रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एनसीसी कैडेटों को आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यवहारिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। 79 यूके बटालियन एनसीसी सब यूनिट के तत्वावधान में जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण डीडीएमए नैनीताल के सहयोग से एक दिवसीय आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण, त्वरित राहत-बचाव कार्य और जनजागरूकता से जुड़ा व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कैडेटों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि प्राकृतिक आपदाएं अचानक आती हैं और उनसे होने वाली क्षति को कम करने के लिए पूर्व तैयारी सबसे अहम भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण के दौरान महाविद्यालय परिसर में अनुशासन, उत्साह और सीखने की जिज्ञासा का वातावरण बना रहा, जहां एनसीसी कैडेटों ने गंभीरता से प्रत्येक जानकारी को आत्मसात किया और स्वयं को भविष्य की किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार करने का संकल्प लिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीडीएमए नैनीताल के मास्टर ट्रेनर (खोज एवं बचाव) नवीन चंद्र तथा असिस्टेंट कंसल्टेंट सुमित जोशी ने मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाई। दोनों विशेषज्ञों ने आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न तकनीकों, उपकरणों और व्यवहारिक तरीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप, बाढ़, आग, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किस प्रकार सतर्कता बरतनी चाहिए और किस क्रम में राहत एवं बचाव कार्य किए जाने चाहिए। प्रशिक्षकों ने यह भी समझाया कि किसी भी आपदा में घबराहट सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाती है, इसलिए संयम और सही निर्णय ही जान-माल की रक्षा का सबसे प्रभावी साधन होता है। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे कैडेटों को वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव हो सके।
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए एएनओ लेफ्टिनेंट (डॉ.) डी.एन. जोशी ने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कैडेटों को क्षेत्र में मौजूद और भविष्य में संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि कैडेटों को आपदा के प्रकारों के साथ-साथ आपदा से पहले की तैयारी, आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियां और आपदा के बाद की आवश्यक कार्यवाही के बारे में क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया। इस दौरान सुरक्षा उपायों, संसाधनों के सही उपयोग और आपदा प्रबंधन की बुनियादी अवधारणाओं पर विशेष जोर दिया गया। लेफ्टिनेंट (डॉ.) डी.एन. जोशी ने कहा कि एनसीसी कैडेट केवल अनुशासित विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवक भी होते हैं, जिनकी भूमिका आपातकाल में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशिक्षण सत्र में कैडेटों को कई उपयोगी व्यवहारिक अभ्यास भी कराए गए, जिनमें इंप्रोवाइज स्ट्रेचर बनाना प्रमुख रहा। उन्हें सिखाया गया कि सीमित संसाधनों के बावजूद घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से कैसे स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके साथ ही प्राथमिक उपचार की बुनियादी जानकारी दी गई, जिसमें रक्तस्राव रोकना, फ्रैक्चर की स्थिति में सावधानी बरतना और घायल को मानसिक रूप से स्थिर रखने के उपाय शामिल रहे। आग लगने की स्थिति में बचाव के तरीकों और बाढ़ जैसी आपदाओं में सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इन अभ्यासों के माध्यम से कैडेटों को यह एहसास कराया गया कि छोटी-सी जानकारी भी संकट के समय जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
कार्यक्रम के दौरान जनपद और राज्य स्तर पर उपलब्ध आपातकालीन सेवाओं की जानकारी भी साझा की गई। कैडेटों को आपदा की स्थिति में उपयोग किए जाने वाले टोल फ्री नंबर 1077 के महत्व के बारे में बताया गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सके। इसके साथ ही ‘सचेत’ और ‘भूदेव’ ऐप के उपयोग और उनके लाभों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षकों ने समझाया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए समय रहते सूचना मिलना और सही स्थान तक पहुंचना आज के दौर में आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा बन चुका है। महाविद्यालय परिसर के भीतर सुरक्षित स्थानों और निकासी मार्गों की पहचान कराते हुए यह भी बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में संगठित तरीके से बाहर निकलना कितना आवश्यक होता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। एएनओ लेफ्टिनेंट (डॉ.) डी.एन. जोशी के साथ-साथ डॉ. दीपक खाती, डॉ. सुभाष पोखरियाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गोविन्द सिंह जंगपांगी, सीनियर अंडर ऑफिसर विक्रम जलाल सहित बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों और शिक्षकों ने कैडेटों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से न केवल व्यक्तिगत क्षमता का विकास होता है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी मजबूत होता है। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशिक्षित नागरिकों की सहभागिता से ही प्रभावी बन सकता है।





