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कांग्रेस का सृजन संगठन अभियान काशीपुर से चुनावी रणनीति मजबूत करने की ओर बड़ा कदम

संगठन की नब्ज टटोलने काशीपुर पहुंचे शक्ति सिंह गोहिल और पर्यवेक्षक, कार्यकर्ताओं की राय से कांग्रेस ने जीत की नई रणनीति गढ़ने का संकल्प जताया

काशीपुर। कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों ने आज नया मोड़ ले लिया जब आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सृजन संगठन अभियान के तहत रायशुमारी की गई। उत्तराखंड में सियासी माहौल लगातार गर्म हो रहा है और अब डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। इसी क्रम में काशीपुर पहुंचे राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय नेता शक्ति सिंह गोहिल अपने तीन पर्यवेक्षकों दीवान सिंह तोमर, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला और हरिद्वार के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी वीरेंद्र रावत के साथ कार्यकर्ताओं से मिले। इस बैठक में बीते चुनावों में हार के कारणों पर चर्चा हुई और कार्यकर्ताओं की राय को गंभीरता से सुना गया। शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित संगठन है, जहां कार्यकर्ताओं की राय सर्वाेपरि होती है। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत गुजरात से हुई थी और वहां से अच्छे परिणाम मिले हैं। राहुल गांधी स्वयं इस पहल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और कार्यकर्ताओं से लगातार जुड़े हुए हैं।

सभा के दौरान शक्ति सिंह गोहिल ने स्पष्ट किया कि पार्टी की असफलताओं के पीछे संगठनात्मक कमजोरियों और कुछ गड़बड़ियों की भूमिका रही। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मेयर पद के चुनाव में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के कारण कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि सही परिस्थितियों में जीत उनकी होती। उन्होंने बताया कि महानगर अध्यक्ष का चुनाव महज आंतरिक बदलाव भर नहीं है बल्कि जनता की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने का माध्यम है। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि सृजन संगठन अभियान का असली उद्देश्य यह तय करना है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को किस स्थान पर बेहतर काम करने का अवसर मिल सकता है और कौन संगठन के हित में कहाँ अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार यह पहल कांग्रेस को मजबूत बनाएगी और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगी।

सभा के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को लेकर हुए विवाद पर सवाल उठाया गया तो शक्ति सिंह गोहिल ने भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं भाजपा को ष्बड़का झूठा पार्टीष् कह चुके हैं और आज भी यह बात सही साबित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी ने कभी मंच से इस तरह की टिप्पणी नहीं की, न ही उस वक्त मंच पर उनकी मौजूदगी थी। इसके विपरीत, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते सोनिया गांधी, इंदिरा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और राहुल गांधी तक के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने भाजपा पर झूठ और फरेब की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इनकी आदत ही जनता को गुमराह करना है। साथ ही उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम के आगे तक सम्मानसूचक ष्जीष् का प्रयोग नहीं किया, जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है। शक्ति सिंह गोहिल ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग मां के नाम पर राजनीति कर रहे हैं वे खुद अपनी मां को अपने जीवन में स्थान नहीं देते और यही भाजपा की असलियत है।

प्रदेशभर में आई प्राकृतिक आपदा पर प्रतिक्रिया देते हुए शक्ति सिंह गोहिल ने गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हाल ही में आई आपदा ने कई परिवारों को तबाह कर दिया और 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि सरकार को इस कठिन समय में तेजी से बचाव, राहत और पुनर्वास कार्य करना चाहिए था, लेकिन भाजपा सरकार हर स्तर पर नाकाम साबित हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा के समय समय पर और सही ढंग से राहत नहीं मिल पाई, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के समय बनी सड़कें आज भी मजबूती से खड़ी हैं, जबकि भाजपा शासन में बनी सड़कें थोड़ी ही बारिश में बह गईं। यह भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा है, जिसके लिए जनता भारी कीमत चुका रही है। शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसानों, छोटे व्यापारियों, मजदूरों और उन सभी परिवारों को तत्काल मुआवजा मिले जिन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी और जीवन का आधार खो दिया है।

इस तरह काशीपुर में हुई बैठक ने साफ संकेत दे दिया कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनाव को लेकर कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। शक्ति सिंह गोहिल और उनके साथ आए सभी पर्यवेक्षकों ने यह जताया कि पार्टी लोकतंत्र और संगठन की मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि सृजन संगठन अभियान कार्यकर्ताओं की नब्ज पकड़ने में कितना सफल होता है और क्या कांग्रेस इस बार राज्य की सियासत में नए समीकरण गढ़ पाती है या नहीं।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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