काशीपुर। काशीपुर का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने के लिए काशीपुर निवासी चौधरी परिवार ने अपनी परंपरा को कायम रखा है। लंबे समय से यह परिवार अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों के कारण न केवल शहर बल्कि पूरे उत्तराखंड की पहचान को नई ऊंचाइयां देता आया है। चाहे खेलों का मंच हो या न्यायपालिका का क्षेत्र, चौधरी परिवार की मेहनत और संघर्ष ने हमेशा प्रेरणा दी है। अब इस कड़ी में एक और गौरव जुड़ने जा रहा है जब काशीपुर कोतवाली के पूर्व कोतवाल विजय चौधरी मास्टर्स एशिया एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भाग लेने के लिए चयनित हुए हैं। यह खबर पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है क्योंकि 70 प्लस आयु वर्ग में उनका चयन एथलेटिक्स की कठिन प्रतिस्पर्धा में हुआ है, जो उनकी फिटनेस और संकल्प का उदाहरण है।
विभिन्न अवसरों पर चौधरी परिवार ने काशीपुर का मान बढ़ाया है। कभी एथलीट खिलाड़ियों की उपलब्धियां सुर्खियों में रही हैं तो कभी इस परिवार की बेटी ने सबसे कम उम्र में उत्तराखंड की पहली जज बनने का गौरव हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब उसी परिवार से विजय चौधरी का नाम खेलों की दुनिया में चर्चा का केंद्र बना है। उत्तराखंड पुलिस में लंबे समय तक सेवा देने और रामनगर कोतवाली में कोतवाल रहते हुए जिम्मेदारी निभाने के बाद भी उन्होंने खेलों के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी मेहनत और खेल भावना ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और समर्पण से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
चेन्नई में होने वाली मास्टर्स एशियाई चैंपियनशिप में विजय चौधरी 100 मीटर, 200 मीटर, 300 मीटर और 400 मीटर की दौड़ों में भाग लेंगे। उन्होंने खुद कहा है कि इन तीनों ही प्रतियोगिताओं में उनका लक्ष्य मेडल जीतना है और वे इसके लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। उनका कहना है कि कड़ी तैयारी और भगवान के आशीर्वाद से यह संभव होगा कि वे उत्तराखंड और देश दोनों का नाम रोशन करें। उनके आत्मविश्वास और संकल्प ने लोगों के बीच एक सकारात्मक माहौल बना दिया है और काशीपुर के लोग इस उम्मीद में हैं कि वे निश्चित रूप से पदक लेकर लौटेंगे। उनकी इस तैयारी ने न केवल परिवार बल्कि पूरे शहर को उत्साहित कर दिया है और लोग उनकी सफलता की प्रार्थना कर रहे हैं।उत्तराखंड पुलिस सेवा में अपने कार्यकाल के दौरान भी पूर्व कोतवाल विजया चौधरी ने खेल के मैदान पर अद्भुत छाप छोड़ी थी। उन्होंने ड्यूटी की व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के बीच खेलों के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया और लगातार अभ्यास जारी रखा। यही कारण रहा कि उस समय भी वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई पदक जीत चुके हैं। उनकी लगन और समर्पण ने न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया। सेवा काल के दौरान मिली इन उपलब्धियों ने उन्हें खास पहचान दिलाई और आज भी उनके अनुभव और जुनून से युवा खिलाड़ियों को सीखने का अवसर मिल रहा है। उनकी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि दृढ़ निश्चय से हर लक्ष्य संभव है।
खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि 70 वर्ष की आयु में इस तरह की प्रतिस्पर्धी दौड़ों में भाग लेना अत्यंत कठिन है और इसके लिए असाधारण फिटनेस, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। विजय चौधरी की मेहनत इस बात का प्रमाण है कि उम्र केवल कैलेंडर में दर्ज संख्या है और असली ताकत व्यक्ति की सोच और परिश्रम में छिपी होती है। यह चयन इस बात का संकेत भी है कि उत्तराखंड में खेल प्रतिभाएं हर क्षेत्र में मौजूद हैं और उन्हें उचित अवसर मिलने पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने में सक्षम हैं। काशीपुर के युवा खिलाड़ी भी विजय चौधरी से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि उनका सफर यह बताता है कि कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति से हर सपना साकार हो सकता है।
आयोजन समिति की ओर से भी इस बार उम्मीद जताई गई है कि चैंपियनशिप ऐतिहासिक साबित होगी और दर्शकों को रोमांच से भर देगी। विजय चौधरी जैसे खिलाड़ियों का चयन इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ा देता है। जिस तरह से चौधरी परिवार ने हमेशा शहर को नई पहचान दिलाई है, उसी तरह इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बार फिर काशीपुर का नाम ऊंचा होगा। इस आयोजन से पहले ही पूरा शहर उनके पीछे खड़ा दिखाई दे रहा है और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय खेल मंचों तक उनकी चर्चा हो रही है। आने वाले नवंबर में जब वे ट्रैक पर दौड़ेंगे, तब केवल एक खिलाड़ी नहीं बल्कि पूरा उत्तराखंड उनके साथ दौड़ता नजर आएगा।
एशिया मास्टर्स एथलेटिक्स चौंपियनशिप 5 से 9 नवंबर 2025 तक होने जा रही है और इस प्रतिष्ठित आयोजन को लेकर पूरे एशिया में खेल प्रेमियों और एथलीटों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। यह प्रतियोगिता न केवल खिलाड़ियों की प्रतिभा और जुनून का प्रदर्शन होगी बल्कि खेल भावना, अनुभव और फिटनेस के शानदार संगम का भी साक्षी बनेगी। विभिन्न एशियाई देशों से अनुभवी एथलीट इसमें भाग लेने आ रहे हैं, जिनकी उम्र भले ही बढ़ चुकी है, लेकिन उनके जोश और दृढ़ता में किसी तरह की कमी नहीं दिख रही। इस आयोजन का मकसद यह साबित करना है कि उम्र केवल एक संख्या है, और खेलों का जज्बा जीवनभर कायम रह सकता है।
प्रतियोगिता के दौरान ट्रैक एंड फील्ड से लेकर लंबी कूद, ऊंची कूद, थ्रोइंग इवेंट्स और स्प्रिंट तक कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। आयोजक समिति का कहना है कि इस बार प्रतिभागियों की संख्या पहले से कहीं अधिक होगी और दर्शक एक ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। खिलाड़ियों के परिवार और प्रशंसक भी उनके हौसले को बढ़ाने के लिए इस चौंपियनशिप का हिस्सा बनेंगे, जिससे माहौल और भी ऊर्जावान और प्रेरणादायक होगा। एथलेटिक्स की दुनिया में यह आयोजन अपने स्तर और उत्साह के लिए जाना जाता है और हर बार एशियाई देशों के मास्टर्स खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ताकत दिखाने का मौका देता है।
खास बात यह है कि मास्टर्स एथलेटिक्स चौंपियनशिप केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि जीवनशैली, स्वास्थ्य और अनुशासन का भी प्रतीक है। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले कई खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी भारत और एशिया का नाम रोशन किया है। अब वे अपने अनुभव के साथ आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह चौंपियनशिप किसी सीख से कम नहीं होगी, क्योंकि उन्हें मैदान पर यह देखने का मौका मिलेगा कि समर्पण और मेहनत से हर उम्र में फिटनेस और परफॉर्मेंस कैसे बनाए रखी जा सकती है।
5 से 9 नवंबर तक चलने वाला यह आयोजन खेल कैलेंडर की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आयोजकों ने तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है और सुरक्षा से लेकर दर्शकों की सुविधाओं तक हर चीज को विशेष महत्व दिया गया है। चौंपियनशिप में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के ठहरने और अभ्यास के लिए भी विश्वस्तरीय व्यवस्था की गई है। इस आयोजन के जरिए न केवल एथलीट्स को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा बल्कि मेजबान देश की पहचान और प्रतिष्ठा भी नई ऊंचाईयों पर पहुंचेगी। खेल जगत के जानकारों का मानना है कि यह आयोजन न केवल प्रतिस्पर्धा बल्कि एशियाई देशों के बीच एकजुटता और भाईचारे को भी मजबूत करेगा। आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजरें इस चौंपियनशिप पर होंगी और यह साबित करेगा कि खेल उम्र की सीमाओं से कहीं ऊपर है।
मास्टर्स एथलेटिक्स चौंपियनशिप का एक बड़ा आकर्षण उत्तराखंड से चयनित हुए 70 वर्षीय पूर्व कोतवाल विजया चौधरी भी हैं, जो इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। अपने अनुभव और वर्षों की सेवा के बाद भी उनका खेल के प्रति जो जुनून है, वह किसी युवा खिलाड़ी से कम नजर नहीं आता। खुद विजया चौधरी ने बातचीत में कहा कि उन्हें यह अवसर पाकर गर्व की अनुभूति हो रही है और पूरे उत्तराखंड के साथ-साथ देश का नाम रोशन करना उनका संकल्प है। उन्होंने बताया कि चेन्नई में होने वाली इस चौंपियनशिप में विदेशी खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करना उनके लिए एक बड़ा अनुभव होगा। इस उम्र में भी वे पूरी शिद्दत के साथ अभ्यास में जुटे हुए हैं और लगातार अपने प्रदर्शन को निखारने के प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि आशीर्वाद और कड़ी मेहनत के सहारे वे अवश्य ही मेडल जीतकर लौटेंगे।
खेल मैदान पर उतरने की तैयारी को लेकर विजया चौधरी ने यह भी बताया कि वे 100 मीटर, 200 मीटर, 300 मीटर और 400 मीटर जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे और उनकी कोशिश होगी कि हर दौड़ में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें। उनका मानना है कि भगवान के आशीर्वाद और जनता के समर्थन से वे फाइनल तक पहुंचकर कोई न कोई पदक जीतने में जरूर सफल होंगे। उनका यह आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच यह दिखाता है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उत्तराखंड के लिए यह गर्व का पल है कि एक वरिष्ठ नागरिक उम्र के इस पड़ाव पर भी एशियाई मंच पर उतरने जा रहा है और अपने राज्य व देश का नाम रौशन करने का सपना देख रहा है। खिलाड़ियों के परिवार और स्थानीय लोग भी इस सफलता की उम्मीद के साथ उनका हौसला बढ़ा रहे हैं, जिससे उनके आत्मबल में और अधिक ऊर्जा जुड़ गई है।



