काशीपुर। नगर में मंगलवार का दिन पूरी तरह उत्सवमय दिखाई दिया जब गाजे-बाजे और भव्य झांकियों के साथ महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली गई। वैश्य समाज के विभिन्न घटकों से हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही किला मोहल्ला में एकत्रित हो गए थे और चारों ओर उल्लास का वातावरण था। कुमायूं वैश्य महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा की शुरुआत उत्तराखंड के प्रमुख उद्योगपति योगेश कुमार जिंदल, अग्रवाल सभा अध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल, कुमायूं वैश्य महासभा अध्यक्ष मनोहर गुप्ता और संरक्षक एस.पी. गुप्ता ने वैश्य शिरोमणि महाराजा अग्रसेन और कुल देवी मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और तिलक कर की। आयोजन की इस शुरुआत ने समाज के लोगों में उत्साह का संचार किया और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। शोभायात्रा के दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा और जलपान की व्यवस्था ने इसे और भी आकर्षक बना दिया।
जुलूस के आगे-आगे झांकियों का काफिला चलता रहा जिसमें महिषासुर मर्दिनी, कृष्ण अर्जुन उपदेश, लवकुश, कुलदेवी लक्ष्मी और महाराजा अग्रसेन का डोला प्रमुख आकर्षण बने। कुमारतनय समाज की ओर से भगवान कार्तिकेय की झांकी, विश्नोई समाज द्वारा पर्यावरण जागरूकता की झांकी और जैन समाज की प्रस्तुति ने विशेष रूप से ध्यान खींचा। साथ ही डीजे, बैंड और अखाड़ों की अद्भुत प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत बनाए रखा। इस बार शोभायात्रा में ऑपरेशन सिंदूर और मां काली के अखाड़े की झांकी ने अलग ही छटा बिखेरी। नगर की सड़कों से गुजरती इस यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि परंपरा और आधुनिकता जब एक साथ आती हैं तो समाज को नई दिशा देने का कार्य करती हैं। शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी बल्कि संगठन और एकता का सशक्त संदेश भी लेकर आई।

किला मोहल्ला से शाम चार बजे शुरू हुई यह यात्रा मुख्य बाजार, कोतवाली के सामने, महाराणा प्रताप चौक से होती हुई रामलीला मैदान तक पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। मार्ग में जहां-जहां यह शोभायात्रा गुजरी, वहां श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। आयोजक योगेश जिंदल ने कहा कि हर झांकी में कोई न कोई सामाजिक और धार्मिक संदेश छिपा था। अग्र समाज की यह परंपरा उनके पूर्वजों की शिक्षाओं और आदर्शों को जीवंत करती है। समाज के घटकों ने बताया कि शोभायात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाना भी है। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने, परिवार के साथ सामूहिक समय बिताने और बच्चों में संस्कारी गुण विकसित करने जैसे संदेश भी इस यात्रा में प्रमुख रहे।
शोभायात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए योगेश जिंदल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन सदैव से समाज के आदर्श रहे हैं। पांच वर्ष पहले तक बहुत से लोग समाजवाद की गहराई को नहीं समझते थे, लेकिन उनके सिद्धांतों और आदर्शों ने समय के साथ समाज में एक नई चेतना जागृत की। उन्होंने अपने राज्य में समाजवाद की स्थापना कर हर घर को समृद्ध बनाया और सभी वर्गों को समान रूप से अपनाया। आज उनके तप, त्याग और परिश्रम का प्रभाव चारों ओर स्पष्ट दिखाई देता है। धीरे-धीरे समाज उनके योगदान और संघर्षों को और गहराई से समझ रहा है, जिससे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी इसी भावना को प्रकट करती है। यह दिखाती है कि महाराजा अग्रसेन के आदर्श ही वह आधार हैं, जो समाज को एक सूत्र में बांधते हैं। उनके मार्गदर्शन ने हमेशा यह संदेश दिया कि समाज के सभी घटकों को साथ लेकर चलना ही वास्तविक शक्ति है। यही प्रयास हम इस शोभायात्रा के माध्यम से कर रहे हैं कि चारों वर्णों को एक मंच पर लाकर एकता और सहयोग का संदेश दिया जाए। यह केवल भक्ति का ही नहीं बल्कि शक्ति और संगठन का प्रदर्शन भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि महाराजा अग्रसेन की शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।
रामलीला मैदान में समापन के बाद कुमायूं वैश्य महासभा की ओर से सभी श्रद्धालुओं और समाजबंधुओं को प्रसाद और जलपान वितरित किया गया। इस अवसर पर योगेश कुमार जिंदल ने दूरदराज से आए वैश्य समाज के सदस्यों का आभार जताया और अग्रसेन जयंती की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में उद्यमी देवेन्द्र अग्रवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल, एडवोकेट डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. बी.एम. गोयल, डॉ. भारत भूषण गुप्ता, संयोजक प्रियांशु बंसल, पूर्व अध्यक्ष जे.पी. अग्रवाल, विनय जैन, शेष कुमार सितारा, एस.के. अग्रवाल, महामंत्री एम.पी. गुप्ता, के.सी. बंसल, कौशलेश गुप्ता, सुरेश गोयल, पीयूष अग्रवाल नागलिया, चक्रेश जैन, अजय अग्रवाल, बृजेश कुमार गुप्ता, ईश्वर चन्द्र गुप्ता, डॉ. संजीव गुप्ता, सुरेश गुप्ता, अभिषेक गोयल, महेंद्र लोहिया, नवनीत विश्नोई, मंजू गुप्ता, पूजा गुप्ता, मोनिका गुप्ता, रितु अग्रवाल, सुरभि बंसल, साक्षी बिंदल, मान्या अग्रवाल, मीनू अग्रवाल, अनु अग्रवाल और मीनू गुप्ता समेत समाज के वरिष्ठजन और महिलाएं मौजूद रहीं।

अग्र समाज के विभिन्न घटकों ने अपने पूर्वजों द्वारा बताए गए मार्ग पर आगे बढ़ने और समाज को संगठित रखने का संकल्प इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर दोहराया। हर झांकी के पीछे छिपे संदेशों ने उपस्थित जनमानस को प्रभावित किया और सनातन संस्कृति की शक्ति को उजागर किया। पूरे नगर में इस शोभायात्रा ने उत्सव जैसा वातावरण बना दिया और यह आयोजन केवल काशीपुर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत साबित हुआ।
शोभायात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए योगेश जिंदल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन सदैव से समाज के आदर्श रहे हैं। पांच वर्ष पहले तक बहुत से लोग समाजवाद की गहराई को नहीं समझते थे, लेकिन उनके सिद्धांतों और आदर्शों ने समय के साथ समाज में एक नई चेतना जागृत की। उन्होंने अपने राज्य में समाजवाद की स्थापना कर हर घर को समृद्ध बनाया और सभी वर्गों को समान रूप से अपनाया। आज उनके तप, त्याग और परिश्रम का प्रभाव चारों ओर स्पष्ट दिखाई देता है। धीरे-धीरे समाज उनके योगदान और संघर्षों को और गहराई से समझ रहा है, जिससे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी इसी भावना को प्रकट करती है। यह दिखाती है कि महाराजा अग्रसेन के आदर्श ही वह आधार हैं, जो समाज को एक सूत्र में बांधते हैं। उनके मार्गदर्शन ने हमेशा यह संदेश दिया कि समाज के सभी घटकों को साथ लेकर चलना ही वास्तविक शक्ति है। यही प्रयास हम इस शोभायात्रा के माध्यम से कर रहे हैं कि चारों वर्णों को एक मंच पर लाकर एकता और सहयोग का संदेश दिया जाए। यह केवल भक्ति का ही नहीं बल्कि शक्ति और संगठन का प्रदर्शन भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि महाराजा अग्रसेन की शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।



