रोत बन सकती है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है।

भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने आधुनिक बागवानी को लेकर बजट में दिए गए संकेतों को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सेब के अलावा कीवी, ड्रैगन फ्रूट और अन्य फलों की खेती पर ध्यान देने की बात कही गई है। उत्तराखंड की जलवायु कई प्रकार के फलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन अब तक तकनीक और मार्केटिंग की कमी के कारण किसान इसका पूरा लाभ नहीं उठा पाए हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध, सिंचाई व्यवस्था और कोल्ड चेन के जरिए बागवानी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मनोज पाल के अनुसार इससे पहाड़ी इलाकों में नकदी फसलों का दायरा बढ़ेगा और किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी संभव हो सकेगी।

मनोज पाल ने किसानों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के विस्तार को बजट का एक अहम और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल खास तौर पर युवाओं को खेती-किसानी से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एआई के जरिए मौसम की सटीक जानकारी, फसल की सेहत, कीट नियंत्रण और बाजार भाव जैसी जानकारियां किसानों को समय पर मिल सकती हैं। इससे छोटे किसान भी वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सकते हैं और नुकसान के जोखिम को कम कर सकते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां मौसम और भूगोल तेजी से बदलता है, वहां एआई आधारित टूल्स किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। मनोज पाल के अनुसार बजट में इस दिशा में किए गए प्रावधान यह दिखाते हैं कि सरकार खेती को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए गंभीर है।

भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने कहा कि इस बजट में पहली बार हेंप फैब्रिक का उल्लेख होना उत्तराखंड के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार वर्ष 2017 से ही हेंप को लेकर नीति बनाने का काम कर रही है। हेंप मूल रूप से भांग की खेती से जुड़ा है, लेकिन इसके रेशे से तैयार होने वाला फैब्रिक उच्च गुणवत्ता वाला होता है। यह कपास की तुलना में ज्यादा सॉफ्ट, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हेंप फैब्रिक की मांग तेजी से बढ़ रही है और इसकी कीमत भी काफी अधिक होती है। बजट में हेंप को जगह मिलने से यह उम्मीद जगी है कि उत्तराखंड में इसकी खेती और प्रोसेसिंग यूनिट्स विकसित होंगी, जिससे किसानों को एक हाई-वैल्यू क्रॉप का विकल्प मिल सकेगा।

मनोज पाल ने कहा कि उत्तराखंड के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं, जिनके पास सीमित जमीन और संसाधन होते हैं। ऐसे किसानों के लिए बड़े पैमाने की पारंपरिक खेती करना संभव नहीं होता। बजट में जिन सेक्टरोंकृआयुर्वेद, हर्ब्स, ड्राई फ्रूट्स, बागवानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हेंपकृपर फोकस किया गया है, वे सभी कम जमीन में भी बेहतर आमदनी देने वाले विकल्प माने जाते हैं। यही मॉडल पहाड़ी खेती के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में नीति, प्रशिक्षण और बाजार की सही व्यवस्था होती है, तो उत्तराखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

अंत में भारतीय जनता पार्टी के काशीपुर जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में जिन उत्पादों और गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है, वे उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप हैं। आयुर्वेद और हर्ब्स राज्य की पारंपरिक पहचान से जुड़े हैं, जबकि ड्राई फ्रूट्स और बागवानी यहां की जलवायु के अनुकूल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स और हेंप जैसे नए क्षेत्रों से खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने का रास्ता खुलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इन घोषणाओं को सही नीति और मजबूत क्रियान्वयन के साथ जमीन पर उतारा गया, तो पर्वतीय क्षेत्रों में खेती एक बार फिर सम्मानजनक आय और रोजगार का मजबूत आधार बनेगी और उत्तराखंड देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!